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Pilibhit News: जनता दर्शन के लिए सुबह नौ से 11 तक कार्यालय में बैठें अधिकारी
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पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से जनसुनवाई प्रकरणों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए सभी अधिकारियों को सुबह नौ से 11 बजे तक जनता दर्शन के लिए अपने कार्यालय में बैठने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आइजीआरएस पोर्टल पर निस्तारण की प्रति शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बाद ही अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।
बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने जनसुनवाई प्रणाली की समीक्षा करते हुए लापरवाही मिलने पर नाराजगी जताई है। बड़ी संख्या में शिकायतकर्ता मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंच रहे हैं, इसका साफ कारण है कि स्थानीय स्तर पर जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।
शासनादेश में कहा गया है कि सभी समस्याओं का निस्तारण मिशन मोड पर किया जाए। साथ ही भूमि विवाद और पैमाइश के प्रकरणों को तहसील अथवा थाना समाधान दिवस में दर्ज कर राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम गठित शीघ्र निस्तारण किया जाए। इसके बाद ही निस्तारण की प्रति आइजीआरएस पर अपलोड की जाए।
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अगर शिकायतकर्ता निस्तारण से संतुष्ट नहीं है तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता से बात कर स्थलीय निरीक्षण किया जाए। साथ ही उनके बयान सहित निस्तारण की प्रति अपलोड की जाए। शासनादेश में कहा गया है कि ऐसा सामने आ रहा है कि अधिकारियों की ओर से निस्तारण की खानापूर्ति के लिए पुरानी प्रति ही अपलोड की जा रही है।
हर सप्ताह वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी समीक्षा
शासनादेश में कहा गया है कि अब जनसुनवाई संदर्भों में निस्तारण की गुणवत्ता और शिकायतकर्ताओं की ओर से दिए गए असंतुष्ट फीडबैक के आधार पर हर सप्ताह के मंगलवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से मंडलों और जिलों की समीक्षा की जाएगी।
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बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने जनसुनवाई प्रणाली की समीक्षा करते हुए लापरवाही मिलने पर नाराजगी जताई है। बड़ी संख्या में शिकायतकर्ता मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंच रहे हैं, इसका साफ कारण है कि स्थानीय स्तर पर जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।
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शासनादेश में कहा गया है कि सभी समस्याओं का निस्तारण मिशन मोड पर किया जाए। साथ ही भूमि विवाद और पैमाइश के प्रकरणों को तहसील अथवा थाना समाधान दिवस में दर्ज कर राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम गठित शीघ्र निस्तारण किया जाए। इसके बाद ही निस्तारण की प्रति आइजीआरएस पर अपलोड की जाए।
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अगर शिकायतकर्ता निस्तारण से संतुष्ट नहीं है तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता से बात कर स्थलीय निरीक्षण किया जाए। साथ ही उनके बयान सहित निस्तारण की प्रति अपलोड की जाए। शासनादेश में कहा गया है कि ऐसा सामने आ रहा है कि अधिकारियों की ओर से निस्तारण की खानापूर्ति के लिए पुरानी प्रति ही अपलोड की जा रही है।
हर सप्ताह वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी समीक्षा
शासनादेश में कहा गया है कि अब जनसुनवाई संदर्भों में निस्तारण की गुणवत्ता और शिकायतकर्ताओं की ओर से दिए गए असंतुष्ट फीडबैक के आधार पर हर सप्ताह के मंगलवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से मंडलों और जिलों की समीक्षा की जाएगी।