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Pilibhit News: 50 लाख के अतिरिक्त बजट से आयुर्वेदिक फार्मेसी में सुधार, 34 तरह की बन रहीं दवाएं

Wed, 27 Aug 2025 11:58 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Wed, 27 Aug 2025 11:58 PM IST
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Improvement in Ayurvedic pharmacy with additional budget of 50 lakhs, 34 types of medicines are being made
आयुर्वेद फार्मेसी में मशीन की देखरेख करता कर्मचारी। संवाद
पीलीभीत। प्रदेश के 19 जिलों में आयुर्वेद चिकित्सालयों में दवाओं की आपूर्ति करने वाली स्थानीय ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक औषधि निर्माणशाला की स्थिति में अब और सुधार आया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की अपेक्षा इस बार शासन से औषधि निर्माणशाला को 50 लाख अधिक बजट दिया है। वर्तमान में औषधि निर्माणशाला में कम स्टाफ व जंग खा रही मशीनों से भी 34 तरह की दवाएं बनाई जा रहीं है। इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है।
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पीलीभीत की ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक औषधि निर्माणशाला उत्तर प्रदेश की दो फार्मेसी में से एक है। इसमें बन रही दवाएं मरीजों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हुई हैं। औषधि निर्माणशाला में कुछ समय पहले बजट व कच्चे माल की आपूर्ति की समस्या बनी रहती थी। वर्तमान में शासन के बेहतर सहयोग से औषधि निर्माणशाला में सुधार आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में औषधि निर्माणशाला को 3.50 करोड़ का बजट मिला था, लेकिन दवाइयों की आपूर्ति बढ़ने से इस वर्ष शासन से 50 लाख रुपये की धनराशि अधिक मिली है। औषधियों को निर्माण अधिक हो पा रहा है।
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हालांकि लंबे समय से औषधि निर्माणशाला में स्टाफ की कमी बनी हुई है। वर्तमान में स्वीकृत 14 पदों में कुल नौ ही पद पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि उनमें से चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। ऐसे में समय से औषधि निर्माण में समस्या रहती है।
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34 प्रकार की तैयार हो रहीं दवाएं
औषधि निर्माणशाला में वर्तमान में दवाओं की संख्या पहले से बढ़ा दी गई है। इन दिनों चू्र्ण, क्वाथ, आसव, अरिष्ट, वटी, गुग्गुल, भस्म व तेल बनाए जा रहे हैं। स्थानीय जिले में आपूर्ति के साथ यह दवाएं प्रदेश के 19 जिलों बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा, मेरठ, आगरा, हापुड, गाजियाबाद सहित अन्य जिलों के 405 सरकारी चिकित्सालयों में पूर्ति की जा रही हैं। इसका लाभ लाखों लोग उठा रहे है।


50 साल से भी पुरानी मशीनें कर रहीं काम
निर्माणशाला में 15 से ज्यादा प्रकार की मशीनें लगी हुई है। इसमें से कुछ मशीनें तो 50 साल से भी ज्यादा की हो गई हैं। बेहतर देखरेख व रखरखाव के चलते दवाओं को तैयार करने में सक्षम हैं। हालांकि, कुछ नई मशीनों के लिए औषधि निर्माणशाला की ओर से पत्र लिखा गया है।


कोरोना में आयुष काढ़ा बना था रामबाण
2020 में जिन दिनों कोरोना की चपेट में लाखों लोगो ने अपनी जान गंवाई। उन दिनों पीलीभीत की इस आयुर्वेदिक फार्मेसी में लोगो की इम्युनिटी पावर बढ़ाने के लिए 17 क्विंटल आयुष काढ़ा व छह क्विंटल अमृत क्वाथ तैयार किया गया। इसकी छोटे पैकेट में पैकिंग कर प्रदेश में आपूर्ति कराई गई। यह काढ़ा लोगों के लिए कारगर साबित हुआ, कोरोना के मरीजों में इससे काफी सुधार भी देखा गया।


वर्जन
शासन से औषधि निर्माण के संचालन के लिए बेहतर सहयोग मिल रहा है। कुछ नई मशीनों का प्रस्ताव भेजा गया है। कच्चे माल की आपूर्ति भी काफी बेहतर है, अन्य संसाधन बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे है।
डॉ. प्रकाश चंद्र, अधीक्षक आयुर्वेदिक राजकीय फार्मेसी
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