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Pilibhit News: मलेरिया के 110, डेंगू के पांच मरीज मिले, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
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शहर के मोहल्ला नखासा में गंदे पानी का जमाव। संवाद
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पीलीभीत। बारिश के बाद जिले में मच्छरजनित बीमारियों ने दस्तक दे दी है। अब तक मलेरिया के 110 और डेंगू के पांच मरीज सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में भले ही संक्रमित मरीजों की संख्या अभी कम दिखाई दे रही हो, लेकिन आने वाला सितंबर और अक्बतूर का महीना विभाग के लिए चुनौती भरा हो सकता है।
बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के लिए मुफीद ठिकाना बना हुआ है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई इलाकों में जलनिकासी की समस्या बनी हुई है। इसके बावजूद मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करने के लिए एंटी लार्वा का नियमित छिड़काव और फॉगिंग कितनी प्रभावी ढंग से हो रही है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। बीमारियों से ग्रसित लोगों की जिला अस्पताल में भीड़ भी लगातार बढ़ रही है।
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत हर साल एंटी लार्वा के छिड़काव, फॉगिंग, साफ-सफाई और लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष भी दो चरणों में अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विभागों की ओर से विभिन्न स्थानों पर गतिविधियां कराए जाने का दावा किया गया, लेकिन अभियान खत्म होने के बाद कई जलभराव वाले इलाकों में हालात पहले जैसे ही दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि मच्छरों के पनपने की जगह ही खत्म नहीं होगी तो केवल फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव से डेंगू-मलेरिया पर किस हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। संवाद
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2023 में 253 डेंगू मरीज मिले
जिले में डेंगू का प्रकोप पहले भी गंभीर रूप ले चुका है। वर्ष 2023 में करीब 12 हजार लोगों की डेंगू जांच की गई थी। इनमें 253 लोग डेंगू संक्रमित मिले थे। बीमारी की चपेट में आने से कई लोगों की मौत भी हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर तमाम अभियान चलाया। वर्ष 2024 में डेंगू के 33 मरीज सामने आए। वहीं, मलेरिया के मामले भी लगातार सामने आते रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में जिले में मलेरिया के 500 से अधिक मरीज जांच में संक्रमित पाए जा चुके हैं।
बिलसंडा, बीसलपुर के रसियाखानपुर समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया और डेंगू के मामले अधिक सामने आए थे। शहर के नौगवां पकड़िया क्षेत्र में वर्ष 2023 में डेंगू के सबसे अधिक मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ाई थी। इसके बावजूद इस वर्ष भी कई ऐसे इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है, जहां मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है।
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इन इलाकों में जमा पानी बना मच्छरों का ठिकाना
शहर के नखासा मोहल्ले में नाला निर्माण और जलनिकासी की समस्या के चलते कई स्थानों पर पानी जमा रहता है। मंडी समिति के सामने भी आबादी के बीच बड़ी मात्रा में पानी जमा होने की शिकायतें हैं। काला मंदिर, नौगवां पकड़िया, गंगोत्रीपुरम, फीलखाना, आवास विकास, एकता नगर और ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में भी कई जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
बारिश के बाद इन स्थानों पर जमा पानी में मच्छरों के लार्वा पनपने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर नियमित एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हो रहा है। कई इलाकों में फॉगिंग भी नियमित नहीं कराई जा रही है। इससे शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
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जिले के 200 इलाके हॉटस्पॉट, फिर भी जलनिकासी पर जोर नहीं
मलेरिया विभाग ने जिले के करीब 200 क्षेत्रों को हॉटस्पॉट की श्रेणी में रखा है। इन इलाकों में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा अधिक माना जाता है। ऐसे स्थानों पर लगातार निगरानी, लार्वा की जांच, एंटी लार्वा छिड़काव और फॉगिंग की जरूरत होती है। इसके साथ ही जलभराव की स्थायी समस्या को दूर करना भी जरूरी है, लेकिन कई स्थानों पर जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से अभियान अवधि तक सीमित रहने के आरोप भी लग रहे हैं। अभियान के दौरान फॉगिंग और छिड़काव की तस्वीरें खींचकर अधिकारियों को भेजे जाने के बाद कार्रवाई पूरी मान लिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो अक्टूबर में डेंगू-मलेरिया के मामले बढ़ने पर विभाग के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
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तीन फॉगिंग मशीनों से पूरे जिले में कैसे होगा मुकाबला?
मच्छरजनित बीमारियों से निपटने के लिए मलेरिया विभाग के पास जिलेभर में फॉगिंग के लिए महज तीन मशीनें उपलब्ध हैं। विभागीय स्तर पर करीब तीन साल से नई मशीनें नहीं खरीदे जाने की बात सामने आई है। जिले में 200 हॉटस्पॉट होने के बावजूद तीन मशीनों के सहारे व्यापक स्तर पर फॉगिंग कराने की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसके अलावा विभाग में तकनीकी कर्मचारियों की कमी भी समस्या बनी हुई है। मलेरिया की जांच के लिए किट उपलब्ध हैं, लेकिन डेंगू, फाइलेरिया समेत अन्य जांचों के लिए पर्याप्त तकनीकी संसाधन और कर्मचारियों की जरूरत है। ऐसे में मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में जांच और निगरानी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
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सिर्फ तीन माह के अभियान में तैयार होते हैं डेंगू-मलेरिया वार्ड
जिला अस्पताल और सीएचसी स्तर पर भी संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान डेंगू-मलेरिया के लिए अलग वार्ड तैयार करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभियान के दौरान कुछ बेड आरक्षित कर वार्ड तैयार किए जाते हैं और डेंगू-मलेरिया संबंधी पोस्टर लगाए जाते हैं। अभियान की अवधि समाप्त होने के बाद पोस्टर हटा दिए जाते हैं और व्यवस्था सामान्य कर दी जाती है, जबकि मच्छरजनित बीमारियों का खतरा केवल अभियान के तीन महीने तक नहीं रहता। बारिश के बाद सितंबर और अक्टूबर में डेंगू-मलेरिया का खतरा अधिक बढ़ता है। ऐसे में मरीजों के लिए वर्षभर समुचित व्यवस्था और निगरानी की जरूरत है।
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अभी संख्या कम, लेकिन खतरा टला नहीं
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक पांच डेंगू और 110 मलेरिया मरीज मिले हैं। पिछले वर्षों की तुलना में यह संख्या कम जरूर है, लेकिन इसे खतरा पूरी तरह टलने का संकेत नहीं माना जा सकता। बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ने और सितंबर-अक्टूबर में संक्रमण का प्रभाव बढ़ने की संभावना रहती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर निकायों और ग्राम पंचायतों के लिए भी जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर पानी की निकासी कराना बड़ी जिम्मेदारी है।
यदि जलभराव वाले स्थानों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो मच्छरों का बढ़ता प्रकोप आने वाले दिनों में डेंगू और मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ा सकता है।
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जिला अस्पताल में पहुंचे चार मरीज
जिला अस्पताल में चार मरीज जिनमें मलेरिया के लक्षण पाए गए, उनको सीएचसी से जिला मुख्यालय अस्पताल भेजा गया। जहां उनको भर्ती कराते हुए इलाज भी किया गया। हालांकि यह चारों संक्रमित कार्ड टेस्ट में संक्रमित पाए गए थे, सीएमएस डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि मरीज जो भी डेंगू या मलेरिया आदि का आता है उसके इलाज को लेकर सुूरक्षित वार्ड बनाया गया है। जहां मच्छरदानी, बेड, ऑक्सीजन आदि की अलग से व्यवस्था की गई है।
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मलेरिया, डेंगू समेत अन्य संचारी रोगों को लेकर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। सभी सीएचसी स्तर पर जांच की जा रही है। संक्रमित इलाकों में फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। अभी तक डेंगू और मलेरिया के मामलों की संख्या काफी कम है। विभाग की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार कार्रवाई कराई जा रही है।
- डॉ. बीसी पंत, मुख्य चिकित्साधिकारी
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बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के लिए मुफीद ठिकाना बना हुआ है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई इलाकों में जलनिकासी की समस्या बनी हुई है। इसके बावजूद मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करने के लिए एंटी लार्वा का नियमित छिड़काव और फॉगिंग कितनी प्रभावी ढंग से हो रही है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। बीमारियों से ग्रसित लोगों की जिला अस्पताल में भीड़ भी लगातार बढ़ रही है।
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संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत हर साल एंटी लार्वा के छिड़काव, फॉगिंग, साफ-सफाई और लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष भी दो चरणों में अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विभागों की ओर से विभिन्न स्थानों पर गतिविधियां कराए जाने का दावा किया गया, लेकिन अभियान खत्म होने के बाद कई जलभराव वाले इलाकों में हालात पहले जैसे ही दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि मच्छरों के पनपने की जगह ही खत्म नहीं होगी तो केवल फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव से डेंगू-मलेरिया पर किस हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। संवाद
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2023 में 253 डेंगू मरीज मिले
जिले में डेंगू का प्रकोप पहले भी गंभीर रूप ले चुका है। वर्ष 2023 में करीब 12 हजार लोगों की डेंगू जांच की गई थी। इनमें 253 लोग डेंगू संक्रमित मिले थे। बीमारी की चपेट में आने से कई लोगों की मौत भी हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर तमाम अभियान चलाया। वर्ष 2024 में डेंगू के 33 मरीज सामने आए। वहीं, मलेरिया के मामले भी लगातार सामने आते रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में जिले में मलेरिया के 500 से अधिक मरीज जांच में संक्रमित पाए जा चुके हैं।
बिलसंडा, बीसलपुर के रसियाखानपुर समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया और डेंगू के मामले अधिक सामने आए थे। शहर के नौगवां पकड़िया क्षेत्र में वर्ष 2023 में डेंगू के सबसे अधिक मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ाई थी। इसके बावजूद इस वर्ष भी कई ऐसे इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है, जहां मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है।
इन इलाकों में जमा पानी बना मच्छरों का ठिकाना
शहर के नखासा मोहल्ले में नाला निर्माण और जलनिकासी की समस्या के चलते कई स्थानों पर पानी जमा रहता है। मंडी समिति के सामने भी आबादी के बीच बड़ी मात्रा में पानी जमा होने की शिकायतें हैं। काला मंदिर, नौगवां पकड़िया, गंगोत्रीपुरम, फीलखाना, आवास विकास, एकता नगर और ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में भी कई जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
बारिश के बाद इन स्थानों पर जमा पानी में मच्छरों के लार्वा पनपने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर नियमित एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हो रहा है। कई इलाकों में फॉगिंग भी नियमित नहीं कराई जा रही है। इससे शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
जिले के 200 इलाके हॉटस्पॉट, फिर भी जलनिकासी पर जोर नहीं
मलेरिया विभाग ने जिले के करीब 200 क्षेत्रों को हॉटस्पॉट की श्रेणी में रखा है। इन इलाकों में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा अधिक माना जाता है। ऐसे स्थानों पर लगातार निगरानी, लार्वा की जांच, एंटी लार्वा छिड़काव और फॉगिंग की जरूरत होती है। इसके साथ ही जलभराव की स्थायी समस्या को दूर करना भी जरूरी है, लेकिन कई स्थानों पर जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से अभियान अवधि तक सीमित रहने के आरोप भी लग रहे हैं। अभियान के दौरान फॉगिंग और छिड़काव की तस्वीरें खींचकर अधिकारियों को भेजे जाने के बाद कार्रवाई पूरी मान लिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो अक्टूबर में डेंगू-मलेरिया के मामले बढ़ने पर विभाग के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
तीन फॉगिंग मशीनों से पूरे जिले में कैसे होगा मुकाबला?
मच्छरजनित बीमारियों से निपटने के लिए मलेरिया विभाग के पास जिलेभर में फॉगिंग के लिए महज तीन मशीनें उपलब्ध हैं। विभागीय स्तर पर करीब तीन साल से नई मशीनें नहीं खरीदे जाने की बात सामने आई है। जिले में 200 हॉटस्पॉट होने के बावजूद तीन मशीनों के सहारे व्यापक स्तर पर फॉगिंग कराने की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसके अलावा विभाग में तकनीकी कर्मचारियों की कमी भी समस्या बनी हुई है। मलेरिया की जांच के लिए किट उपलब्ध हैं, लेकिन डेंगू, फाइलेरिया समेत अन्य जांचों के लिए पर्याप्त तकनीकी संसाधन और कर्मचारियों की जरूरत है। ऐसे में मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में जांच और निगरानी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
सिर्फ तीन माह के अभियान में तैयार होते हैं डेंगू-मलेरिया वार्ड
जिला अस्पताल और सीएचसी स्तर पर भी संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान डेंगू-मलेरिया के लिए अलग वार्ड तैयार करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभियान के दौरान कुछ बेड आरक्षित कर वार्ड तैयार किए जाते हैं और डेंगू-मलेरिया संबंधी पोस्टर लगाए जाते हैं। अभियान की अवधि समाप्त होने के बाद पोस्टर हटा दिए जाते हैं और व्यवस्था सामान्य कर दी जाती है, जबकि मच्छरजनित बीमारियों का खतरा केवल अभियान के तीन महीने तक नहीं रहता। बारिश के बाद सितंबर और अक्टूबर में डेंगू-मलेरिया का खतरा अधिक बढ़ता है। ऐसे में मरीजों के लिए वर्षभर समुचित व्यवस्था और निगरानी की जरूरत है।
अभी संख्या कम, लेकिन खतरा टला नहीं
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक पांच डेंगू और 110 मलेरिया मरीज मिले हैं। पिछले वर्षों की तुलना में यह संख्या कम जरूर है, लेकिन इसे खतरा पूरी तरह टलने का संकेत नहीं माना जा सकता। बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ने और सितंबर-अक्टूबर में संक्रमण का प्रभाव बढ़ने की संभावना रहती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर निकायों और ग्राम पंचायतों के लिए भी जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर पानी की निकासी कराना बड़ी जिम्मेदारी है।
यदि जलभराव वाले स्थानों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो मच्छरों का बढ़ता प्रकोप आने वाले दिनों में डेंगू और मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ा सकता है।
जिला अस्पताल में पहुंचे चार मरीज
जिला अस्पताल में चार मरीज जिनमें मलेरिया के लक्षण पाए गए, उनको सीएचसी से जिला मुख्यालय अस्पताल भेजा गया। जहां उनको भर्ती कराते हुए इलाज भी किया गया। हालांकि यह चारों संक्रमित कार्ड टेस्ट में संक्रमित पाए गए थे, सीएमएस डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि मरीज जो भी डेंगू या मलेरिया आदि का आता है उसके इलाज को लेकर सुूरक्षित वार्ड बनाया गया है। जहां मच्छरदानी, बेड, ऑक्सीजन आदि की अलग से व्यवस्था की गई है।
मलेरिया, डेंगू समेत अन्य संचारी रोगों को लेकर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। सभी सीएचसी स्तर पर जांच की जा रही है। संक्रमित इलाकों में फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। अभी तक डेंगू और मलेरिया के मामलों की संख्या काफी कम है। विभाग की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार कार्रवाई कराई जा रही है।
- डॉ. बीसी पंत, मुख्य चिकित्साधिकारी

शहर के मोहल्ला नखासा में गंदे पानी का जमाव। संवाद