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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार की दरकार

Sat, 04 Dec 2021 12:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 12:21 AM IST
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market requirment for the sale of products
पीलीभीत। स्वयं सहायता समूह बनाकर घरेलू जरूरत के उत्पाद बनाने वाली गांव की महिलाएं अब बड़े-बड़े सपने देख रही हैं लेकिन उनके द्वारा तैयार उत्पादों के लिए अभी बाजार नहीं मिल सका। इसलिए समूहों का काम रफ्तार नहीं पकड़ सका है। जिला ग्राम विकास प्रशिक्षण संस्थान में अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं का कहना था कि प्रतिस्पर्धा से भरे बाजार में उनके उत्पादों के लिए गुंजाइश तो है लेकिन अभी तक उनके उत्पादों की गुणवत्ता और कीमत कम होने के विषय में ग्राहकों को जानकारी नहीं है। इसके लिए सरकारी अधिकारियों के सहयोग से काम हो सकता है। संवाद में मौजूद नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक एस दत्ता ने कहा कि महिलाओं को सिर्फ सरकारी अधिकारियों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। वे अपने उत्पादों के किफायती दामों के बारे में सबसे पहले अपने गांव के लोगों को अवगत कराएं। गांव से ही उत्पादों को बाजार मिलेगा। जब उत्पादन गांव की खपत से ज्यादा हो तो आसपास के गांवों में बिक्री कर सकते हैं।
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यह हैं स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद
स्वयं सहायता समूह का गठन करके महिलाएं जलकुंभी से ईको फ्रेंडली पर्स, बैग बना रहीं हैं। गत्ते के डिब्बे, अचार, शहद, जैविक खाद, कचरी, उड़द की दाल की बड़ी, डिटरजेंट पाउडर, मोमबत्ती, गाय के गोबर और मूत्र से तैयार उत्पाद, महिलाओं के लिए सेनेट्री पैड बना रही हैं।
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गोमूत्र से तैयार उत्पादों की बिक्री कराएंगे
गोमूत्र से तैयार उत्पादों का विक्रय कराने का आश्वासन प्राकृतिक खेती को समर्पित किसान जितेंद्र कुमार ने दिया। संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला अपने घर की गाय के मूत्र को प्रॉसिस करके किसानों को बेचने का तरीका सीख ले तो एक महीने में पांच हजार रुपये तक कमा सकती है। इस विषय में वह शनिवार को प्रशिक्षण देंगे और गो-मूत्र से तैयार उत्पादों की बिक्री भी कराएंगे। वह आठ वर्ष से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। गोमूत्र से तैयार उत्पाद खेती में उपयोगी है।
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महिलाओं के विचार
हम भरपूर मेहनत करने के लिए तैयार हैं लेकिन हमारे बनाए उत्पाद अगर बाजार में नहीं बिकेंगे तो हमें मेहनत का फायदा कैसे मिलेगा। - मीना देवी
बेशक नाबार्ड और राष्ट्रीय आजीविका मिशन की ओर से प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिल रहा है लेकिन असली दिक्कत हमारे उत्पादों के लिए खरीदार न मिलने से हो रही है। - ममता देवी
महिलाओं के द्वारा उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराने में सरकारी एजेंसियों के साथ साथ निजी एजेंसियों और व्यापारियों को भी आगे आना चाहिए। - खुशनुमा
बाजार में जो सेनेट्री पैड का पैकेट 30 रुपये में है। वही पैकेट समूह ने 27 रुपये में बिक्री करना शुरू किया है लेकिन अभी प्रचार कम है। इसलिए भरपूर बिक्री नहीं हो रही है। - पिंकी विश्वास

सभी महिलाएं अपनी जरूरत भर के लिए जो सामान बाजार से खरीद रहीं हैं अगर वही सामान समूह की महिलाओं से खरीदना शुरू करें तो इससे समूहों को प्रोत्साहन मिलेगा। - सुरजा देवी
लागत घटाने और बिक्री बढ़ाने के विषय में लगातार सरकारी अधिकारियों और महिला स्वयं सहायता समूहों के बीच संवाद जारी रहे। तभी सफलता मिलेगी। - आशा देवी
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