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Pilibhit News: खकरा नदी किनारे अवैध निर्माण व कब्जे, पूरी कॉलोनी आई जांच के दायरे में
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2015 में सरकारी जमीन को लेकर दर्ज हुई थी रिपोर्ट, कई पहलुओं पर प्रशासन की टीम करेगी जांच
पीलीभीत। नकटादाना चौराहे के पास खकरा नदी किनारे निर्माणाधीन मकान पर बुलडोजर चलने के बाद अब पूरी कॉलोनी में नदी किनारे की जमीन पर किए गए कब्जे व अवैध निर्माण प्रशासन की जांच के दायरे में आ गया है।
कॉलोनाइजर के पुराने राजस्व रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2015 में सरकारी जमीन से जुड़े मामले में रिपोर्ट दर्ज होने और भू-माफिया की कार्रवाई हो चुकी है। अब प्रशासन यह जांच करेगा कि यहां हुए निर्माण के दौरान कहीं सरकारी या प्रतिबंधित भूमि का इस्तेमाल तो नहीं हुआ और खकरा नदी की सीमा में किसी तरह का निर्माण तो नहीं कराया गया।
वर्ष 2015 में तत्कालीन लेखपाल मदनलाल की ओर से आठ दिसंबर को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में गाटा संख्या 758 को राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज होने का उल्लेख किया गया था। इसी प्रकरण में भू-माफिया की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। अब करीब 11 साल बाद केजीएन-2 में नदी किनारे निर्माण का विवाद सामने आने के बाद पुराना रिकॉर्ड भी प्रशासन की पड़ताल का अहम हिस्सा बन गया है। जांच में यह देखा जाएगा कि उस समय सरकारी भूमि के रूप में दर्ज जमीन की वर्तमान स्थिति क्या है और उसके आसपास बाद के वर्षों में किस स्तर पर निर्माण हुआ। संवाद
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कॉलोनी के नदी किनारे वाले हिस्से की होगी पैमाइश
शुक्रवार को जियाउद्दीन का निर्माणाधीन मकान गिराए जाने के बाद खकरा नदी के किनारे बने अन्य निर्माणों पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी से करीब चार मीटर की दूरी पर आठ से दस फुट ऊंचा स्ट्रक्चर, करीब 10 मीटर की दूरी पर सड़क और नदी से सटाकर दीवार बनाई गई है। इसके अलावा करीब 28 मीटर की दूरी पर मकान भी बने हुए हैं। हालांकि इन निर्माणों की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेख और मौके की पैमाइश के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन की जांच में नदी की वास्तविक सीमा, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि और मौके पर हुए निर्माण का मिलान किया जाएगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि कौन से निर्माण स्वीकृत क्षेत्र में हैं और कौन नदी की सीमा व किसी अन्य प्रतिबंधित क्षेत्र में आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केजीएन-2 में पूर्व में कुछ जमीन को चिह्नित कर बोर्ड लगाए गए थे। इसके बावजूद वहां प्लाॅटिंग और निर्माण बढ़ता गया।
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कॉलोनाइजर से मांगे गए अभिलेख
कॉलोनाइजर को नोटिस जारी कर जमीन और प्लाटिंग से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें भूमि के स्वामित्व, प्लाटिंग और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। प्रशासन का फोकस खास तौर पर खकरा नदी के किनारे वाली भूमि पर है। जांच के दौरान यदि नदी की सीमा व सरकारी भूमि पर अवैध प्लाॅटिंग या निर्माण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी।
- प्यारेलाल मौर्या, सिटी मजिस्ट्रेट
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पीलीभीत। नकटादाना चौराहे के पास खकरा नदी किनारे निर्माणाधीन मकान पर बुलडोजर चलने के बाद अब पूरी कॉलोनी में नदी किनारे की जमीन पर किए गए कब्जे व अवैध निर्माण प्रशासन की जांच के दायरे में आ गया है।
कॉलोनाइजर के पुराने राजस्व रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2015 में सरकारी जमीन से जुड़े मामले में रिपोर्ट दर्ज होने और भू-माफिया की कार्रवाई हो चुकी है। अब प्रशासन यह जांच करेगा कि यहां हुए निर्माण के दौरान कहीं सरकारी या प्रतिबंधित भूमि का इस्तेमाल तो नहीं हुआ और खकरा नदी की सीमा में किसी तरह का निर्माण तो नहीं कराया गया।
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वर्ष 2015 में तत्कालीन लेखपाल मदनलाल की ओर से आठ दिसंबर को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में गाटा संख्या 758 को राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज होने का उल्लेख किया गया था। इसी प्रकरण में भू-माफिया की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। अब करीब 11 साल बाद केजीएन-2 में नदी किनारे निर्माण का विवाद सामने आने के बाद पुराना रिकॉर्ड भी प्रशासन की पड़ताल का अहम हिस्सा बन गया है। जांच में यह देखा जाएगा कि उस समय सरकारी भूमि के रूप में दर्ज जमीन की वर्तमान स्थिति क्या है और उसके आसपास बाद के वर्षों में किस स्तर पर निर्माण हुआ। संवाद
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कॉलोनी के नदी किनारे वाले हिस्से की होगी पैमाइश
शुक्रवार को जियाउद्दीन का निर्माणाधीन मकान गिराए जाने के बाद खकरा नदी के किनारे बने अन्य निर्माणों पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी से करीब चार मीटर की दूरी पर आठ से दस फुट ऊंचा स्ट्रक्चर, करीब 10 मीटर की दूरी पर सड़क और नदी से सटाकर दीवार बनाई गई है। इसके अलावा करीब 28 मीटर की दूरी पर मकान भी बने हुए हैं। हालांकि इन निर्माणों की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेख और मौके की पैमाइश के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन की जांच में नदी की वास्तविक सीमा, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि और मौके पर हुए निर्माण का मिलान किया जाएगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि कौन से निर्माण स्वीकृत क्षेत्र में हैं और कौन नदी की सीमा व किसी अन्य प्रतिबंधित क्षेत्र में आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केजीएन-2 में पूर्व में कुछ जमीन को चिह्नित कर बोर्ड लगाए गए थे। इसके बावजूद वहां प्लाॅटिंग और निर्माण बढ़ता गया।
कॉलोनाइजर से मांगे गए अभिलेख
कॉलोनाइजर को नोटिस जारी कर जमीन और प्लाटिंग से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें भूमि के स्वामित्व, प्लाटिंग और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। प्रशासन का फोकस खास तौर पर खकरा नदी के किनारे वाली भूमि पर है। जांच के दौरान यदि नदी की सीमा व सरकारी भूमि पर अवैध प्लाॅटिंग या निर्माण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी।
- प्यारेलाल मौर्या, सिटी मजिस्ट्रेट