इंडो-नेपाल बार्डर पर नया पिलर बनकर तैयार, ..प्रशासन अब भी अंजान
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इंडो-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नेपाल सरकार द्वारा पिलर नंबर 27 और 28 के बीच नए पिलर लगाने का मामला सुर्खियों में आने के बाद हरकत में आई एसएसबी और रमनगरा चौकी पुलिस ने काम रुकवा दिया। हालांकि दोपहर बाद स्थिति स्पष्ट होने पर पिलर बनाना शुरू कर दिया गया। एसएसबी की ओर से सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल की संयुक्त टीम द्वारा पिलर लगाकर सीमा दुरुस्त कराने की बात कही गई है। हालांकि स्थानीय प्रशासन अब भी इन सारी बातों से अंजान है।
इंडो-नेपाल की खुली सीमा पर सीमा पिलर 27, 28 और 29 के नजदीक कुछ दिन पूर्व नए पिलर लगाने का काम शुरू किया गया था। जिस जगह पर पिलर का निर्माण किया जा रहा था, वहां वर्षों से किसान भारतीय क्षेत्र बताकर खेती करते आ रहे हैं। यह लगभग 350 एकड़ जमीन है। किसानों के बीच इस जमीन को नेपाल के कब्जे में जाने की चर्चा फैलने लगी। उसके बाद स्थानीय नागरिकों में हड़कंप मच गया।
इस बारे में बुधवार को जिला प्रशासन से जानकारी की गई तो अफसरों ने अनभिज्ञता जाहिर की और एसएसबी से जानकारी लेने की बात कही। एक स्थानीय जनप्रतिनिधि के नेतृत्व में ग्रामीणों ने नेपाल सरकार द्वारा भारतीय सीमा में पिलर लगाने की लिखित सूचना एसडीएम कलीनगर हरिओम शर्मा को दी। इसमें कहा गया कि नेपाल की ओर से भारतीय सीमा पर कुछ पिलर बनाए जा रहे है। वहां अपने देश का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं है।
अमर उजाला में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित होने के बाद पूरा प्रकरण सुर्खियां में आया तो सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हुईं। बृहस्पतिवार को एसएसबी नगरिया कट के इंस्पेक्टर संतराम भारद्वाज और रमनगरा चौकी इंचार्ज की टीम इंडो-नेपाल सीमा पर मौके पर पहुंची और काम रुकवा दिया। वहां नेपाल पुलिस से बात की। इससे स्थिति स्पष्ट हुई दोनों देशों की सहमति से यह काम किया जा रहा है।
संबंधित अधिकारियों से इसकी पुष्टि की गई। इसके बाद टीम ने मशीन के माध्यम से सीमा की माप की, तभी पिलर का निर्माण शुरू किया गया। एसएसबी इंस्पेक्टर ने बताया कि सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल की इस काम के लिए सहमति है। एपीएफ नेपाल की टीम और एसएसबी टीम लगातार देखरेख करेंगी। फिलहाल जिस पिलर का निर्माण किया गया, वह कुछ समय पहले क्षतिग्रस्त हो गया था। इसमें कहीं भी भारतीय सीमा के अंदर जमीन पर कब्जा या अतिक्रमण नहीं किया गया है। पिलर निर्माण एरिया में आने वाली जमीन की हकीकत जानने के लिए एसडीएम कलीनगर ने तहसीलदार को जांच सौंपी है। अभी राजस्व टीम की ओर जांच शुरू नहीं की गई हैं। उधर, मनगरा ग्राम पंचायत के प्रधान समेत अन्य सदस्यों की ओर एसडीएम को लिखित पत्र दिया गया।
सीमा से सटे इलाके में भारतीय नागरिकों की ओर से बताया गया कि नेपाल सरकार पिलर स्थापित कर रही है। इसमें भारतीय कब्जे वाली भूमि नेपाल में जाने की बात बताई गई। एसडीएम को लिखित जानकारी दी गई है। -प्रशांत साना, ग्राम प्रधान, रमनगरा
सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल की संयुक्त टीम पिलर को दुरुस्त करने का कार्य कर रही है। जानकारी मिलने के बाद दोनों देशों की फोर्स भी इसकी देखरेख कर रही है। -संतराम भारद्वाज, इंस्पेक्टर, एसएसबी, नगरिया कट
डीएम चंपावत बोले- दोनों देशों की सहमति से हो रहा पिलर निर्माण
भारत-नेपाल सीमा की देखरेख के नोडल अधिकारी के रूप में नामित चंपावत (उत्तराखंड) के डीएम एसएम पांडेय ने बताया कि इंडो-नेपाल बार्डर पर पिलर नंबर 27 और 28 के बीच नए पिलर लगाने का काम दोनों देशों की सहमति से हो रहा है। इस संबंध में 17 दिसंबर 2019 को दोनों देशों की सर्वे एजेंसियों की संयुक्त बैठक हुई थी। इसमें बात उठी थी कि अभी लगे पिलर के बीच में दूरी काफी है, दो-दो, तीन-तीन किलोमीटर पर ये पिलर लगे हैं। इस कारण इन पिलर के बीच में सीमा स्पष्ट नहीं हो पाती। इस पर सहमति बनी थी कि विषम संख्या वाले पिलर नंबर जैसे 1,3, 5 के बीच में नेपाल सरकार और सम संख्या वाले पिलर नंबर जैसे 2, 4, 6 के बीच में भारत सरकार और पिलर लगाएगी, ताकि सीमा स्पष्ट हो जाए। नेपाल की जो जमीन भारतीय सीमा में है या भारत की जो जमीन नेपाल सीमा में है, उसका चिह्नांकन हो सकेगा। डीएम पांडेय ने कहा कि दोनों देशों में किसी तरह का सीमा विवाद नहीं है।