{"_id":"5e8cac008ebc3e78bc6b76cd","slug":"korona-virus-pilibhit-news-bly402004048","type":"story","status":"publish","title_hn":"टाइगर रिजर्व में जानवरों के अंदर पहले भी फैल चुका है वायरस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टाइगर रिजर्व में जानवरों के अंदर पहले भी फैल चुका है वायरस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माधोटांडा (पीलीभीत)। अमेरिका में न्यूयॉर्क के ब्रोंक्स चिड़ियाघर में बाघिन के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। पुराने अनुभवों को देखते हुए ऐसा किया गया है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में रहने वाले जानवरों के अंदर पहले भी खतरनाक वायरस के संक्रमण मिल चुके हैं। कोरोना का संक्रमण और ज्यादा तेजी से फैलने के कारण इन जानवरों को खतरा हो सकता है।
दो साल पहले तेंदुए के शावकों की मौत के बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आईवीआरआई चिकित्सकों ने उनमें वायरस संक्रमण होने की पुष्टि की थी। तब यह कहा गया था कि जंगली सुअर का शिकार करने से खतरनाक वायरस बाघ और तेंदुओं में प्रवेश कर रहा है। हालांकि उस समय सतर्कता बरतने के बाद इस पर अंकुश पा लिया गया था। करीब 73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पांच वन रेंज हैं। वर्ष 2018 के अक्तूबर में बराही रेंज के अंतर्गत हल्दीडेंगा क्षेत्र में जंगल से बाहर एक तेंदुए का सड़ा गला शव बरामद हुआ था। उसके कुछ ही दिनों के बाद उसी इलाके में खारजा नहर के किनारे तेंदुए के दो युवा शावकों के भी शव बरामद हुए थे।
आईवीआरआई बरेली के चिकित्सकों ने इनका पोस्टमार्टम किया था जिसमें खुलासा हुआ था कि तेंदुए और शावकों की मौत खतरनाक जानलेवा वायरस के संक्रमण से हुई है। यह वायरस सुअर का मांस खाने से इनमें फैला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद टाइगर रिजर्व में हड़कंप मच गया था। अधिकारियों ने अलर्ट जारी कर पूरे जंगल क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी थी। उस समय वन कर्मियों को यह आदेश दिए गए थे कि यदि किसी मांसाहारी वन्य जीव का शव पड़ा हो या कोई बाघ या तेंदुआ बीमार अवस्था में चलता दिखाई दे तो उसकी तत्काल सूचना दी जाए।
विज्ञापन
शावक में पाए गए थे इन खतरनाक वायरस के संक्रमण
आईवीआरआई डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शावक की मौत खतरनाक वायरस के संक्रमण से होने की पुष्टि हुई थी। इसमें बताया गया था कि शावक के शरीर में चर्बी प्रजाति का टेक्सीकारा साइलोपेटरा (पेट का गोल कृमि), सायक्लोटोमा (छोटी आंत का गोल कृमि), टिरुचिरिस (बड़ी आंत का गोल कृमि), डायरो फ्लोरिया (हृदय का कृमी), छोटी आंत का फीता कृमि आइसोप्रो (छोटी आंत का एक कोशिका परजीवी) और पैरागों जैसे वायरस पाए गए थे। यह वायरस जंगली सुअर का शिकार कर उसका मांस खाने से शरीर में प्रवेश करना माना गया था।
कैमरा ट्रैपिंग के जरिए बाघों में कोरोना संक्रमण की होगी पहचान
पीलीभीत। एनटीसीए ने टाइगर रिजर्व प्रशासन को गाइडलाइन जारी कर टाइगर रिजर्व में स्वच्छंद विचरण करने वाले बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों को कैमरा ट्रैपिंग के माध्यम से उनमें संक्रमण के लक्षणों की मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि इसको लेकर एनटीसीए ने बाघों में कोविड-19 से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। कैमरों से मॉनिटरिंग करने के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने एक टीम का गठन कर दिया है। टीम में दो पशु चिकित्सक, एसडीओ पूरनपुर, एसडीओ माला समेत पांचों रेंज के रेंजर को शामिल किया गया है। मॉनिटरिंग को लगाए गए कैमरों में उनकी तस्वीर कैद होने के बाद टीम इसकी बारीकी से जांच करेगी। इसमें बाघ और अन्य वन्यजीवों की नाक बहने, खांसने आदि के लक्षण मिलने पर टीम संबंधित वन्य जीव की सघन निगरानी करेगी।
विज्ञापन
दो साल पहले तेंदुए के शावकों की मौत के बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आईवीआरआई चिकित्सकों ने उनमें वायरस संक्रमण होने की पुष्टि की थी। तब यह कहा गया था कि जंगली सुअर का शिकार करने से खतरनाक वायरस बाघ और तेंदुओं में प्रवेश कर रहा है। हालांकि उस समय सतर्कता बरतने के बाद इस पर अंकुश पा लिया गया था। करीब 73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पांच वन रेंज हैं। वर्ष 2018 के अक्तूबर में बराही रेंज के अंतर्गत हल्दीडेंगा क्षेत्र में जंगल से बाहर एक तेंदुए का सड़ा गला शव बरामद हुआ था। उसके कुछ ही दिनों के बाद उसी इलाके में खारजा नहर के किनारे तेंदुए के दो युवा शावकों के भी शव बरामद हुए थे।
विज्ञापन
आईवीआरआई बरेली के चिकित्सकों ने इनका पोस्टमार्टम किया था जिसमें खुलासा हुआ था कि तेंदुए और शावकों की मौत खतरनाक जानलेवा वायरस के संक्रमण से हुई है। यह वायरस सुअर का मांस खाने से इनमें फैला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद टाइगर रिजर्व में हड़कंप मच गया था। अधिकारियों ने अलर्ट जारी कर पूरे जंगल क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी थी। उस समय वन कर्मियों को यह आदेश दिए गए थे कि यदि किसी मांसाहारी वन्य जीव का शव पड़ा हो या कोई बाघ या तेंदुआ बीमार अवस्था में चलता दिखाई दे तो उसकी तत्काल सूचना दी जाए।
विज्ञापन
शावक में पाए गए थे इन खतरनाक वायरस के संक्रमण
आईवीआरआई डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शावक की मौत खतरनाक वायरस के संक्रमण से होने की पुष्टि हुई थी। इसमें बताया गया था कि शावक के शरीर में चर्बी प्रजाति का टेक्सीकारा साइलोपेटरा (पेट का गोल कृमि), सायक्लोटोमा (छोटी आंत का गोल कृमि), टिरुचिरिस (बड़ी आंत का गोल कृमि), डायरो फ्लोरिया (हृदय का कृमी), छोटी आंत का फीता कृमि आइसोप्रो (छोटी आंत का एक कोशिका परजीवी) और पैरागों जैसे वायरस पाए गए थे। यह वायरस जंगली सुअर का शिकार कर उसका मांस खाने से शरीर में प्रवेश करना माना गया था।
कैमरा ट्रैपिंग के जरिए बाघों में कोरोना संक्रमण की होगी पहचान
पीलीभीत। एनटीसीए ने टाइगर रिजर्व प्रशासन को गाइडलाइन जारी कर टाइगर रिजर्व में स्वच्छंद विचरण करने वाले बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों को कैमरा ट्रैपिंग के माध्यम से उनमें संक्रमण के लक्षणों की मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि इसको लेकर एनटीसीए ने बाघों में कोविड-19 से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। कैमरों से मॉनिटरिंग करने के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने एक टीम का गठन कर दिया है। टीम में दो पशु चिकित्सक, एसडीओ पूरनपुर, एसडीओ माला समेत पांचों रेंज के रेंजर को शामिल किया गया है। मॉनिटरिंग को लगाए गए कैमरों में उनकी तस्वीर कैद होने के बाद टीम इसकी बारीकी से जांच करेगी। इसमें बाघ और अन्य वन्यजीवों की नाक बहने, खांसने आदि के लक्षण मिलने पर टीम संबंधित वन्य जीव की सघन निगरानी करेगी।