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चुनाव लड़ने पर आंच आई तो रिकवरी की राशि जमा करने दौड़े प्रधान

Tue, 29 Dec 2020 12:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2020 12:21 AM IST
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पीलीभीत। दो साल से रिकवरी की राशि जमा करने में आनाकानी कर रहे ग्राम प्रधान अब खुद के चुनाव लड़ने पर पाबंदी के आदेश होने के बाद बचाव की जद्दोजहद तेज कर दी है। डीएम की सख्ती के बाद सभी के पास नोटिस पहुंचे तो अब रकम जमा करना शुरू कर दी है। वहीं पंचायत सचिवों पर अभी शिकंजा नहीं कसा जा सका है। वह रकम जमा करने को सुध नहीं ले रहे हैं।
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ग्रामीण इलाकों में साफ-सफाई बेहतर बनाने के उद्देेश्य से कूड़ेदान की खरीद कराई गई थी। ग्राम पंचायतों में कागजों में तो कूड़ेदान रख दिए गए थे, लेकिन धरातल पर बड़ा घोटाला कर दिया गया था। लोहे के पुराने ड्रम खरीदने के बाद उन्हें कटवाकर रंगाई पुताई करके रखवा दिया गया था। नए कूड़ेदान खरीदने के नाम पर प्रधान और सचिवों ने जनपद भर में करीब 99 लाख रुपये का गबन किया था। माधोटांडा रोड पर एक भाजपा नेता की फर्म से कूड़ेदान की आपूर्ति की बात सामने आई थी। इस मामले से पहले अधिकारी निगाहें फेरे रहे। बाद में खुद पर आंच आई तो जांच कराई गई, जिसमें 164 ग्राम प्रधान और 40 सचिव दोषी पाए गए। इनसे रिकवरी के आदेश हुए थे। हालांकि रिकवरी में भी 20 प्रधानों को छोड़कर अन्य सभी पर दो से पांच हजार तक की रकम दिखाई गई थी, लेकिन अधिकतर प्रधानों ने रिकवरी की रकम जमा नहीं की। एक सप्ताह पूर्व डीएम पुलकित खरे ने सख्ती की। 19 सचिवों और 142 ग्राम प्रधानों को नोटिस देकर रिकवरी की राशि जमा करने के निर्देश दिए। रकम जमा न करने पर सचिवों को एफआईआर और प्रधानों को आगामी चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी र्दी। इसके बाद भी सचिव बेपरवाह बने हैं, मगर ग्राम प्रधान कार्यकाल समाप्त होने के बाद इसे लेकर गंभीर हो गए हैं। दोबारा चुनाव लड़ने में कोई बाधा न आए इसलिए जिला पंचायती राज कार्यालय पहुंचकर रकम जमा करानी शुरू कर दी है। उधर, डीएम के बाद शासन ने भी इस मुद्दे पर सख्ती की है। आदेश दिए है कि रिकवरी की राशि जमा किए बिना किसी भी प्रधान का नो ड्यूज जारी न किया जाए। फिलहाल दो साल से बेपरवाह प्रधानों के अब राशि जमा कराने के लिए दौड़भाग शुरू कर दी है।
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प्रधानों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इसी बीच अब नोटिस भेजे गए तो रिकवरी की रकम जमा कराने के लिए आगे आ रहे हैं। कइयों ने रकम जमा भी कर दी है। यह चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध की चेतावनी का असर है। शासन ने भी रकम जमा न करने पर नो ड्यूज देने से इनकार कर दिया है। - प्रमोद कुमार यादव, डीपीआरओ
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