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हालत जर्जर होने से शारदा डैम खतरे में
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माधोटांडा(पीलीभीत)। सिंचाई के लिए अति महत्वपूर्ण समझे जाने वाले शारदा सागर डैम की हालत दिनोंदिन जर्जर होती जा रही है। 10 से 15 किमी के बीच पानी के मुख्य भंडार के बाहर क्रैक पाइप से पानी का रिसाव हो रहा है। इससे आसपास दलदल की स्थिति बन गई है। इससे डैम की सुरक्षा पर खतरा बढ़ने लगा है। यह हालत मुख्य भंडार में झाड़ियां उगने और सिल्ट जमा होने के बावजूद डैम में पानी भरे जाने से बनी है, क्योंकि इससे डैम पर भार बढ़ रहा है। डैम में पानी के भंडार की क्षमता भी इससे घटी है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत शारदा डैम का निर्माण वर्ष 1950 से 1960 के बीच हुई था। इस डैम से प्रदेश के 10 से अधिक जनपदों में सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराया जाता है। पिछले लंबे समय में शारदा डैम की स्थिति जर्जर हो गई है। अफसरों की मानें तो बजट की कमी चलते डैम में मरम्मत भी नहीं कराई जा सकी है। हालांकि सही बात यह है कि जो बजट पूर्व में मिला भी, उससे काम न के बराबर कराया गया बल्कि पूरे बजट का खर्च इधर-उधर दर्शाकर उसे ठिकाने ज्यादा लगाया गया। नतीजतन डैम के अंदर और बाहर का भाग बदहाल होता जा रहा है। वहीं अंदर भाग में सिल्ट भी पटती जा रही है, इसके चलते अतिरिक्त भार बांध पर पड़ रहा है। इसके चलते डैम के बाहर ड्रेन के क्षेत्र में सीपेज के साथ लीकेज की समस्या भी बनने का खतरा रहता है। इधर नतीजतन क्रैक पाइप से पानी रिसकर बांध की नींव तक पहुंचता है। इन दिनों डैम में पानी का लेवल 620 फुट से ऊपर हो चुका है, जबकि लगभग 622 फुट तक इसे भरे जाने की योजना है। स्थिति यह है कि दसवें किलोमीटर से लेकर 15 किमी से आगे तक डैम की मुख्य बॉडी और लॉन्ग ड्रेन के मध्य क्रैक पाइप से फिल्टर पानी निकल कर फैल रहा है। मुख्य बॉडी से ड्रेन क्षेत्र तक मिट्टी दलदली हो रही है, लेकिन अभियंता कोई खास ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इस संबंध में सिंचाई विभाग की ओर से जानकारी नहीं दी गई है। शारदा सागर खंड के अफसरों को लिखकर भेजा जाएगा। -हरिओम शर्मा, एसडीएम कलीनगर
शारदा डैम के 10 से 12 किलोमीटर के बीच की यह समस्या काफी पुरानी है। पहले इसकी मरम्मत भी कराई गई है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए डैम सेफ्टी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही उसे ठीक कराया जाएगा। -हरिश्चंद्र यादव, एक्सईएन, शारदा सागर खंड
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प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत शारदा डैम का निर्माण वर्ष 1950 से 1960 के बीच हुई था। इस डैम से प्रदेश के 10 से अधिक जनपदों में सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराया जाता है। पिछले लंबे समय में शारदा डैम की स्थिति जर्जर हो गई है। अफसरों की मानें तो बजट की कमी चलते डैम में मरम्मत भी नहीं कराई जा सकी है। हालांकि सही बात यह है कि जो बजट पूर्व में मिला भी, उससे काम न के बराबर कराया गया बल्कि पूरे बजट का खर्च इधर-उधर दर्शाकर उसे ठिकाने ज्यादा लगाया गया। नतीजतन डैम के अंदर और बाहर का भाग बदहाल होता जा रहा है। वहीं अंदर भाग में सिल्ट भी पटती जा रही है, इसके चलते अतिरिक्त भार बांध पर पड़ रहा है। इसके चलते डैम के बाहर ड्रेन के क्षेत्र में सीपेज के साथ लीकेज की समस्या भी बनने का खतरा रहता है। इधर नतीजतन क्रैक पाइप से पानी रिसकर बांध की नींव तक पहुंचता है। इन दिनों डैम में पानी का लेवल 620 फुट से ऊपर हो चुका है, जबकि लगभग 622 फुट तक इसे भरे जाने की योजना है। स्थिति यह है कि दसवें किलोमीटर से लेकर 15 किमी से आगे तक डैम की मुख्य बॉडी और लॉन्ग ड्रेन के मध्य क्रैक पाइप से फिल्टर पानी निकल कर फैल रहा है। मुख्य बॉडी से ड्रेन क्षेत्र तक मिट्टी दलदली हो रही है, लेकिन अभियंता कोई खास ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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इस संबंध में सिंचाई विभाग की ओर से जानकारी नहीं दी गई है। शारदा सागर खंड के अफसरों को लिखकर भेजा जाएगा। -हरिओम शर्मा, एसडीएम कलीनगर
शारदा डैम के 10 से 12 किलोमीटर के बीच की यह समस्या काफी पुरानी है। पहले इसकी मरम्मत भी कराई गई है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए डैम सेफ्टी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही उसे ठीक कराया जाएगा। -हरिश्चंद्र यादव, एक्सईएन, शारदा सागर खंड
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