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नेपाल न लौटाए गए हाथी तो 15 साल पहले हुई घटना फिर होने का डर

Fri, 04 Sep 2020 01:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2020 01:44 AM IST
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Nepali elephant terror
पीलीभीत/माधोटांडा। नेपाली हाथियों का भारतीय इलाके में उत्पात बढ़ता जा रहा है। हाथियों का झुंड सीमावर्ती गांवों में घुसकर किसानों की झोंपड़ियों और कृषि फसलों का निशाना बना रहा है। वन विभाग ने नेपाली हाथियों को खदेड़ने की पहल नहीं की। इस वजह से किसान हताश हैं। उनका कहना है कि यदि हाथियों पर अंकुश नहीं लगा तो 15 साल पहले वाली उस घटना की पुनरावृत्ति दोहराई जा सकती है, जब हाथियों ने गुन्हान में तीन किसानों को पटक-पटककर मार डाला था।
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नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से 15 दिन पहले हाथियों का झुंड टाइगर रिजर्व के जंगल क्षेत्र में आ पहुंचा था। अब तक यह हाथियों का झुंड ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, थारू बस्ती, रमनगरा और गुन्हान क्षेत्र में किसानों की दस से अधिक झोपड़ियों को अपना निशाना बना चुका है। इसके अलावा नेपाली हाथियों ने कई एकड़ धान की फसल को भी रौंद डाला है। हाथियों के उत्पात मचाने का सिलसिला बुधवार रात भी रमनगरा और गुन्हान में जारी रहा। दोनों गांवों के किसानों की खेतों में धान की फसल को हाथियों ने रौंद डाला। शोर-शराबा करके किसानों ने बमुश्किल हाथियों को भगाया। किसानों को अपनी रातें खेतों में जागकर गुजारनी पड़ रही हैं। वन विभाग द्वारा हाथियों से निजात दिलाने में कोई सहयोग न मिलने से किसानों में आक्रोश दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
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15 साल पहले तीन किसानों की हो चुकी मौत
नेपाली हाथियों का आतंक मानव-वन्यजीव संघर्ष में तबदील होने का भी खतरा है। 15 साल पहले गुन्हान क्षेत्र में एक बड़ी घटना हुई थी। बताते हैं कि उन दिनों भी नेपाली हाथियों का इसी तरह से आतंक था। लगातार फसलें उजड़ती देख किसान आक्रोशित हो उठे थे। कुछ ग्रामीणों ने आतंक मचाने वाले हाथियों की पूंछ में लुकाई (आग से जलता डंडा) बांधने की कोशिश की थी। इस हरकत से गुस्साए हाथियों ने गुन्हान के रंजन, मंगल और सुखलाल को अपनी सूंड़ से पटक-पटककर मार डाला था। घटना के बाद किसानों की पूरी फौज हाथियों के पीछे पड़ गई थी। हाथियों को वहां से भागना पड़ा। फिर कई साल तक हाथी भारतीय क्षेत्र में नहीं लौटे।
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पिछले साल रामपुर तक पहुंच गए थे उत्पाती हाथी
खेतों में धान की फसल पकने लगी है। ऐसे में यदि टाइगर रिजर्व इस मामले में गंभीर नहीं हुआ तो नेपाली हाथियों का झुंड एक बार फिर शारदा नदी के रास्ते भारतीय क्षेत्र में आ सकता है। पिछले साल भी हाथियों का एक झुंड बहेड़ी, बरेली होते हुए रामपुर की सीमा तक पहुंच गया था। नेपाली हाथियों ने दो लोगों की जान भी ले ली थी। स्थिति कब्जे से बाहर होती देख वन विभाग ने कर्नाटक से टीम बुलाकर हाथियों को शारदा नदी तक खदेड़ा था। यदि समय रहते टाइगर रिजर्व प्रशासन नहीं चेता तो इस बार भी स्थिति बिगड़ने की आशंका है।
थारू बस्ती क्षेत्र में जंगली हाथी लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। यदि हाथियों को नहीं खदेड़ा गया तो मजबूरन किसानों को अपनी बची खुची धान की अधपकी फसल ही काटनी पड़ेगी। -राधे राना, ढकिया तालुके महाराजपुर
धान की फदल को हाथियों से बचाने के लिए सारी रात जागना पड़ता है। तमाम प्रयास करने के बाद भी हम लोग हाथियों से धान की फसल को नहीं बचा पा रहे हैं। वन विभाग को हाथियों से निजात दिलानी चाहिए। - अमरजीत सिंह, रमनगरा
नेपाली हाथी हर साल यहां आकर फसलों को तबाह करते हैं।- टाइगर रिजर्व को इनसे निपटने की पहले से ही तैयारी करनी चाहिए थी। अब नेपाली हाथियों को खदेड़ा जाना ही एक मात्र रास्ता बचा है। -प्रशांत साना, प्रधान, रमनगरा

नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से आने वाले वाले हाथियों की लगातार निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों के सहयोग से पटाखे दागकर हाथियों को भगाने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दे दी गई है। - डीके गोयल, वन क्षेत्राधिकारी, बराही रेंज
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