{"_id":"589b51c04f1c1b8a5237a6ed","slug":"most-of-the-ministers-of-the-district-election-expenses","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के दोनों मंत्रियों का चुनाव खर्च सबसे ज्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले के दोनों मंत्रियों का चुनाव खर्च सबसे ज्यादा
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Wed, 08 Feb 2017 10:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले की चारों विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों ने बुधवार को अपने चुनाव खर्च का ब्योरा व्यय प्रेक्षक के समक्ष दाखिल कर दिया। इस ब्योरे के मुताबिक चुनाव में अब तक सर्वाधिक खर्च करने जिले में सरकार के दोनों मंत्रियों ने किया है। पहले नंबर पर बरखेड़ा के सपा प्रत्याशी हेमराज वर्मा हैं जिन्होंने 11.87 लाख रुपये खर्च किए हैं। शहर के सपा प्रत्याशी हाजी रियाज 10.60 लाख खर्च दूसरे और भाजपा के संजय गंगवार 9.67 लाख रुपये खर्च कर इस सूची में तीसरे नंबर पर हैं। शहर से निर्दलीय प्रत्याशी राजरानी के नोटिस का जवाब न देने पर व्यय प्रेक्षक ने उनके खिलाफ एफआईआर कराने का आदेश दिया है। चुनाव खर्च की पहली जांच चार व पांच फरवरी हो गई थी लेकिन कई कमियां रह जाने की वजह से बुधवार को दोबारा जांच की गई। इसके मुताबिक बरखेड़ा में रालोद प्रत्याशी प्रवक्तानंद ने 9.22 लाख और बसपा के डॉ. शैलेंद्र गंगवार 6.54 लाख खर्च कर चुके हैं। शहर में बसपा के अरशद खां ने 7.22 लाख खर्च किए हैं। बीसलपुर में कांग्रेस प्रत्याशी अनीस अहमद खां फूलबाबू ने 7.62 लाख, बसपा की दिव्या गंगवार ने 5.41 लाख और भाजपा के रामसरन वर्मा ने 4.45 लाख रुपये का खर्च दिखाया। चुनाव खर्च में पूरनपुर क्षेत्र सबसे पीछे हैं जहां सपा प्रत्याशी पीतमराम ने 3.75 लाख और भाजपा के बाबूराम ने 3.17 लाख रुपये ही खर्च किए हैं। व्यय प्रेक्षक पलास भोयार ने बीसलपुर के निर्दलीय प्रत्याशी रामपाल मिश्रा को अब तक बैंक खाता न खोलने पर नोटिस जारी किया है। इधर शहर की निर्दलीय प्रत्याशी राजरानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश आरओ को दिया गया है। राजरानी चार-पांच फरवरी को जांच कराने नहीं पहुंची थीं। उन्हें नोटिस दिया गया मगर वह दूसरे दिन भी नहीं आईं। बुधवार को वह जांच कराने पहुंची लेकिन नोटिस का जवाब फिर भी नहीं दिया।
विज्ञापन