{"_id":"5f04bbe88ebc3e43053a43a2","slug":"illegal-private-colony-pilibhit-news-bly411957660","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्मशान की जमीन पर कब्जे का तीन साल से चल रहा था खेल, अब हुई कार्रवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्मशान की जमीन पर कब्जे का तीन साल से चल रहा था खेल, अब हुई कार्रवाई
विज्ञापन
पीलीभीत। वनकटी रोड पर गांव बिलगवां में निर्माणाधीन प्राइवेट कॉलोनी की नींव आठ साल पहले विवादित जमीन पर रखी गई थी। मगर, इस कॉलोनी के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा था पड़ोस का श्मशान घाट। इससे स्वाभाविक तौर पर लोगों के परहेज की वजह से ही कॉलोनी विकसित नहीं हो पा रही थी। इसलिए कॉलोनाइजर ने श्मशान की जमीन तीन साल पहले ही अपनी कॉलोनी में मिलाने की कोशिश शुरू कर दी थी।
शहर निवासी एक कॉलोनाइजर ने कुछ बड़े लोगों के साथ साझेदारी में प्रापर्टी का काम शुरू किया था। आठ साल पहले कॉलोनाइजर ने शहर से सटे गांव बिलगवां में प्रधान और गांव वालों से प्राइवेट कॉलोनी बनाने के लिए जमीन खरीदी थी। मगर, जमीन के निकट श्मशान घाट की 320 वर्ग मीटर जमीन थी। पड़ोस में श्मशान होने की वजह से कॉलोनाइजर को जल्द ही अंदाज हो गया कि अगर उसने कॉलोनी बनाकर खड़ी भी कर दी तो कोई भी ग्राहक उसमें से मकान या प्लॉट नहीं खरीदेगा। इसलिए, कॉलोनाइजर ने श्मशान की जमीन कॉलोनी में मिलाने की तरकीब निकाल ली। कॉलोनाइजर ने कुछ ग्रामीणों के सहयोग से श्मशान की जमीन लेकर बदले में अपनी जमीन देने का प्रस्ताव बनवाकर राजस्व विभाग को भेजा। इसकी वजह यह बताई गई कि श्मशान जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। राजस्व कर्मियों ने संस्तुति कर फाइल एसडीएम को भेज दी। तत्कालीन एसडीएम प्रेमप्रकाश पाल ने फरवरी 2012 को जमीन की अदला-बदली की मंजूरी नियम कानूनों को ताक पर रखकर दे दी। इसके एसडीएम पद संभालने वाली वंदना त्रिवेदी ने गाटा नंबर 18 और 19 की खतौनी में नया आदेश दिया, जो पिछले साल सितंबर में दर्ज किया गया। उन्होंने पुराना आदेश निरस्त किया था। तब भी यह मामला दबा रहा। मगर, अब हाल ही में कॉलोनाइर ने टनकपुर हाईवे की जमीन अपनी बताकर प्रशासन पर जबरन पौधरोपण कराने का आरोप लगाया तो अफसर हरकत में आ गए और सोमवार को श्मशान की जमीन पर सड़क ध्वस्त कराकर उसे मुक्त करा लिया।
जमीन की अदला-बदली का यह है नियम
राजस्व परिषद के नियमानुसार ग्राम समाज की जमीन की अदला-बदली ग्राम समाज की जमीन से ही की जा सकती है, किसी व्यक्ति की निजी जमीन से नहीं। इसलिए, जमीन की अदला-बदली के आदेश में राजस्व परिषद के नियमों का पालन नहीं किया गया और तत्कालीन एसडीएम वंदना त्रिवेदी ने इसी नियम के कारण पुराना आदेश निरस्त किया।
विज्ञापन
प्रशासन ने लगाया कब्जा मुक्ति का बोर्ड
दो दिन पहले कॉलोनाइजर ने टनकपुर हाईवे की एक अन्य जमीन पर पौधरोपण के विरोध में प्रशासन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोला तो अफसरों की नजरें भी तिरछी हो गईं। डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर एसडीएम सदर अविनाश चंद्र मौर्य ने छह जुुलाई को जेसीबी मशीन से श्मशान घाट की जमीन पर बनी सड़क खुदवाकर 320 वर्ग मीटर जमीन को कब्जामुक्त करा लिया। इसके बाद प्रशासन ने श्मशान की जमीन को कब्जा मुक्त कराने का अपना बोर्ड भी लगा दिया। बताया जाता है कि कॉलोनाइजर ने श्मशान की जमीन में भी दो प्लॉट काट रखे थे। श्मशान की जमीन कब्जा मुक्त कराने से प्रशासन चर्चा में तो आया, मगर विवादित जमीन पर कॉलोनी निर्माण कराने का नक्शा पास करने के तौर तरीके से विनियमित क्षेत्र की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
डीएम के निर्देश पर बिलगवां गांव में श्मशान के नाम दर्ज गाटा संख्या 18 की 0.032 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है। इसे अवैध रूप से एक निर्माणाधीन कॉलोनी की जमीन में मिला लिया गया था। -अविनाश चंद्र मौर्य, एसडीएम सदर
विज्ञापन
शहर निवासी एक कॉलोनाइजर ने कुछ बड़े लोगों के साथ साझेदारी में प्रापर्टी का काम शुरू किया था। आठ साल पहले कॉलोनाइजर ने शहर से सटे गांव बिलगवां में प्रधान और गांव वालों से प्राइवेट कॉलोनी बनाने के लिए जमीन खरीदी थी। मगर, जमीन के निकट श्मशान घाट की 320 वर्ग मीटर जमीन थी। पड़ोस में श्मशान होने की वजह से कॉलोनाइजर को जल्द ही अंदाज हो गया कि अगर उसने कॉलोनी बनाकर खड़ी भी कर दी तो कोई भी ग्राहक उसमें से मकान या प्लॉट नहीं खरीदेगा। इसलिए, कॉलोनाइजर ने श्मशान की जमीन कॉलोनी में मिलाने की तरकीब निकाल ली। कॉलोनाइजर ने कुछ ग्रामीणों के सहयोग से श्मशान की जमीन लेकर बदले में अपनी जमीन देने का प्रस्ताव बनवाकर राजस्व विभाग को भेजा। इसकी वजह यह बताई गई कि श्मशान जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। राजस्व कर्मियों ने संस्तुति कर फाइल एसडीएम को भेज दी। तत्कालीन एसडीएम प्रेमप्रकाश पाल ने फरवरी 2012 को जमीन की अदला-बदली की मंजूरी नियम कानूनों को ताक पर रखकर दे दी। इसके एसडीएम पद संभालने वाली वंदना त्रिवेदी ने गाटा नंबर 18 और 19 की खतौनी में नया आदेश दिया, जो पिछले साल सितंबर में दर्ज किया गया। उन्होंने पुराना आदेश निरस्त किया था। तब भी यह मामला दबा रहा। मगर, अब हाल ही में कॉलोनाइर ने टनकपुर हाईवे की जमीन अपनी बताकर प्रशासन पर जबरन पौधरोपण कराने का आरोप लगाया तो अफसर हरकत में आ गए और सोमवार को श्मशान की जमीन पर सड़क ध्वस्त कराकर उसे मुक्त करा लिया।
विज्ञापन
जमीन की अदला-बदली का यह है नियम
राजस्व परिषद के नियमानुसार ग्राम समाज की जमीन की अदला-बदली ग्राम समाज की जमीन से ही की जा सकती है, किसी व्यक्ति की निजी जमीन से नहीं। इसलिए, जमीन की अदला-बदली के आदेश में राजस्व परिषद के नियमों का पालन नहीं किया गया और तत्कालीन एसडीएम वंदना त्रिवेदी ने इसी नियम के कारण पुराना आदेश निरस्त किया।
विज्ञापन
प्रशासन ने लगाया कब्जा मुक्ति का बोर्ड
दो दिन पहले कॉलोनाइजर ने टनकपुर हाईवे की एक अन्य जमीन पर पौधरोपण के विरोध में प्रशासन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोला तो अफसरों की नजरें भी तिरछी हो गईं। डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर एसडीएम सदर अविनाश चंद्र मौर्य ने छह जुुलाई को जेसीबी मशीन से श्मशान घाट की जमीन पर बनी सड़क खुदवाकर 320 वर्ग मीटर जमीन को कब्जामुक्त करा लिया। इसके बाद प्रशासन ने श्मशान की जमीन को कब्जा मुक्त कराने का अपना बोर्ड भी लगा दिया। बताया जाता है कि कॉलोनाइजर ने श्मशान की जमीन में भी दो प्लॉट काट रखे थे। श्मशान की जमीन कब्जा मुक्त कराने से प्रशासन चर्चा में तो आया, मगर विवादित जमीन पर कॉलोनी निर्माण कराने का नक्शा पास करने के तौर तरीके से विनियमित क्षेत्र की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
डीएम के निर्देश पर बिलगवां गांव में श्मशान के नाम दर्ज गाटा संख्या 18 की 0.032 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है। इसे अवैध रूप से एक निर्माणाधीन कॉलोनी की जमीन में मिला लिया गया था। -अविनाश चंद्र मौर्य, एसडीएम सदर