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संख्या बढ़ी तो आबादी क्षेत्र में भी बढ़ गई बाघों की सक्रियता
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मझोला क्षेत्र में मार्ग पर घूम रहा बाघ। फाइल फोटो
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। इन दिनों जिले के अलग-अगल इलाकों में करीब पांच बाघ जंगल से बाहर चहलकदमी करते देखे जा रहे हैं। इनमें अमरिया क्षेत्र में कई बार बाघ देखा गया है। यहां परवीन नदी क्षेत्र में डेरा जमाए बाघ 20 किलोमीटर के दायरे में चहलकदमी कर रहा है। वहीं, वन विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
जंगल का अनुकूल वातावरण बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के लिए मुफीद बना हुआ है। पिछले करीब एक महीने से अमरिया, मझोला, माधोटांडा, शाहगढ़ और हरीपुर रेंज के बाहर आबादी वाले इलाके में बाघ देखे गए हैं। सभी जगह अलग-अलग बाघों के होने की बात कही जा रही है। पांच अलग-अलग इलाकों में पांच बाघ होने की बात कही जा रही है। जिससे ग्रामीण खासी दहशत में हैं।
कैमरे लगाकर भूल गया विभाग
अमरिया तहसील क्षेत्र में एक माह पूर्व बाघ की चहलकदमी शुरू हुई। परवीन नदी क्षेत्र से निकलकर बाघ भगतनिया फार्म, देवहा नदी, ढाकी फार्म, सूरजपुर, शुक्ला फार्म, भरापेड़ा क्षेत्र में देखा गया। दस किलोमीटर के दायरे में घूम रहे बाघ ने एक माह के भीतर करीब दस आवारा मवेशियों का भी शिकार किया। किसानों का कहना है कि बाघ लगातार खेतों में जा रहा है। इससे न सिर्फ किसान भयभीत हैं, बल्कि स्कूली बच्चे और ग्रामीणों को भी खतरा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बाहर पिंजड़ा लगाया जाए।
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खन्नौत नदी बनी शरणस्थली
कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव शाहगढ़ में खन्नौत नदी है। दस दिन पूर्व माला रेंज के जंगल से बाहर निकलकर एक बाघ शाहगढ़ क्षेत्र में पहुंच गया। सिसईयां, लोकाई फार्म, सोनी फार्म क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी देखी गई। किसानों का कहना है कि बाघ खन्नौत नदी क्षेत्र में ही डेरा जमाए हुए हैं, लेकिन विभाग का कहना है कि बाघ जंगल की ओर लौट गया है।
वनकर्मी लगातार नजर रखे हुए हैं। कभी कभार बाघ जंगल से बाहर आ जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद खुद ही लौट जाते हैं। हालांकि लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर
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जंगल का अनुकूल वातावरण बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के लिए मुफीद बना हुआ है। पिछले करीब एक महीने से अमरिया, मझोला, माधोटांडा, शाहगढ़ और हरीपुर रेंज के बाहर आबादी वाले इलाके में बाघ देखे गए हैं। सभी जगह अलग-अलग बाघों के होने की बात कही जा रही है। पांच अलग-अलग इलाकों में पांच बाघ होने की बात कही जा रही है। जिससे ग्रामीण खासी दहशत में हैं।
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कैमरे लगाकर भूल गया विभाग
अमरिया तहसील क्षेत्र में एक माह पूर्व बाघ की चहलकदमी शुरू हुई। परवीन नदी क्षेत्र से निकलकर बाघ भगतनिया फार्म, देवहा नदी, ढाकी फार्म, सूरजपुर, शुक्ला फार्म, भरापेड़ा क्षेत्र में देखा गया। दस किलोमीटर के दायरे में घूम रहे बाघ ने एक माह के भीतर करीब दस आवारा मवेशियों का भी शिकार किया। किसानों का कहना है कि बाघ लगातार खेतों में जा रहा है। इससे न सिर्फ किसान भयभीत हैं, बल्कि स्कूली बच्चे और ग्रामीणों को भी खतरा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बाहर पिंजड़ा लगाया जाए।
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खन्नौत नदी बनी शरणस्थली
कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव शाहगढ़ में खन्नौत नदी है। दस दिन पूर्व माला रेंज के जंगल से बाहर निकलकर एक बाघ शाहगढ़ क्षेत्र में पहुंच गया। सिसईयां, लोकाई फार्म, सोनी फार्म क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी देखी गई। किसानों का कहना है कि बाघ खन्नौत नदी क्षेत्र में ही डेरा जमाए हुए हैं, लेकिन विभाग का कहना है कि बाघ जंगल की ओर लौट गया है।
वनकर्मी लगातार नजर रखे हुए हैं। कभी कभार बाघ जंगल से बाहर आ जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद खुद ही लौट जाते हैं। हालांकि लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर