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Pilibhit News: भूख-बीमारी से 20 गोवंश की मौत के मामले में सीवीओ पर भी गाज गिरना तय

Tue, 05 Sep 2023 12:01 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Tue, 05 Sep 2023 12:01 AM IST
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In the case of death of 20 cows due to hunger and disease, CVO is also sure to face punishment.
परशुरामपुा गोेआश्रय स्थल ।
पीलीभीत। कलीनगर तहसील के परशुरामपुर गोआश्रय स्थल में भूख और बीमारी से दो महीने में एक के बाद एक 20 गोवंशीय पशुओं की मौत होने के मामले में अब प्रशासन कार्रवाई के प्रति गंभीर दिख रहा है। अब तक गोवंश की मौत पर पर्दा डालने में जुटे अफसर मामला शासन के संज्ञान में आने के बाद अपनी गर्दन बचाने के लिए जिम्मेदारों की गर्दन नापने में लगे हैं। ग्राम पंचायत सचिव को निलंबित करने के बाद अब मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पर कार्रवाई की संस्तुति के साथ सीडीओ ने डीएम को रिपोर्ट सौंप दी है। माधोटांडा के पशु चिकित्साधिकारी पर भी कार्रवाई की जा रही है।
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कलीनगर के परशुराम गोआश्रय स्थल में दो महीने में 20 पशुओं की भूख और बीमारी से मौत होने के मामले को वहां के जिम्मेदार लगातार छिपाते आ रहे थे। यही नहीं मौत के बाद पशुओं को गोआश्रय स्थल में ही दफन कर दिया गया था। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था। कार्रवाई से बचने के लिए स्थानीय स्तर से उच्चाधिकारियों को ऐसा कुछ न होना बताकर मामले को झुठला दिया गया।
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इधर, जब मामले का शासन ने संज्ञान लिया तो जिला विकास अधिकारी के अलावा परियोजना निदेशक और एसडीएम कलीनगर से जांच कराई गई। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई थी। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में ग्राम्य विकास अधिकारी धर्मेन्द्र कुमार को दोषी करार दिया था। कहा, सचिव की ओर से चारा और भूसे के लिए बजट का मांग पत्र ही नहीं दिया गया।
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मामला शासन के संज्ञान में आने पर आनन फानन ग्राम पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि शासन की ओर से इसकी जांच कराकर अन्य लोगों पर भी कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए गए थे। अब इस मामले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. अरविंद की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अधिकारियों ने पूछा कि जब सचिव की ओर से डिमांड नहीं दी गई तो इस बाबत पूछा क्यों नहीं गया। ऐसा था तो स्थानीय पशु चिकित्साधिकारी ने अपनी रिपोर्ट क्यों नहीं दी।
जांच में जब जिम्मेदारों की लापरवाही की परतें खुलीं तो मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) और माधोटांडा के पशु चिकित्साधिकारी भी कार्रवाई की जद में आ गए। कार्रवाई के लिए सीडीओ ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर अनुमोदन के लिए फाइल डीएम के पास भेज दी है। डीएम की ओर से अनुमोदन कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसमें सीवीओ को प्रतिकूल प्रविष्ट देने सहित उनके खिलाफ कार्रवाई की भी संस्तुति की गई है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नूरुलहुदा पर जिला स्तर से कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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प्रत्येक गोआश्रय स्थल के लिए नोडल अफसर नामित
कलीगनर की परशुराम गोआश्रय स्थल में पशुओं की मौत के बाद अब प्रशासन ने सभी 52 गोआश्रय स्थलों में व्यवस्था पर नजर रखने के लिए नोडल अधिकारी नामित कर दिए हैं। नोडल अधिकारियों को 15 दिन में गोआश्रय स्थलों का निरीक्षण कर फोटोग्राफ सहित आख्या मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को देनी होगी। इसे मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजा जाएगा।
नोडल अधिकारियों को निरीक्षण में गोआश्रय स्थलों में पंजीकृत गोवंश की संख्या, मौजूद गोवंश की संख्या, टैग किए गए गोवंश की संख्या, स्वास्थ्य की स्थिति, भूसे की उपलब्धता, चोकर की मात्रा, हरे चारे की स्थिति, चारागाह की स्थिति, पानी की व्यवस्था, बिजली, केयरटेकर के मानदेय भुगतान की स्थिति, पशु संख्या के सापेक्ष शेड की स्थिति, चिकित्सा पंजिका की उपलब्धता, शव विच्छेदन पंजिका, निरीक्षण पंजिका, बीमार पशुओं की संख्या और बजट की स्थिति पर रिपोर्ट देनी होगी।

वर्जन
पशुओं के मरने के मामले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की भी लापरवाही उजागर हुई है। ग्राम पंचायत सचिव की ओर से बजट की मांग न करने का कारण नहीं बताया गया। सीवीओ के साथ ही माधोटांडा के पशु चिकित्साधिकारी की भी लापरवाही सामने आई है। कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी के पास भेजी गई है। अनुमोदन के बाद पत्रावली शासन को भेजी जएगी। - धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
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