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सिल्ट सफाई के नाम पर 21 किमी नहर खोदी, करोड़ों का अवैध खनन
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पीलीभीत। एक तरफ योगी सरकार अवैध खनन रोकने को तमाम प्रयास कर रही है, लेकिन सिस्टम किसी की नहीं सुन रहा। शासन की मंशा को पलीता लगाने का काम किया जा रहा है। इसकी एक बानगी अमरिया क्षेत्र में देखने को मिली। यहां शारदा सागर खंड के अफसरों ने डीबी फीडर नहर की सिल्ट सफाई के नाम पर ठेकेदारों से मिलकर करोड़ों का खेल कर दिया। इस खेल में सत्तादल के नेताओं के अलावा अफसर और ठेकेदार शामिल हैं।
डीबी फीडर नहर में 14 दिसंबर को पानी छोड़ा जाना तय हुआ था। इसके लिए शारदा सागर खंड की ओर से डीबी फीडर नहर की सिल्ट सफाई के लिए 21 अक्तूबर को 2.57 लाख घनमीटर की सिल्ट सफाई के लिए टेंडर किया गया। इस टेंडर में सिल्ट सफाई के नाम पर नहर की रेत निकालने में ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए मात्र 55 रुपये प्रति घन की दर से रॉयल्टी निर्धारित की गई, जबकि खनन विभाग की रॉयल्टी दर 375 रुपये प्रति घन मीटर की दर से है। 10 ठेकेदारों ने शारदा सागर खंड के अधिकारियों से मिलकर अमरिया की डीबी फीडर नहर को 21 किलोमीटर तक पोकलैंड मशीन, जेसीबी लगाकर खोद डाला और सिल्ट सफाई को श्रमदान बताकर करोड़ों का खेल कर दिया। अब खनन की रेत के ढेर नहर किनारे कई जगहों पर डंप हैं। उसको बेचने की तैयारी की जा रही है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। सिल्ट निकासी के ये टेंडर एक नवंबर से छह नवंबर तक ऑनलाइन मांगे गए थे, मगर अंदरुनी साठगांठ के चलते किसी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाले। इसलिए इन टेंडरों को निरस्त किया। फिर नहर की सिल्ट सफाई के नाम पर रेत निकासी के काम को श्रमदान घोषित किया गया। खनन माफियाओं ने जेसीबी और पोकलैंड मशीनें लगाकर रेत के ढेर लगा दिए। अब नहर से निकली रेत को बेचने की तैयारी है। विशेषज्ञों के अनुसार अवैध तरीके से निकाली गई इस रेत की कीमत 10 करोड़ से भी अधिक है। इसमें सिल्ट सफाई की रेत से होने वाली कमाई का बंटवारा नीचे से ऊपर तक होना है। इसका ताना-बाना पूरी तरह बुना जा चुका है, सिर्फ अमल में आना बाकी है। इस संबंध में शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता हरीश यादव से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
पूरे सिंडिकेट को साढ़े आठ करोड़ का फायदा
नहर में श्रमदान से सिल्ट सफाई के नाम पर ठेकेदार, अधिकारी और नेताओं के गठजोड़ ने खनन निकासी का जो प्लान तैयार किया है, उसमें इस सिंडिकेट को साढ़े आठ करोड़ का सीधा फायदा है। यह पूरा खेल लगभग 10 करोड़ का है। सिल्ट सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग में हर साल अरबों का बजट ठिकाने लगता है। मगर, अमरिया की डीबी फीडर नहर में बिना टेंडर निकाले ही श्रमदान के नाम पर सिंडिकेट फायदा लेगा।
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सपा सरकार में भी तैनात रहे हैं एक्सईएन
सिंचाई विभाग में तैनात एक बड़े अफसर सपा सरकार में भी पीलीभीत में रहे हैं। उनको यहां की नहरों, माइनर और रजवाह की सिल्ट सफाई से लेकर अन्य तमाम योजनाओं की गहरी जानकारी है। नहरों की सफाई का काम लंबे समय से इन्हीं के निर्देशन में चल रहा है।
सिंचाई विभाग से मेरे पास एक पत्र आया था। उसमें बताया गया कि नहर में सिल्ट सफाई का टेंडर हुआ है। अब पता चला है कि टेंडर निरस्त होने के बाद श्रमदान से सफाई हो रही है। अगर नियम उल्लंघन हो रहा है, तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। - जंग बहादुर, एसडीएम अमरिया
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डीबी फीडर नहर में 14 दिसंबर को पानी छोड़ा जाना तय हुआ था। इसके लिए शारदा सागर खंड की ओर से डीबी फीडर नहर की सिल्ट सफाई के लिए 21 अक्तूबर को 2.57 लाख घनमीटर की सिल्ट सफाई के लिए टेंडर किया गया। इस टेंडर में सिल्ट सफाई के नाम पर नहर की रेत निकालने में ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए मात्र 55 रुपये प्रति घन की दर से रॉयल्टी निर्धारित की गई, जबकि खनन विभाग की रॉयल्टी दर 375 रुपये प्रति घन मीटर की दर से है। 10 ठेकेदारों ने शारदा सागर खंड के अधिकारियों से मिलकर अमरिया की डीबी फीडर नहर को 21 किलोमीटर तक पोकलैंड मशीन, जेसीबी लगाकर खोद डाला और सिल्ट सफाई को श्रमदान बताकर करोड़ों का खेल कर दिया। अब खनन की रेत के ढेर नहर किनारे कई जगहों पर डंप हैं। उसको बेचने की तैयारी की जा रही है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। सिल्ट निकासी के ये टेंडर एक नवंबर से छह नवंबर तक ऑनलाइन मांगे गए थे, मगर अंदरुनी साठगांठ के चलते किसी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाले। इसलिए इन टेंडरों को निरस्त किया। फिर नहर की सिल्ट सफाई के नाम पर रेत निकासी के काम को श्रमदान घोषित किया गया। खनन माफियाओं ने जेसीबी और पोकलैंड मशीनें लगाकर रेत के ढेर लगा दिए। अब नहर से निकली रेत को बेचने की तैयारी है। विशेषज्ञों के अनुसार अवैध तरीके से निकाली गई इस रेत की कीमत 10 करोड़ से भी अधिक है। इसमें सिल्ट सफाई की रेत से होने वाली कमाई का बंटवारा नीचे से ऊपर तक होना है। इसका ताना-बाना पूरी तरह बुना जा चुका है, सिर्फ अमल में आना बाकी है। इस संबंध में शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता हरीश यादव से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
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पूरे सिंडिकेट को साढ़े आठ करोड़ का फायदा
नहर में श्रमदान से सिल्ट सफाई के नाम पर ठेकेदार, अधिकारी और नेताओं के गठजोड़ ने खनन निकासी का जो प्लान तैयार किया है, उसमें इस सिंडिकेट को साढ़े आठ करोड़ का सीधा फायदा है। यह पूरा खेल लगभग 10 करोड़ का है। सिल्ट सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग में हर साल अरबों का बजट ठिकाने लगता है। मगर, अमरिया की डीबी फीडर नहर में बिना टेंडर निकाले ही श्रमदान के नाम पर सिंडिकेट फायदा लेगा।
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सपा सरकार में भी तैनात रहे हैं एक्सईएन
सिंचाई विभाग में तैनात एक बड़े अफसर सपा सरकार में भी पीलीभीत में रहे हैं। उनको यहां की नहरों, माइनर और रजवाह की सिल्ट सफाई से लेकर अन्य तमाम योजनाओं की गहरी जानकारी है। नहरों की सफाई का काम लंबे समय से इन्हीं के निर्देशन में चल रहा है।
सिंचाई विभाग से मेरे पास एक पत्र आया था। उसमें बताया गया कि नहर में सिल्ट सफाई का टेंडर हुआ है। अब पता चला है कि टेंडर निरस्त होने के बाद श्रमदान से सफाई हो रही है। अगर नियम उल्लंघन हो रहा है, तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। - जंग बहादुर, एसडीएम अमरिया