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चार दिन की खामोशी के बाद फिर चिंघाड़े हाथी, मचाया उत्पात
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माधोटांडा (पीलीभीत)। शारदा नदी के पार नेपाल की ओर से आए छह हाथियों ने चार दिन बाद शनिवार रात फिर उत्पात शुरू कर दिया। जंगल से बाहर निकले हाथियों ने ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव के नजदीक पहुंचकर धान की फसलों को उजाड़ने के अलावा गिरिजेश की पहले से टूटी झोंपड़ी को दोबारा तहस-नहस कर दिया। हाथियों का उत्पात देख गांव वाले इकट्ठा हो गए और ट्रैक्टरों की मदद से हाथियों को खदेड़ा। रात 11 बजे खेतों में पहुंचे हाथी सुबह पांच बजे तक खेतों में फसल उजाड़ते रहे। बाद में जंगल की ओर वापस हुए।
लग्गा भग्गा के जंगल में शरण लिए हाथी रात होते ही ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव के निकट पहुंचकर ग्रामीणों की धान और गन्ने की फसल को उजाड़ रहे हैं। छह हाथी एकड़ फसल को पैरों से रौंद चुके हैं। चार दिन पूर्व हाथियों का झुंड नेपाल की शुक्लाफांटा सेंक्चुरी की ओर निकल गया था। तब ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। मगर, शनिवार रात एक बार फिर हाथी लग्गा भग्गा के जंगल में पहुंच गए और रात 10 बजे ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव के निकट पहुंचकर उत्पात मचाने लगे। धान की फसलों को रौंदने के अलावा हाथी गांव निवासी गिरिजेश की पूर्व में उजाड़ी झोंपड़ी के नजदीक पहुंच गए और पहले से तहस-नहस झोंपड़ी को पुन: उजाड़ दिया। चार दिन तक रुके उत्पात के चलते अधिकांश ग्रामीण बिना चिंता किए सो रहे थे। हाथियों के आने की खबर लगते ही ग्रामीणों ने शोरशराबा किया। इसपर ग्रामीण एकत्र हो गए। ट्रैक्टर की आवाज से हाथियों को खदेड़ने का प्रयास किया , लेकिन सफल नहीं हो सके। हाथी रात भर उत्पात मचाने के बाद सुबह पांच बजे के बाद लग्गा भग्गा जंगल की ओर वापस लौट गए। गांव के राधे, समीर, फिरुआ राना ने बताया कि चार दिन पहले हाथी नेपाल की ओर चले गए थे। लेकिन रात में दोबारा आ गए और नुकसान करना शुरू कर दिया।
चार दिन पूर्व से हाथी नेपाल की ओर चले गए थे। शनिवार रात दोबारा वापस आ जाने की सूचना मिली है। क्षेत्रीय वनकर्मियों को गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। डीके गोयल, वन रेंजर
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लग्गा भग्गा के जंगल में शरण लिए हाथी रात होते ही ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव के निकट पहुंचकर ग्रामीणों की धान और गन्ने की फसल को उजाड़ रहे हैं। छह हाथी एकड़ फसल को पैरों से रौंद चुके हैं। चार दिन पूर्व हाथियों का झुंड नेपाल की शुक्लाफांटा सेंक्चुरी की ओर निकल गया था। तब ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। मगर, शनिवार रात एक बार फिर हाथी लग्गा भग्गा के जंगल में पहुंच गए और रात 10 बजे ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव के निकट पहुंचकर उत्पात मचाने लगे। धान की फसलों को रौंदने के अलावा हाथी गांव निवासी गिरिजेश की पूर्व में उजाड़ी झोंपड़ी के नजदीक पहुंच गए और पहले से तहस-नहस झोंपड़ी को पुन: उजाड़ दिया। चार दिन तक रुके उत्पात के चलते अधिकांश ग्रामीण बिना चिंता किए सो रहे थे। हाथियों के आने की खबर लगते ही ग्रामीणों ने शोरशराबा किया। इसपर ग्रामीण एकत्र हो गए। ट्रैक्टर की आवाज से हाथियों को खदेड़ने का प्रयास किया , लेकिन सफल नहीं हो सके। हाथी रात भर उत्पात मचाने के बाद सुबह पांच बजे के बाद लग्गा भग्गा जंगल की ओर वापस लौट गए। गांव के राधे, समीर, फिरुआ राना ने बताया कि चार दिन पहले हाथी नेपाल की ओर चले गए थे। लेकिन रात में दोबारा आ गए और नुकसान करना शुरू कर दिया।
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चार दिन पूर्व से हाथी नेपाल की ओर चले गए थे। शनिवार रात दोबारा वापस आ जाने की सूचना मिली है। क्षेत्रीय वनकर्मियों को गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। डीके गोयल, वन रेंजर
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