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Pilibhit News: जंगल मार्गों में रात्रि रोक पर प्रभावी अमल न होने से एनटीसीए नाराज
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पीलीभीत। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गुजरने वाले मार्गों पर रात्रि रोक पर प्रभावी अमल न होने से एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) ने नाराजगी जताई है। इस संबंध में प्रमुख सचिव को लिखे गए पत्र के बाद पीटीआर प्रशासन भी हरकत में आया है। डीएफओ की ओर से डीएम को पत्र लिखा गया है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का जंगल 73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैला हुआ है। जंगल क्षेत्र से होकर अधिकांश मार्ग गुजरते हैं। इसमें माधोटांडा-पीलीभीत, पूरनपुर-खटीमा मार्ग प्रमुख शामिल हैं। मार्गों पर बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की चहलकदमी बनी रहती है। सुरक्षा के मद्देनजर, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनटीसीए की ओर से प्रदेश के समस्त टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले मार्गों पर रात्रि रोक संबंधित आदेश जारी किया गया था। वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर, यह आदेश जारी किया गया था। इसको लेकर जनवरी 2026 में भी पुन: आदेश जारी किए गए थे, लेकिन उसका प्रभावी अमल नहीं हो सका।
इसको लेकर एक बार फिर एनटीसीए के अतिरिक्त वन महानिदेशक (बाघ परियोजना) ने प्रमुख सचिव एसपी गोयल को पत्र भेजा। इसमें आदेश न मानने पर कोर्ट की अवमानना का जिक्र किया गया है। इसके बाद प्रमुख सचिव की ओर से इस आदेश पर प्रभावी अमल को लेकर एक बार फिर प्रयास तेज हो गए हैं। आदेश में कहा गया कि कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने और उसे निष्पादित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही दो सप्ताह के भीतर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि इस मामले में डीएम को पत्र लिखा जा रहा है और व्यक्तिगत रूप से भी मिलकर योजना बनाई जाएगी। संवाद
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पूर्व में आदेश जारी होना का किसान संगठनों ने किया था विरोध
तीन माह पूर्व पीटीआर प्रशासन की ओर से जिले के जंगल के बीच से गुजरने वाले मार्गों पर रात्रि रोक का आदेश जारी किया गया था, लेकिन किसान संगठनों समेत अन्य लोग विरोध में उतर आए थे। डीएम की अध्यक्षता में बैठक भी आयोजित की गई थी। इस चलते मार्गों पर रोक के आदेश पर अमल नहीं हो सका था।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का जंगल 73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैला हुआ है। जंगल क्षेत्र से होकर अधिकांश मार्ग गुजरते हैं। इसमें माधोटांडा-पीलीभीत, पूरनपुर-खटीमा मार्ग प्रमुख शामिल हैं। मार्गों पर बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की चहलकदमी बनी रहती है। सुरक्षा के मद्देनजर, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनटीसीए की ओर से प्रदेश के समस्त टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले मार्गों पर रात्रि रोक संबंधित आदेश जारी किया गया था। वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर, यह आदेश जारी किया गया था। इसको लेकर जनवरी 2026 में भी पुन: आदेश जारी किए गए थे, लेकिन उसका प्रभावी अमल नहीं हो सका।
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इसको लेकर एक बार फिर एनटीसीए के अतिरिक्त वन महानिदेशक (बाघ परियोजना) ने प्रमुख सचिव एसपी गोयल को पत्र भेजा। इसमें आदेश न मानने पर कोर्ट की अवमानना का जिक्र किया गया है। इसके बाद प्रमुख सचिव की ओर से इस आदेश पर प्रभावी अमल को लेकर एक बार फिर प्रयास तेज हो गए हैं। आदेश में कहा गया कि कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने और उसे निष्पादित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही दो सप्ताह के भीतर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि इस मामले में डीएम को पत्र लिखा जा रहा है और व्यक्तिगत रूप से भी मिलकर योजना बनाई जाएगी। संवाद
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पूर्व में आदेश जारी होना का किसान संगठनों ने किया था विरोध
तीन माह पूर्व पीटीआर प्रशासन की ओर से जिले के जंगल के बीच से गुजरने वाले मार्गों पर रात्रि रोक का आदेश जारी किया गया था, लेकिन किसान संगठनों समेत अन्य लोग विरोध में उतर आए थे। डीएम की अध्यक्षता में बैठक भी आयोजित की गई थी। इस चलते मार्गों पर रोक के आदेश पर अमल नहीं हो सका था।