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Pilibhit News: मासूम के दिलों पर खतरा, चार माह में इको जांच में 32 मिले हृदय रोगी
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पीलीभीत। बदलते दौर के साथ अब बच्चे भी हृदय रोग से अछूते नहीं रह गए। बच्चों में सामान्य से दिखने वाली बीमारी जांच में हृदय रोग बनकर सामने आ रही है। पिछले चार माह में जिला अस्पताल में हुई इको जांच में 1-15 साल के 32 बच्चों में दिल में छेद, नसों का सिकुड़न, हृदय की मांसपेशियों का मोटी होना जैसी गंभीर बीमारी पकड़ में आई है। इसके डायग्नोस के बाद बच्चे को उच्च संस्थान रेफर किया गया है।
बदलती जीवनशैली, प्रदूषण जन्मजात बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच अब बच्चों में भी हृदय रोग तेजी से सामने आने लगे हैं। जिला अस्पताल में पिछले चार माह के दौरान हुई बच्चों की इको जांच में वीएसडी (हृदय की ऊपरी एट्रिया के बीच छेद), एएसडी (हृदय के वेंट्रिकल्स में छेद) व टीओएफ फेफड़ो तक खून ले जाने वाली नस में संकरा होना) सहित अन्य हृदय बीमारियां पकड़ में आ रही हैं।
आंकड़े के अनुसार, 32 बच्चों में सर्वाधिक बच्चे 1-10 वर्ष के दिल में छेद के पाए गए। जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि सामान्यत: बच्चों का लगातार निमोनिया बुखार होना, विकास में रूकावट, माइल स्टोन, पसीना आना व नीला पड़ना हृदय रोग के बड़े संकेत हैं। जिनको हमें बिल्कुुल भी सामान्य समस्या समझकर बिल्कुल भी नजरअंदाज करने की जरूरत नहीं है। संवाद
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बदलती जीवनशैली, प्रदूषण जन्मजात बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच अब बच्चों में भी हृदय रोग तेजी से सामने आने लगे हैं। जिला अस्पताल में पिछले चार माह के दौरान हुई बच्चों की इको जांच में वीएसडी (हृदय की ऊपरी एट्रिया के बीच छेद), एएसडी (हृदय के वेंट्रिकल्स में छेद) व टीओएफ फेफड़ो तक खून ले जाने वाली नस में संकरा होना) सहित अन्य हृदय बीमारियां पकड़ में आ रही हैं।
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आंकड़े के अनुसार, 32 बच्चों में सर्वाधिक बच्चे 1-10 वर्ष के दिल में छेद के पाए गए। जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि सामान्यत: बच्चों का लगातार निमोनिया बुखार होना, विकास में रूकावट, माइल स्टोन, पसीना आना व नीला पड़ना हृदय रोग के बड़े संकेत हैं। जिनको हमें बिल्कुुल भी सामान्य समस्या समझकर बिल्कुल भी नजरअंदाज करने की जरूरत नहीं है। संवाद
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