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प्रशासन रहा सख्त, ट्रेन रोकने में कामयाब नहीं हुए किसान
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पीलीभीत। दिल्ली की सीमाओं पर करीब ढाई महीने से चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में बृहस्पतिवार को ट्रेन रोकने के एलान का बाद जिला प्रशासन अलर्ट हो गया। दोपहर में मंडी समिति में सभा करने के बाद किसान रामलीला रेलवे क्रासिंग के पास पटरी पर पहुंचे तो वहां पहले से पुलिस बल के साथ मौजूद अफसरों ने उन्हें घेराबंदी कर हटा दिया। इसके बाद किसान रेलवे स्टेशन पहुंच गए, लेकिन वहां भी भारी फोर्स के साथ अफसर पहुंच गए और उन्हें स्टेशन के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। रेलवे स्टेशन के बाहर ही किसान नेताओं ने पंचायत कर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और लौट गए। लिहाजा प्रशासन की सख्ती के चलते किसान ट्रेन रोकने में कामयाब नहीं हो सके।
कृषि कानूनों के विरोध में कई महीनों से दिल्ली के गाजीपुर, टिकरी और सिंघु बार्डर पर किसान संगठनों की अगुवाई में धरना प्रदर्शन चल रहा है। किसान नेता कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। इस पर सरकार से अभी सहमति नहीं बन सकी है। आंदोलन को रफ्तार देने के लिए बृहस्पतिवार को ट्रेन रोकने का एलान किया गया था। इसे लेकर सुबह से ही पुलिस-प्रशासन अलर्ट रहा। समस्त रेलवे क्रॉसिंगों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। दोपहर करीब 12 बजे भारतीय किसान यूनियन के करीब 50 कार्यकर्ता मंडी समिति स्थित कृषक विश्राम गृह में इकट्ठे हुए। जिलाध्यक्ष सतविंदर सिंह काहलो की अगुवाई में एक घंटे तक पंचायत चली, जिसमेें दोपहर 1:50 बजे बरेली की ओर से आने वाली त्रिवेणी एक्सप्रेस को रोकने की रणनीति बनाई गई। डेढ़ बजे कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए रामलीला रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंच गए और पटरी पर खड़े होकर प्रदर्शन करने लगे। एसडीएम सदर अविनाश चंद्र मौर्य, सीओ सिटी वीरेंद्र विक्रम, कोतवाल अतर सिंह, प्रभारी निरीक्षक सुनगढ़ी श्रीकांत द्विवेदी, पीएसी और रेलवे पुलिस के साथ पहले से मौजूद थे। अधिकारियों ने भाकियू नेताओं से बात की और हटने को कहा। पहले तो भाकियू नेता ट्रेन रोकने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन जब अधिकारियों ने सख्ती कर घेराबंदी शुरू की तो उनके तेवर नरम पड़ गए और कार्यकर्ता वहां से हट गए, फिर पैदल ही बल्लभनगर कॉलोनी के रास्ते रेलवे स्टेशन पहुंच गए। वहां भी अफसर पहुंच गए और सख्ती कर रेलवे स्टेशन के बाहर ही रोक दिया। भाकियू नेताओं की अधिकारियों से काफी देर बहस हुई, लेकिन उन्हें रेलवे स्टेशन में प्रवेश नहीं करने दिया गया। आखिर में किसान नेताओं ने रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क पर बैठकर पंचायत की और एसडीएम को ज्ञापन देकर प्रदर्शन समाप्त कर दिया। जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली। प्रदर्शन करने वालों में भाकियू प्रदेश सचिव वेद प्रकाश शर्मा, महासचिव दिनेश कुमार, मंडल उपाध्यक्ष नागेंद्र सिंह, गुरमीत सिंह, प्यारेलाल वर्मा, लालू मिश्रा, निर्मल भोजवाल, पूरनलाल आदि मौजूद रहे।
ज्ञापन में कृषि कानून रद्द करने, एमएसपी पर कानून बनाने, बकाया गन्ना मूल्य भुगतान, भंडारण की क्षमता तय करने, समान मंडी शुल्क लागू करने, किसान के परिजन को पेंशन, लाल किला पर गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा की न्यायिक जांच कराने, गन्ना मूल्य 450 रुपये क्विंटल घोषित करने सहित नौ मांगें रखी गईं।
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सपा कार्यालय पर भी तैनात रहा फोर्स
किसान आंदोलन के समर्थन में पिछले कई महीनों से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता लगातार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। गाजीपुर बार्डर पर भी जिले के सपा कार्यकर्ता पहुंचे थे। ऐसे में ट्रेन रोकने के एलान के बीच भी सपा कार्यकर्ता प्रदर्शन न कर दें, इसे लेकर बृहस्पतिवार सुबह से नकटादाना चौराहा स्थित सपा कार्यालय पर सुबह से ही पुलिस-पीएसी तैनात कर दी गई। सपा नेताओं की लोकेशन को लेकर भी अफसर जानकारी जुटाते रहे। हालांकि उन्होंने कहीं कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया।
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कृषि कानूनों के विरोध में कई महीनों से दिल्ली के गाजीपुर, टिकरी और सिंघु बार्डर पर किसान संगठनों की अगुवाई में धरना प्रदर्शन चल रहा है। किसान नेता कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। इस पर सरकार से अभी सहमति नहीं बन सकी है। आंदोलन को रफ्तार देने के लिए बृहस्पतिवार को ट्रेन रोकने का एलान किया गया था। इसे लेकर सुबह से ही पुलिस-प्रशासन अलर्ट रहा। समस्त रेलवे क्रॉसिंगों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। दोपहर करीब 12 बजे भारतीय किसान यूनियन के करीब 50 कार्यकर्ता मंडी समिति स्थित कृषक विश्राम गृह में इकट्ठे हुए। जिलाध्यक्ष सतविंदर सिंह काहलो की अगुवाई में एक घंटे तक पंचायत चली, जिसमेें दोपहर 1:50 बजे बरेली की ओर से आने वाली त्रिवेणी एक्सप्रेस को रोकने की रणनीति बनाई गई। डेढ़ बजे कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए रामलीला रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंच गए और पटरी पर खड़े होकर प्रदर्शन करने लगे। एसडीएम सदर अविनाश चंद्र मौर्य, सीओ सिटी वीरेंद्र विक्रम, कोतवाल अतर सिंह, प्रभारी निरीक्षक सुनगढ़ी श्रीकांत द्विवेदी, पीएसी और रेलवे पुलिस के साथ पहले से मौजूद थे। अधिकारियों ने भाकियू नेताओं से बात की और हटने को कहा। पहले तो भाकियू नेता ट्रेन रोकने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन जब अधिकारियों ने सख्ती कर घेराबंदी शुरू की तो उनके तेवर नरम पड़ गए और कार्यकर्ता वहां से हट गए, फिर पैदल ही बल्लभनगर कॉलोनी के रास्ते रेलवे स्टेशन पहुंच गए। वहां भी अफसर पहुंच गए और सख्ती कर रेलवे स्टेशन के बाहर ही रोक दिया। भाकियू नेताओं की अधिकारियों से काफी देर बहस हुई, लेकिन उन्हें रेलवे स्टेशन में प्रवेश नहीं करने दिया गया। आखिर में किसान नेताओं ने रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क पर बैठकर पंचायत की और एसडीएम को ज्ञापन देकर प्रदर्शन समाप्त कर दिया। जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली। प्रदर्शन करने वालों में भाकियू प्रदेश सचिव वेद प्रकाश शर्मा, महासचिव दिनेश कुमार, मंडल उपाध्यक्ष नागेंद्र सिंह, गुरमीत सिंह, प्यारेलाल वर्मा, लालू मिश्रा, निर्मल भोजवाल, पूरनलाल आदि मौजूद रहे।
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ज्ञापन में कृषि कानून रद्द करने, एमएसपी पर कानून बनाने, बकाया गन्ना मूल्य भुगतान, भंडारण की क्षमता तय करने, समान मंडी शुल्क लागू करने, किसान के परिजन को पेंशन, लाल किला पर गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा की न्यायिक जांच कराने, गन्ना मूल्य 450 रुपये क्विंटल घोषित करने सहित नौ मांगें रखी गईं।
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सपा कार्यालय पर भी तैनात रहा फोर्स
किसान आंदोलन के समर्थन में पिछले कई महीनों से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता लगातार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। गाजीपुर बार्डर पर भी जिले के सपा कार्यकर्ता पहुंचे थे। ऐसे में ट्रेन रोकने के एलान के बीच भी सपा कार्यकर्ता प्रदर्शन न कर दें, इसे लेकर बृहस्पतिवार सुबह से नकटादाना चौराहा स्थित सपा कार्यालय पर सुबह से ही पुलिस-पीएसी तैनात कर दी गई। सपा नेताओं की लोकेशन को लेकर भी अफसर जानकारी जुटाते रहे। हालांकि उन्होंने कहीं कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया।