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Pilibhit News: शारदा डैम की मुख्य सड़क गड्ढों से छलनी, सफर दे रहा दर्द
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शारदा डैम की मुख्य सड़क काफी जर्जर हो चुकी है। संवाद
तराई के दर्जनों गांवों को उत्तराखंड से जोड़ती है यह 22 किमी की सड़क
कलीनगर। तराई क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग शारदा सागर डैम की सड़क इन दिनों गड्ढों से छलनी हो गया है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे राहगीरों को दर्द दे रहे हैं। कई स्थानों पर गड्ढों में पानी भरने से स्थिति और खराब हो जाती है। यह सड़क शारदा डैम से उत्तराखंड की सीमा तक करीब 22 किलोमीटर लंबी है और दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके बावजूद लंबे समय से सड़क निर्माण के लिए बजट का इंतजार किया जा रहा है।
कलीनगर तहसील का तराई इलाका हर साल बाढ़ और जलभराव की समस्या से जूझता है। इसके साथ ही क्षेत्र की अधिकांश सड़कें भी जर्जर हालत में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक-दो प्रमुख मार्गों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। मरम्मत के नाम पर कई बार गड्ढा मुक्ति अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद सड़क की स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। शारदा सागर डैम के जीरो किलोमीटर से उत्तराखंड सीमा तक का मार्ग सिंचाई विभाग के अधीन है।
करीब 17 किलोमीटर हिस्सा जनपद में और शेष पांच किलोमीटर उत्तराखंड क्षेत्र में आता है। डैम की मुख्य बॉडी पर बनी होने के कारण यह सड़क विभाग के लिए भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई स्थानों पर सड़क के गड्ढों में पानी भरने से डैम की मुख्य बॉडी के निचले हिस्से तक पानी पहुंचने की स्थिति बन जाती है। ऐसे में सड़क की समय रहते मरम्मत नहीं होने पर परेशानी बढ़ने की आशंका बनी रहती है। संवाद
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उत्तराखंड से भी जुड़ा है लोगों का कारोबार
इस मार्ग से तराई के कई गांव जुड़े हैं। क्षेत्र में बंगाली समाज की आबादी भी बड़ी संख्या में है, जिनके रिश्तेदारी और कारोबारी संबंध उत्तराखंड की बंगाली कॉलोनियों से हैं। किसानों को भी अपनी उपज बेचने के लिए कई बार उत्तराखंड की मंडियों का रुख करना पड़ता है। क्षेत्र में पर्याप्त खरीद केंद्र नहीं होने के कारण किसानों की निर्भरता दूसरे क्षेत्रों पर रहती है। ऐसे में जर्जर सड़क उनकी परेशानी और बढ़ा देती है।
शारदा डैम के जीरो किलोमीटर से नीचे की ओर भी कई विभागों की ओर से बनाई गई सड़कों की हालत खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढा मुक्ति के नाम पर अस्थायी मरम्मत के बजाय सड़कों का स्थायी निर्माण कराया जाना चाहिए।
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बरसात के बाद निर्माण की उम्मीद
शारदा सागर खंड के द्वितीय उपखंड के सहायक अभियंता राम अवध ने बताया कि सड़क के निर्माण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि बरसात समाप्त होने के बाद शारदा डैम के जीरो किलोमीटर से उत्तराखंड सीमा तक करीब 22 किलोमीटर मार्ग का बेहतर तरीके से निर्माण कराया जाएगा।
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कलीनगर। तराई क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग शारदा सागर डैम की सड़क इन दिनों गड्ढों से छलनी हो गया है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे राहगीरों को दर्द दे रहे हैं। कई स्थानों पर गड्ढों में पानी भरने से स्थिति और खराब हो जाती है। यह सड़क शारदा डैम से उत्तराखंड की सीमा तक करीब 22 किलोमीटर लंबी है और दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके बावजूद लंबे समय से सड़क निर्माण के लिए बजट का इंतजार किया जा रहा है।
कलीनगर तहसील का तराई इलाका हर साल बाढ़ और जलभराव की समस्या से जूझता है। इसके साथ ही क्षेत्र की अधिकांश सड़कें भी जर्जर हालत में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक-दो प्रमुख मार्गों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। मरम्मत के नाम पर कई बार गड्ढा मुक्ति अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद सड़क की स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। शारदा सागर डैम के जीरो किलोमीटर से उत्तराखंड सीमा तक का मार्ग सिंचाई विभाग के अधीन है।
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करीब 17 किलोमीटर हिस्सा जनपद में और शेष पांच किलोमीटर उत्तराखंड क्षेत्र में आता है। डैम की मुख्य बॉडी पर बनी होने के कारण यह सड़क विभाग के लिए भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई स्थानों पर सड़क के गड्ढों में पानी भरने से डैम की मुख्य बॉडी के निचले हिस्से तक पानी पहुंचने की स्थिति बन जाती है। ऐसे में सड़क की समय रहते मरम्मत नहीं होने पर परेशानी बढ़ने की आशंका बनी रहती है। संवाद
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उत्तराखंड से भी जुड़ा है लोगों का कारोबार
इस मार्ग से तराई के कई गांव जुड़े हैं। क्षेत्र में बंगाली समाज की आबादी भी बड़ी संख्या में है, जिनके रिश्तेदारी और कारोबारी संबंध उत्तराखंड की बंगाली कॉलोनियों से हैं। किसानों को भी अपनी उपज बेचने के लिए कई बार उत्तराखंड की मंडियों का रुख करना पड़ता है। क्षेत्र में पर्याप्त खरीद केंद्र नहीं होने के कारण किसानों की निर्भरता दूसरे क्षेत्रों पर रहती है। ऐसे में जर्जर सड़क उनकी परेशानी और बढ़ा देती है।
शारदा डैम के जीरो किलोमीटर से नीचे की ओर भी कई विभागों की ओर से बनाई गई सड़कों की हालत खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढा मुक्ति के नाम पर अस्थायी मरम्मत के बजाय सड़कों का स्थायी निर्माण कराया जाना चाहिए।
बरसात के बाद निर्माण की उम्मीद
शारदा सागर खंड के द्वितीय उपखंड के सहायक अभियंता राम अवध ने बताया कि सड़क के निर्माण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि बरसात समाप्त होने के बाद शारदा डैम के जीरो किलोमीटर से उत्तराखंड सीमा तक करीब 22 किलोमीटर मार्ग का बेहतर तरीके से निर्माण कराया जाएगा।