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Pilibhit News: 15 किलोमीटर के दायरे में चेनलिंक फेंसिंग के प्रस्ताव पर लग सकती है रोक
Mon, 05 Jan 2026 11:40 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 05 Jan 2026 11:40 PM IST
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पीटीआर में जंगल सीमा पर क्षतिग्रस्त चेनलिंक फेंसिंग। फाइलफोटो
- फोटो : सांकेतिक
पीलीभीत। पीटीआर के संवेदनशील हिस्से को सुरक्षित रखने के लिए भेजे गए चेनलिंक फेंसिंग के प्रस्ताव पर रोक लग सकती है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट के बाद प्रदेश भर के टाइगर रिजर्व में फेंसिंग कार्य पर रोक को लेकर निर्णय लिया जा सकता है। पीटीआर प्रशासन ने पूर्व में 15 किलोमीटर के दायरे में फेंसिंग के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था।
पीटीआर में बाघ समेत वन्यजीवों की संख्या बेहतर है। ऐसे में वन्यजीवों का जंगल से बाहर निकलने का सिलसिला भी बना रहता है। लंबे समय तक जंगल से बाहर रहने पर संघर्ष की स्थिति बन जाती है। पीटीआर के जंगल से सटे करीब 163 गांव हैं। यहां वन्यजीवों की अधिक सक्रियता बनी रहती है। इसमें कलीनगर, माधोटांडा, गजरौला, पूरनपुर, न्यूरिया और अमरिया क्षेत्र के कुछ गांव भी शामिल हैं। मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए पूर्व में विभाग की ओर से प्रयास शुरू हुए। वन्यजीवों को जंगल से बाहर निकलने से रोकने के लिए 66.92 किलोमीटर दायरे में फेंसिंग कराई। वर्ष 2020 के बाद से चेनलिंक फेंसिंग के कार्य शुरू किए गए। इससे संघर्ष की घटनाएं भी कम हुईं।
कुछ इलाके में फेंसिंग का कार्य शेष रह गया था। इसके देखते हुए विभाग ने सर्वे के बाद करीब 15 किलोमीटर दायरे में चेनलिंक फेंसिंग कराने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। मंजूरी का इंतजार किया जा रहा था लेकिन इस बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की ओर से फेंसिंग कार्यों पर आपत्ति जताई गई। समिति का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के नाम पर किए जा रहे प्रयास उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। फेंसिंग कार्यों को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत बताई है। ऐसे में माना जा रहा है कि पीटीआर की ओर से भेजे गए 15 किलोमीटर के दायरे में फेंसिंग कराने के प्रस्ताव पर भी रोक लग सकती है। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि पूर्व में प्रस्ताव भेजा है जो शासन स्तर पर लंबित है।
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पीटीआर में बाघ समेत वन्यजीवों की संख्या बेहतर है। ऐसे में वन्यजीवों का जंगल से बाहर निकलने का सिलसिला भी बना रहता है। लंबे समय तक जंगल से बाहर रहने पर संघर्ष की स्थिति बन जाती है। पीटीआर के जंगल से सटे करीब 163 गांव हैं। यहां वन्यजीवों की अधिक सक्रियता बनी रहती है। इसमें कलीनगर, माधोटांडा, गजरौला, पूरनपुर, न्यूरिया और अमरिया क्षेत्र के कुछ गांव भी शामिल हैं। मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए पूर्व में विभाग की ओर से प्रयास शुरू हुए। वन्यजीवों को जंगल से बाहर निकलने से रोकने के लिए 66.92 किलोमीटर दायरे में फेंसिंग कराई। वर्ष 2020 के बाद से चेनलिंक फेंसिंग के कार्य शुरू किए गए। इससे संघर्ष की घटनाएं भी कम हुईं।
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कुछ इलाके में फेंसिंग का कार्य शेष रह गया था। इसके देखते हुए विभाग ने सर्वे के बाद करीब 15 किलोमीटर दायरे में चेनलिंक फेंसिंग कराने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। मंजूरी का इंतजार किया जा रहा था लेकिन इस बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की ओर से फेंसिंग कार्यों पर आपत्ति जताई गई। समिति का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के नाम पर किए जा रहे प्रयास उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। फेंसिंग कार्यों को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत बताई है। ऐसे में माना जा रहा है कि पीटीआर की ओर से भेजे गए 15 किलोमीटर के दायरे में फेंसिंग कराने के प्रस्ताव पर भी रोक लग सकती है। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि पूर्व में प्रस्ताव भेजा है जो शासन स्तर पर लंबित है।
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