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अफसर अवैध कब्जे नहीं रोक पाएं...तो बाघों को दूसरे जंगल में शिफ्ट कराएं

Wed, 22 Jan 2020 10:51 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 10:51 PM IST
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पीलीभीत। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव सुनील कुमार पांडे ने बढ़ती बाघों की संख्या को देखते हुए टाइगर रिजर्व के बाघों को स्थानांतरण की अनुमति और मदद के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को पत्र भेजा है। मौजूदा समय में पीटीआर में 65 बाघ हैं, जबकि 10 बाघ जंगल क्षेत्र से बाहर घूम रहे हैं। यह अलग बात है कि पीटीआर अफसर जंगल की जमीन पर अवैध कब्जे तो रोक नहीं पाए, लेकिन जिन बाघों को चलते जंगल को पहचान मिली, उनको दूसरे जंगलों में शिफ्ट करने की तैयारी शुरू कर दी।
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बाघ संरक्षण के नाम जिले 73 हजार हेक्टेयर में फैले जंगल को 14 जून 2014 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। हालांकि यह सब कुछ आनन फानन में किया गया। इसके बावजूद प्राकृतिक अनुकूलता मिलने पर टाइगर रिजर्व में बाघों के अलावा अन्य वन्यजीवों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होती गई। टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक मौजूदा समय में बाघों की संख्या 65 के आसपास है। इसके अलावा दस अन्य बाघ जंगल से निकलकर अमरिया क्षेत्र में डेरा जमाए हुए हैं। हालांकि यह बाघ इंसानों पर कभी हमलावर नहीं हुए। बाघों की बढ़ती संख्या और जंगल के सिकुड़ते दायरे को लेकर प्रदेश के पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ सुनील कुमार पांडे ने बाघों को सुरक्षित प्राकृतिक वास उपलब्ध कराने को बाघों की शिफ्टिंग की कवायद शुरू की है। जानकारों के मुताबिक यदि टाइगर रिजर्व अपने जंगल क्षेत्र में हुए अवैध कब्जों को अतिक्रमणमुक्त करा लें तो शायद बाघों को दूसरे जंगल में स्थानांतरित करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
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तेजी से घटे वासस्थल और जंगल की जमीनों पर होते गए कब्जे
टाइगर रिजर्व में नरकुल काटने पर पाबंदी है, इन सबके बावजूद तराई क्षेत्र में चोरी छिपे नरकुल कटवाया जा रहा हैं। इस नरकुल से चटाई बनाई जा रही है। जंगल जमीन पर अवैध कब्जों की बात करें तो टाइगर रिजर्व की हरीपुर और बराही रेंजों समेत कई अन्य स्थानों पर जंगल जमीन पर अवैध कब्जे हैं। हरीपुर रेंज की बात करें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मूसेपुर में 30 हेक्टेयर, बरुआ कुठारा में 180, बंदरबोझ में 99.80 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे हैं। वहीं बराही रेंज में ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा, गुन्हान में टइगर रिजर्व की 70 फीसदी जमीन पर अवैध कब्जे हैं। यदि अवैध कब्जों के मामलों में पीटीआर प्रशासन कार्रवाई करें तो जंगल का दायरा बढ़ सकता है।
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बाघों की संख्या बढ़ने से बढ़े हमले
मानव की आबादी बढ़ने के साथ ही बाघों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। अतिक्रमण के चलते जंगल क्षेत्र सिकुड़ते गए और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में इजाफा होने लगा। टाइगर रिजर्व बनने के बाद बाघ हमलों से 25 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 10 बाघों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। हालांकि गत वर्ष से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आई।
जिले में बाघों की संख्या
वर्ष/बाघों की संख्या
1999/16
2001/26
2003/32
2007/36
2010/45
2011/33
2014/28
2015/44
2019/65
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