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शहर की सड़कों को कूड़े से मिलेगी निजात
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पीलीभीत। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में कूड़ा निस्तारण को पहला मेटेरियल रिकवरी फेसेलिटी (एफआरएफ) सेंटर बनाया जाएगा। सेंटर में छोटे-छोटे स्टोर बनाकर हर प्रकार का कूड़ा अलग कर वेस्ट मैनेजमेंट किया जाएगा। अभी तक पालिका प्रशासन के पास वेस्ट मैनेजमेंट के साधन उपलब्ध नहीं थे। सेंटर शुरू होने के बाद शहर के कूूड़े का निस्तारण आसानी से किया जा सकेगा।
करीब ढाई लाख की आबादी वाले शहर में 27 वार्ड हैं। नगरपालिका के सफाईकर्मी रोजाना 49 मोहल्लों का कूड़ा उठाकर सड़कों के किनारे बने 20 से अधिक अस्थायी कचराघरों में डाल रहे हैं। पालिका के आंकड़ों के मुताबिक हर रोज इन अस्थायी कचराघरों से करीब 90 टन कूड़ा उठाकर देवहा नदी की तलहटी या फिर किसी हाईवे के किनारे डाला जा रहा है। समस्या यही पर खत्म नहीं होती। महज नाम के बने अस्थाई कचराघरों में डाला गया कूड़ा इतने बेतरतीब ढंग से डाला जाता है कि कुछ ही मिनटों में यह आधी-आधी सड़कों पर कब्जा कर लेता है। शहरवासियों को इसी कूड़े के ढेर से गुजरना पड़ रहा है।
नगरपालिका की ट्रॉलियों में गीला और सूखा कूड़ा ले जाने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। अलग-अलग डस्टबिन होने के बावजूद लोग गीला और सूखा कूड़ा एक साथ ही डाल रहे हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत कूड़े के निस्तारण को मेटेरियल रिकवरी फेसलिटी सेंटर बनाया जाएगा। शासन द्वारा करीब 33.50 लाख रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया गया है। एमआरएफ सेंटर बनने के बाद वेस्ट मैनेजमेंट में आसानी होगी। नगरपालिका प्रशासन के मुताबिक शहर के वार्डों से आने वाला कचरा अलग अलग किया जाएगा। इस सेंटर में सीएंडडी वेस्ट (मकानों से निकला मलबा), प्लास्टिक, कागज, बाटल, कांच, धातु आदि करीब 13 तरह का कचरा अलग-अलग किया जाएगा। जबकि गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी।
शहर में कूड़ा निस्तारण को मेटेरियल रिकवरी फेसलिटी सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए बजट भी आवंटित कर दिया गया है। शहर में एक स्थान पर जमींन भी चिन्ह्ति कर ली गई है। इसके संचालित होने के बाद अस्थायी कचराघरों को समाप्त कर दिया जाएगा।
- निशा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका परिषद
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करीब ढाई लाख की आबादी वाले शहर में 27 वार्ड हैं। नगरपालिका के सफाईकर्मी रोजाना 49 मोहल्लों का कूड़ा उठाकर सड़कों के किनारे बने 20 से अधिक अस्थायी कचराघरों में डाल रहे हैं। पालिका के आंकड़ों के मुताबिक हर रोज इन अस्थायी कचराघरों से करीब 90 टन कूड़ा उठाकर देवहा नदी की तलहटी या फिर किसी हाईवे के किनारे डाला जा रहा है। समस्या यही पर खत्म नहीं होती। महज नाम के बने अस्थाई कचराघरों में डाला गया कूड़ा इतने बेतरतीब ढंग से डाला जाता है कि कुछ ही मिनटों में यह आधी-आधी सड़कों पर कब्जा कर लेता है। शहरवासियों को इसी कूड़े के ढेर से गुजरना पड़ रहा है।
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नगरपालिका की ट्रॉलियों में गीला और सूखा कूड़ा ले जाने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। अलग-अलग डस्टबिन होने के बावजूद लोग गीला और सूखा कूड़ा एक साथ ही डाल रहे हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत कूड़े के निस्तारण को मेटेरियल रिकवरी फेसलिटी सेंटर बनाया जाएगा। शासन द्वारा करीब 33.50 लाख रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया गया है। एमआरएफ सेंटर बनने के बाद वेस्ट मैनेजमेंट में आसानी होगी। नगरपालिका प्रशासन के मुताबिक शहर के वार्डों से आने वाला कचरा अलग अलग किया जाएगा। इस सेंटर में सीएंडडी वेस्ट (मकानों से निकला मलबा), प्लास्टिक, कागज, बाटल, कांच, धातु आदि करीब 13 तरह का कचरा अलग-अलग किया जाएगा। जबकि गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी।
शहर में कूड़ा निस्तारण को मेटेरियल रिकवरी फेसलिटी सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए बजट भी आवंटित कर दिया गया है। शहर में एक स्थान पर जमींन भी चिन्ह्ति कर ली गई है। इसके संचालित होने के बाद अस्थायी कचराघरों को समाप्त कर दिया जाएगा।
- निशा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका परिषद