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Pilibhit News: राजकीय महिला अस्पताल न होने से मरीजों को दिक्कत
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बीसलपुर में जर्जर पड़ा राज कीय महिला अस्पताल का भवन संवाद
- फोटो : 1
बीसलपुर। नगर में राजकीय महिला अस्पताल न होने से पूरे तहसील क्षेत्र की महिलाओं को दिक्कत हो रही है। स्थानीय लोग महिला अस्पताल खुलवाने की मांग लगातार कर रहे हैं।
नगर में वर्ष 1999 तक राजकीय महिला अस्पताल नियमित रूप से चलता रहा। वर्ष 2000 में अस्पताल का भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया था। विभाग ने उस जर्जर भवन के मरम्मत कराने अथवा उसके स्थान पर नए भवन बनवाने के बजाय महिला अस्पताल ही खत्म कर दिया। अभी भी दोबारा चालू नहीं हो पाया है। राजकीय महिला अस्पताल न होने के कारण पूरे तहसील क्षेत्र की महिलाओं को काफी दिक्कत होती है। उन्हें उपचार कराने के लिए पीलीभीत, शाहजहांपुर और बरेली जाना पड़ता है। गरीब महिलाओं को इसमें काफी समस्या आती है।
मरीज झोलाछाप के यहां जाने को मजबूर
गरीब महिला मरीजों को मजबूरी में झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है। महिला अस्पताल दोबारा खुलवाने की मांग कई बार की जा चुकी, लेकिन अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
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विभाग के अफसर ही लेंगे निर्णय : केंद्र अधीक्षक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. आलमगीर का कहना कि बीसलपुर में राजकीय महिला अस्पताल न होने की जानकारी विभाग के सभी उच्च अधिकारियों को है। इस संबंध में विभाग के आला अफसर ही निर्णय लेंगे। संवाद
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नगर में वर्ष 1999 तक राजकीय महिला अस्पताल नियमित रूप से चलता रहा। वर्ष 2000 में अस्पताल का भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया था। विभाग ने उस जर्जर भवन के मरम्मत कराने अथवा उसके स्थान पर नए भवन बनवाने के बजाय महिला अस्पताल ही खत्म कर दिया। अभी भी दोबारा चालू नहीं हो पाया है। राजकीय महिला अस्पताल न होने के कारण पूरे तहसील क्षेत्र की महिलाओं को काफी दिक्कत होती है। उन्हें उपचार कराने के लिए पीलीभीत, शाहजहांपुर और बरेली जाना पड़ता है। गरीब महिलाओं को इसमें काफी समस्या आती है।
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मरीज झोलाछाप के यहां जाने को मजबूर
गरीब महिला मरीजों को मजबूरी में झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है। महिला अस्पताल दोबारा खुलवाने की मांग कई बार की जा चुकी, लेकिन अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
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विभाग के अफसर ही लेंगे निर्णय : केंद्र अधीक्षक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. आलमगीर का कहना कि बीसलपुर में राजकीय महिला अस्पताल न होने की जानकारी विभाग के सभी उच्च अधिकारियों को है। इस संबंध में विभाग के आला अफसर ही निर्णय लेंगे। संवाद