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खादी पर कोरोना की मार...कमाई घटकर आधी रह गई, उत्पादन 80 फीसदी घटा

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 01:22 AM IST
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बरखेड़ा में सूत तैयार करतीं महिलाएं
बरखेड़ा में सूत तैयार करतीं महिलाएं - फोटो : PILIBHIT

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पीलीभीत। कोरोना संक्रमण ने बड़े और छोटे सभी तरह के कारोबार को चौपट कर डाला। बाजार के बिगड़े हालात का असर बापू की खादी पर भी पड़ा। भारत में कोरोना की दस्तक के बाद तराई के छह गांधी आश्रमों की आमदनी में रिकार्ड गिरावट आई। इनकी आमदनी घटकर आधी रह गई और खादी का उत्पादन मात्र 20 फीसदी पर आ गया। अब हालात यह हैं कि गांधी आश्रम अपने स्टाफ को तनख्वाह देने के लिए या तो मास्क बेच रहे हैं या फिर ग्रामोद्योग के उत्पाद बेचकर दिन गुजारने को मजबूर हैं। इस वित्तीय वर्ष में गांधी आश्रमों की कमाई पिछले वर्ष की तुलना में 50 फीसदी कम है। साथ ही खादी के उत्पादन में 80 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि गांधी आश्रम संचालकों को उम्मीद है कि कोरोना काल के बाद खादी की लोकप्रियता बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आज जन्मदिन है। बापू का जिक्र आए और खादी की चर्चा न हो, ऐसा हो नहीं सकता। केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद संकट से जूझती खादी को आक्सीजन मिली थी। यहां खादी का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा था। इसकी मुख्य वजह यह है कि केंद्र सरकार ने खादी को फैशन से जोड़ा और उसे युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया। सरकार के इस कदम से आम लोगों में खादी का क्रेज बढ़ा। बाजार में खादी के तमाम फैशनेबल ब्रांड आ गए। खादी के वह फैशनेबल कपड़े अब भी ट्रेंड में हैं। अब खादी सूती, मसलिन, सिल्क के रंग-बिरंगे डिजाइन में भी आने लगी। कोरोना के पहले बाजार में खादी की डिमांड बढ़ी तो यहां उत्पादन भी बढ़ गया। इसके साथ ही बुनकरों को काम मिलने लगा। वर्ष 2017 के बाद पीलीभीत के गांधी आश्रमों में जहां खादी से होने वाली कमाई में बढ़ोत्तरी हुई, वहीं खादी का उत्पादन भी तेजी से बढ़ने लगा।

दो साल पहले 1.26 करोड़ का कारोबार
गांधी आश्रम के क्षेत्रीय कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018-19 में जनपद के गांधी आश्रमों में खादी का 1.26 करोड़ रुपये का कारोबार किया गया। उस दौरान 36 लाख रुपये की खादी का उत्पादन भी किया गया। वर्ष 2019-20 में गांधी आश्रमों में खादी की बिक्री से 1.13 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जबकि 48 लाख रुपये की खादी का उत्पादन हुआ। मगर, कोरोना ने खादी पर इतना असर डाला कि गांधी आश्रमों में काम करने वाले स्टाफ और बुनकरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया।
कोरोना ने घटाया कारोबार, उत्पादन भी घटा
लॉकडाउन के दौरान पूरे 70 दिन तक अन्य कारोबार की तरह सभी गांधी आश्रम भी बंद रहे। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने गांधी आश्रमों को कपड़ा दुकानों के साथ वाले रोस्टर में शामिल कर दिया। गांधी आश्रम के क्षेत्रीय कार्यालय के सचिव राघवेंद्र द्विवेदी के मुताबिक कोरोना की वजह से चालू वित्तीय वर्ष में गांधी आश्रमों के कारोबार में 50 फीसदी की गिरावट आई। उत्पादन में भी 80 फीसदी की कमी हुई है। उन्होंने बताया कि हर साल दो अक्तूबर से गांधी आश्रमों में खादी का कारोबार बढ़ने लगता है। इस बार भी उम्मीद है कि दो अक्टूबर के बाद खादी फिर अपने पुराने मुकाम पर पहुंचेगी।
पीलीभीत में हैं सात खादी आश्रम
जनपद में खादी आश्रम की स्थापना आजादी से पहले हुई थी। यहां सबसे पुराना खादी आश्रम शहर के स्टेशन रोड पर स्थित है। मंडी परिसर में भी एक खादी आश्रम संचालित है। इसके अलावा बीसलपुर, बरखेड़ा, पूरनपुर और बिलसंडा में भी एक-एक खादी आश्रम है। यहां खादी का उत्पादन बरखेड़ा क्षेत्र के गांव पौटा खमरिया, जागीर और बीसलपुर के गांव मीरपुर वाहनपुर में होता है। इन गांवों में बुनकरों द्वारा पहले खादी का कपड़ा तैयार किया जाता है। बरखेड़ा कस्बे समेत पतरसिया, दड़िया आदि गांवों में महिलाएं सूत कातकर खादी तैयार करती हैं। फिर यहां से तैयार खादी का कपड़ा क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से अन्य खादी आश्रमों में भेजा जाता है।
पिछले कुछ बरसों में खादी उद्योग ने तरक्की की है, मगर इस साल कोरोना महामारी से खादी का कारोबार बेहद कम रह गया है। चालू वित्तीय वर्ष में खादी का 50 फीसदी कारोबार घट गया। बुनकरों के सामने रोजगार का संकट है। - अवधेश कुमार मिश्र, प्रबंधक, गांधी आश्रम, पीलीभीत
केंद्र सरकार के प्रयासों से खादी एक बार फिर से लोकप्रिय हुई। जनपद में साल दर साल खादी का कारोबार और उत्पादन बढ़ रहा था, मगर कोरोना आने के बाद खादी के उत्पादन और कारोबार दोनों में ही भारी गिरावट आई। - राघवेंद्र द्विवेदी, सचिव, क्षेत्रीय कार्यालय, बरखेड़ा
ग्राहकों के इंतजार में सूना पड़ा शहर स्थित गांधी आश्रम
ग्राहकों के इंतजार में सूना पड़ा शहर स्थित गांधी आश्रम- फोटो : PILIBHIT
 

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