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वन्य जीवों की कैसे होगी सुरक्षा, जब फाइलों में लटकी जांच
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वन और वन्यजीवों की सुरक्षा पर वन विभाग के अफसर संजीदा नहीं हैं। बीते कुछ समय में टाइगर रिजर्व एरिया में तेंदुए की मौत और शिकारियों के बिछाए गए जाल में फंसे तेंदुओं की जांच रिपोर्ट भी फाइलों में लटक गई। इससे वन्य जीवों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
पीलीभीत को पांच साल पूर्व टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। 73 हजार हेक्टेयर में फैले इस जंगल को पांच रेंजों में बांटा गया है। टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुओं समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में हालांकि इजाफा हो रहा है। मगर, वन विभाग के पास संसाधनों के साथ फील्ड स्टाफ की भी कमी है। इसके चलते वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में चूक अक्सर सामने आती रहती है। बीते कुछ समय में शिकारियों के जाल में फंसकर तेंदुए की मौत और दूसरे तेंदुए का दांत टूटने की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई। वन विभाग के अफसरों ने जांच फाइलों में लटका रखा है। इससे वन्य जीवों का शिकार करने वाले शिकारियों के हौसले बुलंद हैं। वन विभाग ऐसे शिकारियों पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है।
केस एक: 19 अगस्त को बराही रेंज की सीमा पर तारफेंसिंग के निकट नर तेंदुए का शव मिला था। तेंदुआ का शरीर सुरक्षित था। घटना स्थल पर ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जो जानवरों के आपसी संघर्ष की ओर इशारा कर रहे हों। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए की मौत गर्दन की नस डैमेज होने से बताई गई। अफसरों ने संघर्ष करने वाले अन्य वन्यजीव की तलाश के लिए जांच बिठा दी। अब न तो जांच पूरी हो सकी, न ही संघर्ष करने वाले वन्यजीव मिला।
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केस दो: 24 सितंबर को बराही रेंज की सेल्हा बीट के जंगल में शिकारियों के बिछाए जाल में एक तेंदुआ फंस गया था। राहगीरों की सूचना पर अफसरों ने रेस्क्यू कर तेंदुए को सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया। उसका एक दांत टूटा पाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि उम्र अधिक होने से दांत टूट गया होगा। चिकित्सकों की राय के बाद तेंदुए को कानपुर चिड़िया घर भेज दिया गया। जांच एसडीओ को सौंपी गई। तेंदुए का दांत टूटने की वजह का पता नहीं चल सका।
15 दिन में होनी थी, डेढ़ माह में नहीं हुई जांच
टाइगर रिजर्व प्रशासन की माने तो किसी भी मामले में जांच का समय 15 दिन होता है। ऐसे में तेंदुए की मौत के मामले डेढ़ माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अफसरों को जांच रिपोर्ट मिल सकी है।
वन और वन्यजीवों की सुरक्षा पर टीम चौकस है। तेंदुए की मौत और जाल के फंसने की हकीकत जानने के लिए जांच सौंपी गई थी। जल्द ही जांच रिपोर्ट मिल जाएगी। - नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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पीलीभीत को पांच साल पूर्व टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। 73 हजार हेक्टेयर में फैले इस जंगल को पांच रेंजों में बांटा गया है। टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुओं समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में हालांकि इजाफा हो रहा है। मगर, वन विभाग के पास संसाधनों के साथ फील्ड स्टाफ की भी कमी है। इसके चलते वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में चूक अक्सर सामने आती रहती है। बीते कुछ समय में शिकारियों के जाल में फंसकर तेंदुए की मौत और दूसरे तेंदुए का दांत टूटने की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई। वन विभाग के अफसरों ने जांच फाइलों में लटका रखा है। इससे वन्य जीवों का शिकार करने वाले शिकारियों के हौसले बुलंद हैं। वन विभाग ऐसे शिकारियों पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है।
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केस एक: 19 अगस्त को बराही रेंज की सीमा पर तारफेंसिंग के निकट नर तेंदुए का शव मिला था। तेंदुआ का शरीर सुरक्षित था। घटना स्थल पर ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जो जानवरों के आपसी संघर्ष की ओर इशारा कर रहे हों। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए की मौत गर्दन की नस डैमेज होने से बताई गई। अफसरों ने संघर्ष करने वाले अन्य वन्यजीव की तलाश के लिए जांच बिठा दी। अब न तो जांच पूरी हो सकी, न ही संघर्ष करने वाले वन्यजीव मिला।
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केस दो: 24 सितंबर को बराही रेंज की सेल्हा बीट के जंगल में शिकारियों के बिछाए जाल में एक तेंदुआ फंस गया था। राहगीरों की सूचना पर अफसरों ने रेस्क्यू कर तेंदुए को सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया। उसका एक दांत टूटा पाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि उम्र अधिक होने से दांत टूट गया होगा। चिकित्सकों की राय के बाद तेंदुए को कानपुर चिड़िया घर भेज दिया गया। जांच एसडीओ को सौंपी गई। तेंदुए का दांत टूटने की वजह का पता नहीं चल सका।
15 दिन में होनी थी, डेढ़ माह में नहीं हुई जांच
टाइगर रिजर्व प्रशासन की माने तो किसी भी मामले में जांच का समय 15 दिन होता है। ऐसे में तेंदुए की मौत के मामले डेढ़ माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अफसरों को जांच रिपोर्ट मिल सकी है।
वन और वन्यजीवों की सुरक्षा पर टीम चौकस है। तेंदुए की मौत और जाल के फंसने की हकीकत जानने के लिए जांच सौंपी गई थी। जल्द ही जांच रिपोर्ट मिल जाएगी। - नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व