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बालक को मारकर खाने वाले की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली
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पीलीभीत। उच्च न्यायालय ने अमरिया में तीन साल पहले छह वर्षीय बालक मोनिस की हत्या के बहुचर्चित मामले में दोषी नजीम मियां को सुनाई गई फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। उसे मौत होने तक कैद की सजा सुनाई गई है। नजीम मियां को पीलीभीत के अपर सत्र न्यायाधीश ने 10 अप्रैल 2018 को फांसी की सजा सुनाई थी। उस पर 35 हजार जुर्माना भी लगाया गया था।
थाना अमरिया में मोइन ने 21 फरवरी 2017 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अनुसार उसका छह वर्षीय भतीजा मोनिस दोपहर 12:30 बजे अचानक गायब हो गया। उसने देखा कि अभियुक्त नजीम मियां उसे अपने साथ एक खाली घर में ले जा रहा है। पीड़ित के अनुसार जब वह मौके पर पहुंचा तब नजीम मियां उसके शव को चाकू से काटकर टुकड़े-टुकड़े कर रहा था। मौके पर ही नजीम मियां को शव के साथ पकड़ लिया गया। अभियुक्त के मुंह पर भी खून लगा था। शव के कुछ टुकड़े गायब थे। इससे लगा कि उसने हत्या के बाद मांस को खाया भी था।
आशंका जताई गई कि बालक के साथ कुकृत्य की कोशिश भी की गई। उसमें असफल रहने पर ही उसकी निर्मम हत्या की गई। इस हत्याकांड की सुनवाई के बाद अदालत ने 10 अप्रैल 2018 को नजीम मियां को फांसी की सजा सुनाई थी। उस पर 35000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की थी। राज्य सरकार की ओर से भी मौत की सजा की पुष्टि के लिए मामले को हाईकोर्ट संदर्भित किया था। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रत्यंतर दिवाकर और न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने बीते दिवस इस केस पर अपना फैसला सुनाया। उन्होंने आरोपियों को निचले कोर्ट से दी गई फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया।
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थाना अमरिया में मोइन ने 21 फरवरी 2017 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अनुसार उसका छह वर्षीय भतीजा मोनिस दोपहर 12:30 बजे अचानक गायब हो गया। उसने देखा कि अभियुक्त नजीम मियां उसे अपने साथ एक खाली घर में ले जा रहा है। पीड़ित के अनुसार जब वह मौके पर पहुंचा तब नजीम मियां उसके शव को चाकू से काटकर टुकड़े-टुकड़े कर रहा था। मौके पर ही नजीम मियां को शव के साथ पकड़ लिया गया। अभियुक्त के मुंह पर भी खून लगा था। शव के कुछ टुकड़े गायब थे। इससे लगा कि उसने हत्या के बाद मांस को खाया भी था।
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आशंका जताई गई कि बालक के साथ कुकृत्य की कोशिश भी की गई। उसमें असफल रहने पर ही उसकी निर्मम हत्या की गई। इस हत्याकांड की सुनवाई के बाद अदालत ने 10 अप्रैल 2018 को नजीम मियां को फांसी की सजा सुनाई थी। उस पर 35000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की थी। राज्य सरकार की ओर से भी मौत की सजा की पुष्टि के लिए मामले को हाईकोर्ट संदर्भित किया था। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रत्यंतर दिवाकर और न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने बीते दिवस इस केस पर अपना फैसला सुनाया। उन्होंने आरोपियों को निचले कोर्ट से दी गई फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया।
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