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खेती पर जलवायु परिवर्तन का रखें ध्यान
पीलीभीत।
Updated Tue, 16 Feb 2016 07:45 PM IST
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कृषि विज्ञान केंद्र पर वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और बचाव पर चर्चा हुई। कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि योजनाओं को बनाते समय जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर दिया।
टांडा बिजेसी स्थित राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पर कृषि विश्वविद्यालय मेरठ एवं कृषि तकनीकी उपयोग अनुसंधान संस्थान कानपुर के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। केवीके के वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका ने वर्ष 2015-16 में हुए कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया और 2016-17 की योजनाओं की जानकारी दी। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मयंक राय ने बताया कि जलवायु में परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव होता है इसलिए कृषि योजनाओं एवं आगामी शोध कार्यों में जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखे जाने की जरूरत है। मेरठ कृषि विश्वविद्यालय से आए डॉ. एएस चौधरी ने कहा कि भारत में जलवायु परिवर्तन खेती को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारण हैं। इसका सीधा असर खेती से जीविकोपार्जन करने वाले किसानों पर पड़ता है। कानपुर के वैज्ञानिक डॉ. पीके सिंह ने कहा कि कृषि उपयोग की तकनीकियों को जलवायु परिवर्तन के हिसाब से लचीला बनाना होगा। नाबार्ड के डीडीएम एके रावत ने केवीके पर उद्यान एवं पशुपालन के वैज्ञानिकों को तैनात कराने, मृदा परीक्षण लैब को सुदृढ़ करने और नई प्रजातियों के प्रचार प्रसार की जरूरत पर जोर दिया। इस मौके पर डॉ. एनसी त्रिपाठी, डॉ. फैज मोहसिन, डॉ. रीना सेठी, कृषक चौधरी महेंद्र सिंह, अशोक भसीन, हरिओम, आशा देवी, सत्येंद्र सिंह, महेशपाल, हरिशंकर, कमलेश सहित कई लोग थे।
टांडा बिजेसी स्थित राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पर कृषि विश्वविद्यालय मेरठ एवं कृषि तकनीकी उपयोग अनुसंधान संस्थान कानपुर के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। केवीके के वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका ने वर्ष 2015-16 में हुए कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया और 2016-17 की योजनाओं की जानकारी दी। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मयंक राय ने बताया कि जलवायु में परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव होता है इसलिए कृषि योजनाओं एवं आगामी शोध कार्यों में जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखे जाने की जरूरत है। मेरठ कृषि विश्वविद्यालय से आए डॉ. एएस चौधरी ने कहा कि भारत में जलवायु परिवर्तन खेती को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारण हैं। इसका सीधा असर खेती से जीविकोपार्जन करने वाले किसानों पर पड़ता है। कानपुर के वैज्ञानिक डॉ. पीके सिंह ने कहा कि कृषि उपयोग की तकनीकियों को जलवायु परिवर्तन के हिसाब से लचीला बनाना होगा। नाबार्ड के डीडीएम एके रावत ने केवीके पर उद्यान एवं पशुपालन के वैज्ञानिकों को तैनात कराने, मृदा परीक्षण लैब को सुदृढ़ करने और नई प्रजातियों के प्रचार प्रसार की जरूरत पर जोर दिया। इस मौके पर डॉ. एनसी त्रिपाठी, डॉ. फैज मोहसिन, डॉ. रीना सेठी, कृषक चौधरी महेंद्र सिंह, अशोक भसीन, हरिओम, आशा देवी, सत्येंद्र सिंह, महेशपाल, हरिशंकर, कमलेश सहित कई लोग थे।
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