UP News: पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बनाया जाएगा तेंदुआ सफारी पार्क, जंगल में 1716 हेक्टेयर जमीन चिह्नित
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में राजस्थान के झलाना तेंदुआ पार्क की तर्ज पर एक सफारी पार्क विकसित किया जाएगा। इसके लिए पूरनपुर रेंज के गोपालपुर क्षेत्र में 1716 हेक्टेयर वन भूमि चिह्नित कर सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। यह पहल पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देगी।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में पर्यटन को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। अब यहां राजस्थान के झलाना तेंदुआ पार्क की तर्ज पर तेंदुआ सफारी पार्क विकसित किया जाएगा। इसके लिए पूरनपुर रेंज के गोपालपुर क्षेत्र में 1716 हेक्टेयर जंगल भूमि चिह्नित कर विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस पहल से न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
पीटीआर में वन विभाग पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए एक नई योजना पर तेजी से काम कर रहा है। सामाजिक वानिकी प्रभाग की ओर से पूरनपुर रेंज के अंतर्गत गोपालपुर क्षेत्र में 1716 हेक्टेयर वन भूमि को तेंदुआ सफारी के लिए चिह्नित किया गया है। इस प्रस्ताव को तैयार कर शासन को भेज दिया गया है, जहां से स्वीकृति मिलने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। योजना के तहत इस क्षेत्र में लेपर्ड प्रूफ फेंसिंग कराई जाएगी। जिससे तेंदुओं की सुरक्षा की जा सके। साथ ही सैलानियों के लिए सुरक्षित और आकर्षक सफारी मार्ग विकसित किए जाएंगे।
बिना जोखिम के सफारी का आनंद ले सकेंगे पर्यटक
खास बात यह है कि यह सफारी कोर एरिया से दूर होगी। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा और पर्यटक भी बिना जोखिम के सफारी का आनंद ले सकेंगे। वन विभाग का लक्ष्य है कि इस तेंदुआ सफारी को वर्ष के 365 दिन संचालित किया जाए, ताकि पर्यटन को निरंतर बढ़ावा मिल सके। यह पहल पीलीभीत को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में सहायक साबित हो सकती है। इस योजना की शुरुआत पूर्व में वन मंत्री अरुण कुमार के निर्देश पर की गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की। डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
वन्यजीव चिकित्सालय और एनक्लोजर बनाने की भी योजना
तेंदुआ सफारी विकसित कराने के अलावा इस योजना में घायल और रेस्क्यू किए गए तेंदुओं के संरक्षण के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। प्रस्ताव में वन्यजीव चिकित्सालय स्थापित करने और रेस्क्यू एनक्लोजर बनाने की योजना शामिल है, जहां घायल या बीमार तेंदुओं का इलाज और देखभाल की जा सकेगी।