{"_id":"56f150d44f1c1b525ef14d45","slug":"people-came-forward-for-the-regeneration-of-pali","type":"story","status":"publish","title_hn":"पॉलि भाषा के उत्थान के लिए आगे आए लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पॉलि भाषा के उत्थान के लिए आगे आए लोग
ब्यूरो/ पीलीभीत।
Updated Tue, 22 Mar 2016 11:38 PM IST
विज्ञापन
विमोचन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संस्कृत संस्थान की अध्यक्ष ने दो ग्रंथों का किया विमोचन
राष्ट्रीय पॉलि सम्मेलन में संस्कृत, पॉलि भाषा के उत्थान पर हुई चर्चा
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पॉलि प्रकोष्ठ की अध्यक्ष व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री डॉ. साधना मिश्रा ने कहा कि संस्कृत व पॉलि भाषा में भारतीय संस्कृति, भारतीय मानवीय मूल्य व भारतीय मनीषा विद्यमान है। इसके बावजूद यह भाषा धीरे-धीरे काल कवलित होती जा रही है। इसके उत्थान के लिए संस्कृत व पॉलि प्रेमियों को आगे आना ही होगा।
वह शहर के दुग्धेश्वर संस्कृत महाविद्यालय में मंगलवार को हुए राष्ट्रीय पॉलि सम्मेलन को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि विकास के क्रम में पहले पॉलि फिर संस्कृत का जन्म हुआ। यह बड़ी चिंता का विषय है कि धीरे-धीरे पॉलि काल कवलित होती गई। प्रदेश सरकार पॉलि के संरक्षण व संवर्धन के लिए संकल्पित है। नेहरू मेमोरियल शिव नारायणदास कॉलेज बदायूं के प्राचार्य डॉ. वीके शर्मा ने कहा कि पॉलि साहित्य ने बौद्ध साहित्य को पुष्पित व पल्लवित कर इसके साहित्य को विकास किया। लखीमपुर खीरी से आईं संस्कृत मनीषी डॉ. सुरचना त्रिवेदी ने पॉलि साहित्य में उपलब्ध बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को आज के युग में आत्मसात करने पर बल दिया। मथुरा से आए प्राचार्य डॉ. जगदीश शर्मा ने बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघ शरणं गच्छामि की व्याख्या की और पॉलि ग्रंथों में प्राप्त सुख, शांति व समृद्धि की चर्चा की। दुग्धेश्वर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य मिथलेश कुमार मिश्र ने पॉलि संस्कृत के उत्थान के लिए निरंतर संगोष्ठियां कराने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन संयोजक डॉ. प्रणव शास्त्री ने किया। इस मौके पर उपाधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, पूर्व प्राचार्य डॉ. एसके शर्मा, प्रतीक सक्सेना, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राखी मिश्रा, अर्चना खंडेलवाल, डॉ. महेशचंद्र दुबे, लक्ष्मीकांत शर्मा, सीए संजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
दो ग्रंथों का हुआ विमोचन
सम्मेलन में अध्यक्ष डॉ. साधना मिश्रा ने साहित्यकार मिथिलेश शर्मा व उनके पिता द्वारा लिखित दो ग्रंथों का विमोचन किया। इस दौरान उनके द्वारा साहित्य क्षेत्र में किए जा रहे कार्यो के बारे में बताया गया।
विज्ञापन
सम्मेलन में उभरा दर्द
राष्ट्रीय सम्मेलन में दुग्धेश्वर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार मिश्र ने जिले के पांच संस्कृत महाविद्यालय में शिक्षकों के पद 22 वर्षों से रिक्त पड़े होने की बात कही। उन्होंने अध्यक्ष को बताया कि इनमें दो महाविद्यालय शिक्षक विहीन चल रहे हैं। उन्होंने महाविद्यालयों में रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति कराने का आग्रह किया।
विज्ञापन
राष्ट्रीय पॉलि सम्मेलन में संस्कृत, पॉलि भाषा के उत्थान पर हुई चर्चा
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पॉलि प्रकोष्ठ की अध्यक्ष व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री डॉ. साधना मिश्रा ने कहा कि संस्कृत व पॉलि भाषा में भारतीय संस्कृति, भारतीय मानवीय मूल्य व भारतीय मनीषा विद्यमान है। इसके बावजूद यह भाषा धीरे-धीरे काल कवलित होती जा रही है। इसके उत्थान के लिए संस्कृत व पॉलि प्रेमियों को आगे आना ही होगा।
वह शहर के दुग्धेश्वर संस्कृत महाविद्यालय में मंगलवार को हुए राष्ट्रीय पॉलि सम्मेलन को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि विकास के क्रम में पहले पॉलि फिर संस्कृत का जन्म हुआ। यह बड़ी चिंता का विषय है कि धीरे-धीरे पॉलि काल कवलित होती गई। प्रदेश सरकार पॉलि के संरक्षण व संवर्धन के लिए संकल्पित है। नेहरू मेमोरियल शिव नारायणदास कॉलेज बदायूं के प्राचार्य डॉ. वीके शर्मा ने कहा कि पॉलि साहित्य ने बौद्ध साहित्य को पुष्पित व पल्लवित कर इसके साहित्य को विकास किया। लखीमपुर खीरी से आईं संस्कृत मनीषी डॉ. सुरचना त्रिवेदी ने पॉलि साहित्य में उपलब्ध बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को आज के युग में आत्मसात करने पर बल दिया। मथुरा से आए प्राचार्य डॉ. जगदीश शर्मा ने बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघ शरणं गच्छामि की व्याख्या की और पॉलि ग्रंथों में प्राप्त सुख, शांति व समृद्धि की चर्चा की। दुग्धेश्वर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य मिथलेश कुमार मिश्र ने पॉलि संस्कृत के उत्थान के लिए निरंतर संगोष्ठियां कराने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन संयोजक डॉ. प्रणव शास्त्री ने किया। इस मौके पर उपाधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, पूर्व प्राचार्य डॉ. एसके शर्मा, प्रतीक सक्सेना, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राखी मिश्रा, अर्चना खंडेलवाल, डॉ. महेशचंद्र दुबे, लक्ष्मीकांत शर्मा, सीए संजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
दो ग्रंथों का हुआ विमोचन
सम्मेलन में अध्यक्ष डॉ. साधना मिश्रा ने साहित्यकार मिथिलेश शर्मा व उनके पिता द्वारा लिखित दो ग्रंथों का विमोचन किया। इस दौरान उनके द्वारा साहित्य क्षेत्र में किए जा रहे कार्यो के बारे में बताया गया।
विज्ञापन
सम्मेलन में उभरा दर्द
राष्ट्रीय सम्मेलन में दुग्धेश्वर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार मिश्र ने जिले के पांच संस्कृत महाविद्यालय में शिक्षकों के पद 22 वर्षों से रिक्त पड़े होने की बात कही। उन्होंने अध्यक्ष को बताया कि इनमें दो महाविद्यालय शिक्षक विहीन चल रहे हैं। उन्होंने महाविद्यालयों में रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति कराने का आग्रह किया।