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हरियाणा के 13 जिलों से लौटे 436 श्रमिक
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पीलीभीत। हरियाणा के 13 जिलों में काम रहे जिले के 436 श्रमिक 17 रोडवेज बसों से पीलीभीत पहुंचे। जिला प्रशासन की देखरेख में इन श्रमिकों को शहर समेत बीसलपुर, अमरिया, पूरनपुर, बीसलपुर के शेल्टर होम में भेजा गया है। जहां स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इन सभी श्रमिकों की जांच की। रात भर बसों के आने से अफसर और स्वास्थकर्मी पूरी रात जागते रहे।
प्रदेश सरकार द्वारा अन्य प्रातों में काम करने वाले श्रमिकों की घर वापसी के लिए बुलंदशहर डिपो को मुख्य केंद्र बनाया गया था। श्रमिकों के आने की सूचना के बाद उनके खानपान, जांच और उनके ठहरने की व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन की ओर से पीडी अनिल कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम बनाई गई। वहीं श्रमिकों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार टीमें भी लगाई गई। अफसरों के मुताबिक हरियाणा सरकार द्वारा अपनी रोडवेज बसों से जिले के 436 श्रमिकों को बुलंदशहर तक पहुंचाया गया। रविवार शाम साढ़े छह बजे से बुलंदशहर से बसों के आने का सिलसिला जारी शुरू हुआ, जो रात भर चलता रहा। आखिरी बस सोमवार सुबह करीब 3:35 बजे पीलीभीत पहुंची। जिला प्रशासन की टीम में शामिल सहायक अधिकारी/एआरटीओ ने बताया कि 17 बसों से 436 श्रमिक यहां पहुंचे हैं। इसमें 164 श्रमिकों को बीसलपुर, 167 को पूरनपुर, 98 को अमरिया और 47 श्रमिकों को शहर के चिरौंजीलाल वीरेंद्रपाल इंटर कॉलेज के शेल्टर होम में भेजा गया है। शेल्टर होम में जाने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा इन सभी की स्क्रीनिंग भी की गई।
पूरनपुर भेजे गए 167 श्रमिक
पूरनपुर। हरियाणा में फंसे लोगों की शुरू हुई वापसी के तहत हरियाणा से रविवार देर रात को छह बसों से 167 लोगों को नगर में लाया गया। नगर में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में नया शेल्टर होम बनाया गया। एसडीएम हरिओम शर्मा ने बताया कि लक्ष्य डिग्री कॉलेज में बने शेल्टर होम में 54, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में 57 और गन्ना कृषक महाविद्यालय में 55 लोगों को रखा गया है। गन्ना कृषक महाविद्यालय में 22 लोग पहले से ही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों से जांच करवाई गई। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सीपी सिंह ने बताया कि हरियाणा से 167 लोग आए हैं। सभी की जांच करा ली गई है। जांच में जिन लोगों में बुखार मिला है। उनकी सूची बनवाई जा रही है। उनके सैंपलिंग करवाई जाएगी।
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बीसलपुर 164 श्रमिक पहुंचे
बीसलपुर। तहसीलदार आशुतोष कुमार ने बताया कि रविवार को देर रात हरियाणा से बसों द्वारा 164 मजदूरों को लाया गया। सीएचसी में परीक्षण कराया गया है। इसके बाद उन्हें एसवीएम इंटर कालेज, बालाजी गर्ल्स इंटर कालेज और एसआरएम इंटर कालेज में बनाए गए नए शेल्टर होमों में 14 दिनों के लिए रखा गया है। सुरक्षा के लिए तीनों शेल्टर होमों मे दो पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं। व्यवस्था देखने के लिए राजस्व विभाग के कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया गया। मजदूरों के जलपान, भोजन और ठहरने का सारा बंदोबस्त शेल्टर होमों में किया गया है। एसडीएम चंद्रभानु सिंह, सीओ लल्लन सिंह और कोतवाल केशव तिवारी ने शेल्टर होम का जायजा लिया।
राजगीरी करने गया था रोहतक
पूरनपुर के मोहल्ला साहूकारा निवासी अनिल कुमार ने बताया कि मैं 16 मार्च को रोहतक में राजगीरी करने गया था। लॉकडाउन होने पर वहां फंस गया। वहां के प्रशासन ने उसे 28 दिन के लिए क्वांरटीन किया था और तीन बार जांचे भी कराई थी।
सरसों काटने गया था रेवाड़ी
गांव नौवानगला निवासी नेतराम ने बताया कि वह 15 मार्च को रेवाड़ी मजदूरी पर सरसों काटने गया था, जहां लॉकडाउन में फंस गया। वहां के प्रशासन ने उन्हें 28 दिन के लिए क्वांरटीन किया था और तीन बार जांचें कराई थी। अब फिर से उन्हें कैद कर लिया गया।
घर पहुंचाने की जगह भेज दिया शेल्टर होम
गांव जादौपुर गहलुइया निवासी माकूम बेग ने बताया कि 18 मार्च को गांव के कुछ लोगों के मजदूरी करने हरियाणा गए थे। मात्र आठ दिन मजदूरी की। इसके बाद हरियाणा के रेवाड़ी कॉलेज के शेल्टर होम में सभी को डाल दिया गया। एक महीना रहे भी। अब यहां घर की जगह फिर से शेल्टर होम में रोक दिया गया।
हजारा क्षेत्र के गांव कंबोजनगर निवासी शमशेर सिंह ने बताया कि गांव के 23 लोगों के साथ हरियाणा के दरियापुर में मजदूरी करने को डेढ़ माह पहले गए थे। लॉकडाउन में मजदूरी बंद हो गई। तीन दिन पहले घर आने की आस जागी। अब घर न भेजकर पूरनपुर के शेल्टर होम में रखा गया है।
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प्रदेश सरकार द्वारा अन्य प्रातों में काम करने वाले श्रमिकों की घर वापसी के लिए बुलंदशहर डिपो को मुख्य केंद्र बनाया गया था। श्रमिकों के आने की सूचना के बाद उनके खानपान, जांच और उनके ठहरने की व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन की ओर से पीडी अनिल कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम बनाई गई। वहीं श्रमिकों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार टीमें भी लगाई गई। अफसरों के मुताबिक हरियाणा सरकार द्वारा अपनी रोडवेज बसों से जिले के 436 श्रमिकों को बुलंदशहर तक पहुंचाया गया। रविवार शाम साढ़े छह बजे से बुलंदशहर से बसों के आने का सिलसिला जारी शुरू हुआ, जो रात भर चलता रहा। आखिरी बस सोमवार सुबह करीब 3:35 बजे पीलीभीत पहुंची। जिला प्रशासन की टीम में शामिल सहायक अधिकारी/एआरटीओ ने बताया कि 17 बसों से 436 श्रमिक यहां पहुंचे हैं। इसमें 164 श्रमिकों को बीसलपुर, 167 को पूरनपुर, 98 को अमरिया और 47 श्रमिकों को शहर के चिरौंजीलाल वीरेंद्रपाल इंटर कॉलेज के शेल्टर होम में भेजा गया है। शेल्टर होम में जाने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा इन सभी की स्क्रीनिंग भी की गई।
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पूरनपुर भेजे गए 167 श्रमिक
पूरनपुर। हरियाणा में फंसे लोगों की शुरू हुई वापसी के तहत हरियाणा से रविवार देर रात को छह बसों से 167 लोगों को नगर में लाया गया। नगर में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में नया शेल्टर होम बनाया गया। एसडीएम हरिओम शर्मा ने बताया कि लक्ष्य डिग्री कॉलेज में बने शेल्टर होम में 54, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में 57 और गन्ना कृषक महाविद्यालय में 55 लोगों को रखा गया है। गन्ना कृषक महाविद्यालय में 22 लोग पहले से ही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों से जांच करवाई गई। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सीपी सिंह ने बताया कि हरियाणा से 167 लोग आए हैं। सभी की जांच करा ली गई है। जांच में जिन लोगों में बुखार मिला है। उनकी सूची बनवाई जा रही है। उनके सैंपलिंग करवाई जाएगी।
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बीसलपुर 164 श्रमिक पहुंचे
बीसलपुर। तहसीलदार आशुतोष कुमार ने बताया कि रविवार को देर रात हरियाणा से बसों द्वारा 164 मजदूरों को लाया गया। सीएचसी में परीक्षण कराया गया है। इसके बाद उन्हें एसवीएम इंटर कालेज, बालाजी गर्ल्स इंटर कालेज और एसआरएम इंटर कालेज में बनाए गए नए शेल्टर होमों में 14 दिनों के लिए रखा गया है। सुरक्षा के लिए तीनों शेल्टर होमों मे दो पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं। व्यवस्था देखने के लिए राजस्व विभाग के कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया गया। मजदूरों के जलपान, भोजन और ठहरने का सारा बंदोबस्त शेल्टर होमों में किया गया है। एसडीएम चंद्रभानु सिंह, सीओ लल्लन सिंह और कोतवाल केशव तिवारी ने शेल्टर होम का जायजा लिया।
राजगीरी करने गया था रोहतक
पूरनपुर के मोहल्ला साहूकारा निवासी अनिल कुमार ने बताया कि मैं 16 मार्च को रोहतक में राजगीरी करने गया था। लॉकडाउन होने पर वहां फंस गया। वहां के प्रशासन ने उसे 28 दिन के लिए क्वांरटीन किया था और तीन बार जांचे भी कराई थी।
सरसों काटने गया था रेवाड़ी
गांव नौवानगला निवासी नेतराम ने बताया कि वह 15 मार्च को रेवाड़ी मजदूरी पर सरसों काटने गया था, जहां लॉकडाउन में फंस गया। वहां के प्रशासन ने उन्हें 28 दिन के लिए क्वांरटीन किया था और तीन बार जांचें कराई थी। अब फिर से उन्हें कैद कर लिया गया।
घर पहुंचाने की जगह भेज दिया शेल्टर होम
गांव जादौपुर गहलुइया निवासी माकूम बेग ने बताया कि 18 मार्च को गांव के कुछ लोगों के मजदूरी करने हरियाणा गए थे। मात्र आठ दिन मजदूरी की। इसके बाद हरियाणा के रेवाड़ी कॉलेज के शेल्टर होम में सभी को डाल दिया गया। एक महीना रहे भी। अब यहां घर की जगह फिर से शेल्टर होम में रोक दिया गया।
हजारा क्षेत्र के गांव कंबोजनगर निवासी शमशेर सिंह ने बताया कि गांव के 23 लोगों के साथ हरियाणा के दरियापुर में मजदूरी करने को डेढ़ माह पहले गए थे। लॉकडाउन में मजदूरी बंद हो गई। तीन दिन पहले घर आने की आस जागी। अब घर न भेजकर पूरनपुर के शेल्टर होम में रखा गया है।