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प्रवासियों के आने की संख्या घटी तो कोरोना संक्रमितों में भी आने लगी कमी
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पीलीभीत। महीने भर पहले जब महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, गुजरात से आने वाले प्रवासियों की संख्या अचानक बढ़ी थी तो कोरोना संक्रमितों का सिलसिला भी अचानक बढ़ गया था। रोजाना चार से छह कोरोना संक्रमित केस मिल रहे थे। मगर, अब प्रवासी मजदूरों के आने में कमी आई है तो कोरोना संक्रमण के केस भी कम होने लगे हैं। पांच दिन पहले शहर के प्रवासी एक हेयर ड्रेसर की मां संक्रमित मिली थी, उसके बाद अब कांशीराम कॉलोनी में ही केस मिला है।
जनपद से बड़ी संख्या में लोग परिवार समेत दूसरे प्रांतों में जाकर लंबे समय से बसे हुए थे। ये लोग वहीं पर फैक्ट्ररी या दुकानों पर काम करके परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। कुछ लोगों ने तो बाहर अपना व्यवसाय भी फैला लिया था। पूरनपुर इलाके के तो काफी लोग विदेशों में रहते हैं। कोरोना संक्रमण के समय लॉकडाउन में दूसरे प्रांतों में जब रोजी-रोटी का संकट बढ़ा तो प्रवासियों ने घर वापसी कर ली। लॉकडाउन के तीसरे और चौथे चरण में दूसरे प्रांतों से 20 हजार से अधिक प्रवासी घर वापस आ गए। इसका असर यह रहा कि उस समय कोरोना संक्रमण केसों की संख्या में भी उछाल आया। एक समय तो चार कोरोना संक्रमितों के ठीक होने के बाद जनपद कोरोना मुक्त हो गया था। मगर, प्रवासियों के आने से जनपद में कोरोना पॉजिटिव केसों की संख्या 46 तक पहुंच गई। इनमें अधिकांश मुंबई, दिल्ली से आए प्रवासी ही संक्रमित निकल रहे थे। बड़ी संख्या में कोरोना केस बढने से एक बार तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भी धड़कनें तेज हो गईं। मगर, अब बीते दिनों की अपेक्षा प्रवासियों की आवाजाही में 80 फीसदी तक की कमी आई है। इसी के साथ संक्रमण में आया उछाल भी थमने लगा है। अब पुराने कोरोना संक्रमित मरीज भी इलाज के बाद ठीक होकर घर पहुंच रहे हैं। 46 पॉजिटिव मरीजों में अब सिर्फ नौ ही एक्टिव केस बचे हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि संक्रमण से बचाव के लिए बताए गए तरीकों पर लोग ध्यान दें तो जनपद एक बार फिर कोरोना मुक्त हो सकता है। अब जबकि लॉकडाउन फाइव में सरकार की ओर से छूट मिली है तो इसमें आम जन लापरवाही न करें। मास्क का प्रयोग करें और सामाजिक दूरी बनाने समेत अन्य बातों पर ध्यान दिया जाए।
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प्रवासियों के आने से कोरोना केस अचानक बढ़ गए हैं। मगर, अब बाहर से आने वाले प्रवासियों की संख्या में कमी आई है तो कोरोना संक्रमित केस कम आ रहे हैं। पुराने मरीज भी ठीक होकर घर पहुंच रहे हैं। उम्मीद है कि जनपद जल्द ही कोरोना मुक्त हो जाएगा। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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जनपद से बड़ी संख्या में लोग परिवार समेत दूसरे प्रांतों में जाकर लंबे समय से बसे हुए थे। ये लोग वहीं पर फैक्ट्ररी या दुकानों पर काम करके परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। कुछ लोगों ने तो बाहर अपना व्यवसाय भी फैला लिया था। पूरनपुर इलाके के तो काफी लोग विदेशों में रहते हैं। कोरोना संक्रमण के समय लॉकडाउन में दूसरे प्रांतों में जब रोजी-रोटी का संकट बढ़ा तो प्रवासियों ने घर वापसी कर ली। लॉकडाउन के तीसरे और चौथे चरण में दूसरे प्रांतों से 20 हजार से अधिक प्रवासी घर वापस आ गए। इसका असर यह रहा कि उस समय कोरोना संक्रमण केसों की संख्या में भी उछाल आया। एक समय तो चार कोरोना संक्रमितों के ठीक होने के बाद जनपद कोरोना मुक्त हो गया था। मगर, प्रवासियों के आने से जनपद में कोरोना पॉजिटिव केसों की संख्या 46 तक पहुंच गई। इनमें अधिकांश मुंबई, दिल्ली से आए प्रवासी ही संक्रमित निकल रहे थे। बड़ी संख्या में कोरोना केस बढने से एक बार तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भी धड़कनें तेज हो गईं। मगर, अब बीते दिनों की अपेक्षा प्रवासियों की आवाजाही में 80 फीसदी तक की कमी आई है। इसी के साथ संक्रमण में आया उछाल भी थमने लगा है। अब पुराने कोरोना संक्रमित मरीज भी इलाज के बाद ठीक होकर घर पहुंच रहे हैं। 46 पॉजिटिव मरीजों में अब सिर्फ नौ ही एक्टिव केस बचे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि संक्रमण से बचाव के लिए बताए गए तरीकों पर लोग ध्यान दें तो जनपद एक बार फिर कोरोना मुक्त हो सकता है। अब जबकि लॉकडाउन फाइव में सरकार की ओर से छूट मिली है तो इसमें आम जन लापरवाही न करें। मास्क का प्रयोग करें और सामाजिक दूरी बनाने समेत अन्य बातों पर ध्यान दिया जाए।
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प्रवासियों के आने से कोरोना केस अचानक बढ़ गए हैं। मगर, अब बाहर से आने वाले प्रवासियों की संख्या में कमी आई है तो कोरोना संक्रमित केस कम आ रहे हैं। पुराने मरीज भी ठीक होकर घर पहुंच रहे हैं। उम्मीद है कि जनपद जल्द ही कोरोना मुक्त हो जाएगा। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ