{"_id":"926486146653b1d5de72b3e2c6a2d490","slug":"leopard-now-will-remain-at-lucknow-zoo-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब लखनऊ चिड़ियाघर में ही रहेगा तेंदुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब लखनऊ चिड़ियाघर में ही रहेगा तेंदुआ
पीलीभीत।
Updated Mon, 29 Jun 2015 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माला कॉलोनी के घर में घुसने पर पकड़ा गया तेंदुआ अब लखनऊ के चिड़ियाघर में
विज्ञापन
ही रहेगा। तेंदुए की अधिक उम्र और कमजोर होने के कारण अधिकारियों ने यह
निर्णय लिया है।
शनिवार को सुबह माला जंगल से निकालकर एक तेंदुआ माला कॉलोनी निवासी अनिल पोद्दार के घर में घुस गया था। सूचना पर पहुंची वनविभाग की टीम ने उसे पांच घंटे की मशक्कत के बाद पिंजरे में कैद किया था। तेंदुए के पैर में घाव होने के कारण उच्चाधिकारियों के निर्देश पर डीएफओ ने उसे उसी दिन रात को लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया था जहां डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने उसके दो पैरों व गले में टयूमर का ऑपरेशन कर इलाज किया था। इलाज करने वाले डॉक्टर ने उसकी रिपोर्ट वनविभाग के अधिकारियों को सौंपी जिसमें उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष बताई गई है और तेंदुआ काफी कमजोर भी बताया गया है। बताते हैं तेंदुए की औसत आयु 18-20 साल की होती है। ऐसे में अधिकारियों ने उसे ठीक होने के बाद जंगल वापस न भेजकर अब चिड़ियाघर में ही रखने का निर्णय लिया है। लखनऊ से वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने इस निर्णय से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
माला कॉलोनी में मिला तेंदुआ घायल होने के साथ कमजोर भी है। उम्र अधिक होने के कारण उसे शिकार में भी दिक्कत आ सकती है। इसके चलते उसे अब जंगल वापस न भेजकर चिड़ियाघर में ही रखने का निर्णय लिया गया है।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ, टाइगर रिजर्व
शनिवार को सुबह माला जंगल से निकालकर एक तेंदुआ माला कॉलोनी निवासी अनिल पोद्दार के घर में घुस गया था। सूचना पर पहुंची वनविभाग की टीम ने उसे पांच घंटे की मशक्कत के बाद पिंजरे में कैद किया था। तेंदुए के पैर में घाव होने के कारण उच्चाधिकारियों के निर्देश पर डीएफओ ने उसे उसी दिन रात को लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया था जहां डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने उसके दो पैरों व गले में टयूमर का ऑपरेशन कर इलाज किया था। इलाज करने वाले डॉक्टर ने उसकी रिपोर्ट वनविभाग के अधिकारियों को सौंपी जिसमें उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष बताई गई है और तेंदुआ काफी कमजोर भी बताया गया है। बताते हैं तेंदुए की औसत आयु 18-20 साल की होती है। ऐसे में अधिकारियों ने उसे ठीक होने के बाद जंगल वापस न भेजकर अब चिड़ियाघर में ही रखने का निर्णय लिया है। लखनऊ से वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने इस निर्णय से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
माला कॉलोनी में मिला तेंदुआ घायल होने के साथ कमजोर भी है। उम्र अधिक होने के कारण उसे शिकार में भी दिक्कत आ सकती है। इसके चलते उसे अब जंगल वापस न भेजकर चिड़ियाघर में ही रखने का निर्णय लिया गया है।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ, टाइगर रिजर्व