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छोटे मवेशियों की तलाश में आबादी में पहुंच रहा तेंदुआ
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जंगल से बाहर निकलकर सीमावर्ती इलाके में तेंदुओं का आतंक जारी है। छोटे मवेेशी तेंदुए का पसंदीदा भोजन है। इसके चलते तेंदुए आबादी में दस्तक देकर कुत्ते, बकरे और मुर्गों समेत अन्य छोटे मवेशियों को निवाला बना रहे हैं। डेढ़ साल में दर्जनों छोटे मवेशी तेंदुए का निवाला बन चुके हैं।
टाइगर रिजर्व के जंगल में बाघ और तेंदुओं की संख्या में इजाफा हुआ है। सेव इंवायरमेंट वेलफेयर सोसाइटी के सचिव टीएच खान के अनुसार जंगल में बाघ की संख्या बढ़ने से तेंदुए सीमा से सटे गांवों की ओर निकल पड़े हैं। जहां बाघ हैं, वहां तेंदुआ नहीं रुक सकता। चूंकि कुत्ते, बकरी और अन्य छोटे जानवर तेंदुए का पसंदीदा भोजन हैं। इसलिए तेंदुए अपने शिकार की तलाश में आबादी की ओर पहुंचकर मवेशियों को निवाला बना रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए ग्रामीणों को जागरूक होना जरूरी है। वन विभाग की ओर से भी कहा गया है कि गांव के लोग अपने मवेशियों को खुले में न बांधें क्योंकि एक बार शिकार मिलने पर तेंदुआ दोबारा उस इलाके में चहलकदमी करता पहुंच जाता है।
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टाइगर रिजर्व के जंगल में बाघ और तेंदुओं की संख्या में इजाफा हुआ है। सेव इंवायरमेंट वेलफेयर सोसाइटी के सचिव टीएच खान के अनुसार जंगल में बाघ की संख्या बढ़ने से तेंदुए सीमा से सटे गांवों की ओर निकल पड़े हैं। जहां बाघ हैं, वहां तेंदुआ नहीं रुक सकता। चूंकि कुत्ते, बकरी और अन्य छोटे जानवर तेंदुए का पसंदीदा भोजन हैं। इसलिए तेंदुए अपने शिकार की तलाश में आबादी की ओर पहुंचकर मवेशियों को निवाला बना रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए ग्रामीणों को जागरूक होना जरूरी है। वन विभाग की ओर से भी कहा गया है कि गांव के लोग अपने मवेशियों को खुले में न बांधें क्योंकि एक बार शिकार मिलने पर तेंदुआ दोबारा उस इलाके में चहलकदमी करता पहुंच जाता है।
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