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शारदीय नवरात्र: आज ही होगा अष्टमी-नवमी का पूजन
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नवरात्र पर्व के चलते शुक्रवार को बाजार में पूजन सामग्री खरीदते लोग।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। शारदीय नवरात्र में तिथियों को लेकर देवी भक्तों में संशय की स्थिति है। दरअसल अष्टमी और नवमी को लेकर देवी भक्त उलझन में हैं। नवरात्र के दोनों दिनों में दुर्गा पूजा का खास महत्व होता है।
परमठ मंदिर के पंडित अंबरीश शर्मा के मुताबिक इस बार नवरात्र में अष्टमी और नवमी की तिथियों को लेकर संशय की स्थिति है। इसकी वजह यह है कि 23 अक्तूबर का सप्तमी प्रात: 7.40 बजे तक है। इसके बाद अष्टमी प्रारंभ हो जाएगी। यह 24 अक्तूबर दोपहर तक रहेगी। इसके पश्चात इसी दिन नवमी तिथि लग जाएगी। उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्र पर अष्टमी और नवमी का व्रत पूजन 24 अक्तूबर को ही किया जाएगा। नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि का खास महत्व है। अष्टमी को देवी के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा होती है, जबकि नवमी को समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री का पूजन होता है।
अष्टमी को ऐसे करें पूजन
नवरात्र के समापन पर कन्या भोज की परंपरा है। हवन पूजन के बाद व्रतियों को कन्याभोज कराना चाहिए। भोज कराने के बाद उन्हें उपहार देकर विदा करना चाहिए। कन्या पूजन के बाद भक्त देवी भगवती का अपने परिवार के साथ ध्यान करें। मां भगवती से सुख समृद्धि की कामना करें।
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देवी भक्तों ने मां कालरात्रि का किया पूजन
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शुक्रवार को देवी भक्तों ने मां कालरात्रि का पूजन किया। मां यशवंतरी देवी मंदिर, महामातेश्वरी मंदिर, मां दुर्गा मंदिर समेत अन्य देवी मंदिरों में पहुंचकर भक्तों ने पूजा अर्चना की। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मंदिरों में मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप की आराधना की गई।
पूजन सामग्री खरीदने को बाजार में उमड़ी भीड़
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक शनिवार को अष्टमी और नवमी दोनों मनाई जाएंगी। नवमी को देवी भक्त हवन पूजन के साथ कन्याभोज कराते हैं। इसके चलते एक दिन पूर्व यानी शुक्रवार को बाजार में पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ रही। भक्तों ने माता की चुनरी और पूजन सामग्री से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी की। वहीं कुछ देवी भक्तों कन्याओं को उपहार में देने के लिए बर्तनों की भी खरीदारी की। शुक्रवार शाम स्टेशन रोड, कटरा बाजार, जेपी रोड पर रौनक रही।
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परमठ मंदिर के पंडित अंबरीश शर्मा के मुताबिक इस बार नवरात्र में अष्टमी और नवमी की तिथियों को लेकर संशय की स्थिति है। इसकी वजह यह है कि 23 अक्तूबर का सप्तमी प्रात: 7.40 बजे तक है। इसके बाद अष्टमी प्रारंभ हो जाएगी। यह 24 अक्तूबर दोपहर तक रहेगी। इसके पश्चात इसी दिन नवमी तिथि लग जाएगी। उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्र पर अष्टमी और नवमी का व्रत पूजन 24 अक्तूबर को ही किया जाएगा। नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि का खास महत्व है। अष्टमी को देवी के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा होती है, जबकि नवमी को समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री का पूजन होता है।
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अष्टमी को ऐसे करें पूजन
नवरात्र के समापन पर कन्या भोज की परंपरा है। हवन पूजन के बाद व्रतियों को कन्याभोज कराना चाहिए। भोज कराने के बाद उन्हें उपहार देकर विदा करना चाहिए। कन्या पूजन के बाद भक्त देवी भगवती का अपने परिवार के साथ ध्यान करें। मां भगवती से सुख समृद्धि की कामना करें।
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देवी भक्तों ने मां कालरात्रि का किया पूजन
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शुक्रवार को देवी भक्तों ने मां कालरात्रि का पूजन किया। मां यशवंतरी देवी मंदिर, महामातेश्वरी मंदिर, मां दुर्गा मंदिर समेत अन्य देवी मंदिरों में पहुंचकर भक्तों ने पूजा अर्चना की। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मंदिरों में मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप की आराधना की गई।
पूजन सामग्री खरीदने को बाजार में उमड़ी भीड़
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक शनिवार को अष्टमी और नवमी दोनों मनाई जाएंगी। नवमी को देवी भक्त हवन पूजन के साथ कन्याभोज कराते हैं। इसके चलते एक दिन पूर्व यानी शुक्रवार को बाजार में पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ रही। भक्तों ने माता की चुनरी और पूजन सामग्री से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी की। वहीं कुछ देवी भक्तों कन्याओं को उपहार में देने के लिए बर्तनों की भी खरीदारी की। शुक्रवार शाम स्टेशन रोड, कटरा बाजार, जेपी रोड पर रौनक रही।