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गैंडा परियोजना: महोफ के दो कंपार्टमेंट चिह्नित
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
Updated Sun, 28 Dec 2014 12:45 AM IST
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टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद से ही जिले में दुधवा नेशनल पार्क की तर्ज पर गैंडा परियोजना लागू करने की मांग शुरू हो गई थी। सितंबर माह में पर्यावरण से जुड़ी संस्था सेव इंवायरमेंट सोसाइटी ने इसकी मांग करते हुए मुख्यमंत्री, प्रमुख वन संरक्षक सहित तमाम अधिकारियों को पत्र भेजे थे। इसके बाद इस पर काम शुरू हुआ और शासन ने इसकी संभावनाएं तलाश कर वन विभाग से रिपोर्ट भी मांगी थी। वन विभाग से मिली रिपोर्ट के आधार पर शासन ने इसे लागू करने के मूड में है। इसका खुलासा एक दिन पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने भी गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट रूप से कर दिया था।
उधर, वन विभाग ने इसके लिए उत्तराखंड की सुरई रेंज से सटे महोफ रेंज के कंपार्टमेंट नंबर 105 व 106 का चयन कर लिया। मुख्य सचिव के दौरे के समय मुस्तफाबाद पहुंचे प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे एवं वन संरक्षक वीके चोपड़ा ने भी कंपार्टमेंट के चयन को स्वीकृति दे दी। स्थान का चयन होने के बाद विभाग ने मुख्य सचिव को इसकी जानकारी दी है, जिस पर उन्होंने जल्द गैंडे भेजने का आश्वासन दिया है। सूत्र बताते हैं कि दुधवा नेशनल पार्क की तर्ज पर यहां भी गैंडों को रखने के लिए चयनित क्षेत्र को तार फेसिंग से सुरक्षित रखा जाएगा।
गैंडा परियोजना के लिए स्थान का चयन कर प्रस्ताव बनाया गया है। इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई है। शासन से इसकी स्वीकृति के लिए लिखा गया है।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ, टाइगर रिजर्व
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उधर, वन विभाग ने इसके लिए उत्तराखंड की सुरई रेंज से सटे महोफ रेंज के कंपार्टमेंट नंबर 105 व 106 का चयन कर लिया। मुख्य सचिव के दौरे के समय मुस्तफाबाद पहुंचे प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे एवं वन संरक्षक वीके चोपड़ा ने भी कंपार्टमेंट के चयन को स्वीकृति दे दी। स्थान का चयन होने के बाद विभाग ने मुख्य सचिव को इसकी जानकारी दी है, जिस पर उन्होंने जल्द गैंडे भेजने का आश्वासन दिया है। सूत्र बताते हैं कि दुधवा नेशनल पार्क की तर्ज पर यहां भी गैंडों को रखने के लिए चयनित क्षेत्र को तार फेसिंग से सुरक्षित रखा जाएगा।
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गैंडा परियोजना के लिए स्थान का चयन कर प्रस्ताव बनाया गया है। इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई है। शासन से इसकी स्वीकृति के लिए लिखा गया है।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ, टाइगर रिजर्व