Pilibhit News: बिजली कटने पर नहीं चलाया जनरेटर, सीएचसी में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बंद होने से नवजात की मौत
पीलीभीत के बरखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में लापरवाही के कारण एक नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि नवजात को ऑक्सीजन देते समय बिजली गुल हो गई और जनरेटर नहीं चलाया गया, जिससे उसकी जान चली गई।
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बरेली के बरखेड़ा सीएचसी में लापरवाही से एक नवजात की मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक एनबीएसयू में इलाज के दौरान बिजली जाने के बाद जनरेटर होने के बावजूद उसे न चलाने से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बंद हो गया और नवजात की जान चली गई। आक्रोशित परिजन ने करीब नौ घंटे तक नवजात का शव अस्पताल परिसर में ही रखा। सीएमओ से जांच का आश्वासन मिलने के बाद ही वे शव लेकर घर गए।
बरखेड़ा क्षेत्र के ज्योरहा कल्यानपुर निवासी सुनील कुमार की पत्नी गीता देवी को रविवार रात लगभग नौ बजे प्रसव के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया था। सुनील का आरोप है कि स्टाफ नर्स मधु भारती और निशा ने प्रसव के बाद गीता और नवजात शिशु की ठीक से देखभाल नहीं की। इससे दोनों की हालत बिगड़ गई।
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बाद में नवजात को अस्पताल के एनबीएसयू (नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई) में ले जाकर ऑक्सीजन देना शुरू किया गया। पांच मिनट बाद ही अस्पताल की बिजली गुल हो गई। परिजनों ने जनरेटर चलाने की गुहार लगाई, तो स्टाफ ने कह दिया कि जनरेटर की व्यवस्था नहीं है। कुछ ही देर बाद बिजली के अभाव में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बंद होने के कारण ऑक्सीजन की कमी के चलते नवजात ने दम तोड़ दिया। सुनील कुमार ने यह भी आरोप लगाए कि भर्ती के दौरान स्टाफ ने उनसे सफाई कार्य भी कराया।
चालू हालत में है जनरेटर
सीएचसी में जनरेटर उपलब्ध और चालू हालत में है। जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जाता है। किन स्थिति में और कहां से चूक हुई, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।- डॉ. लोकेश गंगवार, सीएचसी प्रभारी
सीएमओ ने दो सदस्यीय जांच टीम की गठित
सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉ. ज्ञान के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम गठित की गई। टीम मंगलवार को सीएचसी जाकर जांच करेगी। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सुर्खियों में रहा है बरखेड़ा सीएचसी
बरखेड़ा सीएचसी में स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी और इलाज में हीलाहवाली का यह पहला मामला नहीं है। मरीजों को बाहर की दवा पर्ची, कड़ाके की सर्दी में गर्भवती को करीब आठ घंटे तक फर्श पर लिटाना, मेडिकल स्टोर पर सरकारी दवा मिलने आदि के मामलों ने भी बेहतर इलाज के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।
ऑक्सीजन लगाते ही बिजली गुल हो जाने और जनरेटर न चलाने से नवजात की मौत के आरोप ने बरखेड़ा सीएचसी की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। परिजनों के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों ने नवजात के इलाज में तो लापरवाही की ही। रेफर करने में भी मनमानी दिखाई। परिजनों से ही सफाई और अन्य काम कराए गए। नवजात की मौत से भड़के परिजन करीब नौ घंटे तक उसका शव सीएचसी में ही रखे रहे। अस्पताल में अफरातफरी का माहौल रहा।
15 जनवरी को बरखेड़ा के गांव मोहम्मद गंज अमखिड़िया निवासी सोनू अपनी पत्नी सोनी को प्रसव पीड़ा होने पर रात करीब 11 बजे सीएचसी लेकर पहुंचे थे। स्टाफ ने गर्भवती को वार्ड में भर्ती नहीं किया। मजबूरी में गर्भवती रात से सुबह करीब 10 बजे तक गैलरी में फर्श पर ही लेटी रही। सुबह सीएचसी अधीक्षक अस्पताल पहुंचे। परिजनों की शिकायत पर गर्भवती को वार्ड में भर्ती कराया गया। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से दोषी कर्मियों पर कार्रवाई भी की गई थी।
झोलाछाप क्लीनिक पर मिली थी सरकारी दवा
वर्ष 2025 में सीएचसी के समीप संचालित एक झोलाछाप के क्लीनिक पर अस्पताल की सरकारी दवा मिली थी। यह दवा नारकोटिक्स से संबंधित थी। मामले में सीएमओ ने अस्पताल के फार्मासिस्ट को निलंबित किया था। एमओआईसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। यह मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था। अस्पताल में मरीजों को बाहर की दवा पर्ची थमाने का मामला भी कई बार सामने आ चुका है।