फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Leaves mountain rivers Traces of the waste

पहाड़ी नदियां छोड़ जाती  हैं बर्बादी के निशान

Sun, 29 May 2016 07:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Sun, 29 May 2016 07:54 PM IST
विज्ञापन
नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने वाली तीन नदियां आठ माह तक तो सूखी रहती हैं, लेकिन बरसात के दिनों में तीनों नदियों का ऐसा उग्र रूप देखने को मिलता है, जिसके बर्बादी के निशान दूसरे वर्ष आने वाली बरसात के मौसम तक दिखाई देते हैं। शारदा नदी सहित नदियों की बाढ़ से अब तक सैकड़ों बेघर हो चुके हैं। तबाही से बचाने के लिए प्रदेश के कई मुख्यमंत्री नदी पर तटबंध बनाने की घोषणाएं तो कर चुके हैं, लेकिन उन्हें आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। जिसका नतीजा यह है कि नदियों को जहां मौका मिलता है, जमकर तबाही मचाती हैं।
विज्ञापन


शारदा, वमनी से सिंचाई 
महकमा भी चिंतित
भारत नेपाल के अंतर्राष्ट्रीय सीमा पिलर नंबर 22 और 24 के बीच नेपाल से जनपद में प्रवेश करने वाली शारदा और वमनी नदी का संगम नोमेंस लैंड पर है। जहां इन दिनों नेपाली और भारतीय दोनों इलाकों में यह नदियां सूखी दिखाई दे रही हैं। बीच बीच में रेत के टीले छोड़ दिए हैं, लेकिन कल क्या होने वाला है इससे सिंचाई महकमा चिंतित है। 
विज्ञापन


पानी घटने बढ़ने से 
होती है तबाही
शारदा और सनेड़ी नदी में बरसात के दौरान तेज गति से जलस्तर बढ़ता है और उसी तेजी के साथ घटता भी है। ऐसे में जलस्तर घटने पर नदी रेत के ढेर छोड़ देती है, जिसके चलते नदी की धार दाएं या बांये किनारे की ओर कटान करती है। यहां बांये किनारे पर जंगल है सो बरसों से दाएं किनारे पर ही कटान हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तबाही की आशंका पर 
महकमा ने दिखाई तेजी
क्षेत्र में तबाही की आशंका को भांपकर पहली बार बाढ़ खंड यहां नोमेंस लैंड से सटे इलाके से ढाई किमी तक नदी के किनारे को मजबूत करने में जुटा है। जिओ ट्यूब लगाकर उसके ऊपर आरवीएम डाली गई है, अपस्ट्रीम में जहां जिओ ट्यूब नहीं लगाए गए हैं वहां एसी बैग में मिट्टी भरकर उनके ऊपर जिओ बैग लगाए जा रहे हैं।
अधिशासी अभियंता मिन्हाज अहमद एवं सहायक अभियंता श्याम सिंह बघेल कहते हैं कि बाढ़ से तबाही रोकने के लिए बाढ़ नियंत्रण कार्य चल रहे हैं। नदी के भीतरी हिस्से में बैडवार भी बनाया जाएगा। जहां जिओ ट्यूब लगाना थे वहां पत्थर निकलने की वजह से मशीनें काम नहीं कर सकीं। इसलिए आला अफसरों के निर्देश पर कार्य की डिजाइन बदलवाई गई। 


नेपाल में बन गया तटबंध, लेकिन यहां नहीं  
नदियों की भारी तबाही को देखते हुए पूर्व में नेपाल सरकार ने अपने क्षेत्र में तो एक तटबंध बना दिया था, लेकिन यहां तटबंध जुबानी तौर पर ही बनते रहे। वैसे तो मुख्यमंत्री रहे राजनाथ सिंह, मुलायम सिंह यादव, मायावती ने हवाई सर्वे कर शारदा नदी पर तटबंध बनाने की घोषणाएं की थीं, लेकिन इसे दुर्भाग्य की कहा जाएगा कि करोड़ों रुपये के बाढ़ नियंत्रण कार्य तो कराए जा रहे हैं, लेकिन आज तक तटबंध नहीं बनाया जा सके। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed