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Pilibhit News: मानसून में जंगलों की सुरक्षा के लिए ऑपरेशन मानसून शुरू
Thu, 02 Jul 2026 11:51 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Thu, 02 Jul 2026 11:51 PM IST
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पीलीभीत। मानसून के दौरान वन क्षेत्रों में जलभराव, घनी घास और कच्चे मार्गों के कारण गश्त प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए पीटीआर प्रशासन ने ‘ऑपरेशन मानसून शुरू किया है। 15 जून से 15 अक्तूबर तक चलने वाले इस विशेष सुरक्षा अभियान के तहत संवेदनशील वन क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी, नियमित गश्त और सीमा क्षेत्रों पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी।
पीटीआर प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि अभियान का उद्देश्य मानसून के दौरान शिकारियों, वन अपराधियों और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखना है। प्रत्येक क्षेत्रीय वन अधिकारी को अपनी-अपनी रेंज में उपलब्ध वनकर्मियों की गश्ती टीम गठित करने और स्वयं भी नियमित गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक वन चौकी पर गश्त रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें समय और गतिविधियों का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में कम से कम छह सदस्यीय गश्ती दल तैनात रहेगा और आवश्यकतानुसार वाहनों का उपयोग किया जाएगा। सभी रेंजों के वायरलेस सेट 24 घंटे सक्रिय रहेंगे और नियंत्रण कक्ष लगातार संपर्क बनाए रखेगा। बीट वन रक्षक समय-समय पर पैदल गश्त करेंगे और गश्त का मार्ग प्रतिदिन बदला जाएगा। उत्तराखंड सीमा से लगे वन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मानसून से पहले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और क्षतिग्रस्त मार्गों की पहचान कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। अभियान के दौरान बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति कोई भी रेंज अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारी मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि मानसून में वन सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
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पीटीआर प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि अभियान का उद्देश्य मानसून के दौरान शिकारियों, वन अपराधियों और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखना है। प्रत्येक क्षेत्रीय वन अधिकारी को अपनी-अपनी रेंज में उपलब्ध वनकर्मियों की गश्ती टीम गठित करने और स्वयं भी नियमित गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक वन चौकी पर गश्त रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें समय और गतिविधियों का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में कम से कम छह सदस्यीय गश्ती दल तैनात रहेगा और आवश्यकतानुसार वाहनों का उपयोग किया जाएगा। सभी रेंजों के वायरलेस सेट 24 घंटे सक्रिय रहेंगे और नियंत्रण कक्ष लगातार संपर्क बनाए रखेगा। बीट वन रक्षक समय-समय पर पैदल गश्त करेंगे और गश्त का मार्ग प्रतिदिन बदला जाएगा। उत्तराखंड सीमा से लगे वन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मानसून से पहले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और क्षतिग्रस्त मार्गों की पहचान कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। अभियान के दौरान बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति कोई भी रेंज अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारी मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि मानसून में वन सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
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