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पीटीआर में पर्यटन और विकास के लिए बनेंगी नई योजनाएं

Tue, 19 Apr 2022 12:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 19 Apr 2022 12:43 AM IST
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New schemes will be made for tourism and development in PTR
पर्यटन स्थल चूका बीच का खूबसूरत नजारा। - फोटो : PILIBHIT
कलीनगर। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की मौजूदगी दूरदराज तक पीलीभीत का नाम रोशन कर रही है। यहां पर्यटन की नई संभावनाएं विकसित की जाएंगी। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. अरुण कुमार से गन्ना एवं चीनी मिल राज्यमंत्री संजय गंगवार ने भेंट की है। उन्होंने बताया कि चूका और पीटीआर के लिए जरूरत के हिसाब से नई योजनाएं भी बनाई जाएंगी।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद जनपद वासियों और वन्यजीव प्रेमियों को यह उम्मीद जागी थी कि अन्य नेशनल पार्कों की तरह यहां भी संसाधन बढ़ेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पिछले कार्यकाल में सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के भ्रमण किया। चूका बीच का खूबसूरत नजारा देखकर वह काफी खुश हुए और अधिकारियों को इसे और विकसित करने के निर्देश दिए थे।
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इसके बाद अफसरों ने तेजी भी दिखाई लेकिन कोई बड़ा बदलाव सामने नहीं आया। अब राज्यमंत्री संजय गंगवार ने इसकी पैरवी शुरू की है। उनका कहना है कि नई योजनाएं बनाने तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री के दौरे को लेकर चर्चा हुई है। अभी वन मंत्री ने आने की तिथि तय नहीं की है लेकिन निकट भविष्य में उनका दौरा होगा।
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इन योजनाओं पर है काम जरूरी
टाइगर सफारी और गैंडा परियोजना काम जरूरी : सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद अफसरों ने भी टाइगर सफारी को विकसित करने की योजना बनाकर स्थान चिन्हित करने के लिए सर्वे किया था। अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान भी चलाए गए लेकिन नतीजा शून्य दिखाई दिया। इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में गैंडा परियोजना के लिए सर्वे शुरू किया गया था। गैंडों के मामले में पीलीभीत के जंगलों का वातावरण अनुकूल है लेकिन इसमें कोई काम आगे नहीं हुआ।
टाइगर रेस्क्यू सेंटर खोलने की है जरूरत
टाइगर रिजर्व में बढ़ रही बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। पिछले वर्षों में बीमारी से बाघों की मौत होने की घटनाएं बढ़ी तो अफसर गंभीर हुए थे। इसके बाद टाइगर रिजर्व में एक टाइगर रेस्क्यू सेंटर बनाने की योजना पर अमल किया गया लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। वर्तमान में मात्र बाघ को ट्रैंकुलाइज करने की ही व्यवस्था है।

चूका बीच में भी कुछ नया नहीं हो सका
चूका बीच को विकसित करने के लिए मुंबई और दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम ने चूका पहुंचकर जायजा लिया था लेकिन सब काम ठंडे बस्ते में हैं। सैलानियों की व्यवस्था के लिए मात्र पांच टाटा जीनान समेत 17 जिप्सी लगाई गईं हैं। इसके अलावा एक माह पूर्व से मोटर बोट का संचालन शुरू किया गया है। चूका बीच में नई हट बनाए जाने की जरूरत है। छुट्टी के दिनों में टाटा जीनान और जिप्सी की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।
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