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अगर मेरी मां हिम्मत हार जाती तो मैं यहां नहीं होती- साधना चौहान

Sun, 08 May 2022 11:22 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 11:22 PM IST
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If my mother had lost her courage, I would not have been here: Sadhna Chauhan
साधना चौहान अपनी मां के साथ लता चौहान के साथ। संवाद - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। वाणिज्य कर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर साधना चौहान के लिए मदर्स डे बेहद अहम है। उनका कहना है कि अगर मां हिम्मत हार जातीं तो मैं यहां नहीं होती।
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साधना ने बताया कि बात वर्ष 2001 से शुरू होती है जब पापा शिवराज सिंह चौहान ने मुझे अफसर बनाने के लिए दिल्ली की एक कोचिंग में दाखिला दिलाया। पापा उस वक्त नजीबाबाद नगर पालिका में फूड एंड सेनेटरी इंस्पेक्टर हुआ करते थे। उनका सपना था कि मैं अफसर बनूं लेकिन 12 जून 2004 अचानक उनका स्वर्गवास हो गया।
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अंतिम मुलाकात में पापा ने जनरल नॉलिज की बुक देकर कहा था- मेरी बेटी कामयाब होगी। तब मैंने पापा से कहा- आप ठीक होकर आइए, मैं आपको अफसर बनकर ही दिखाऊंगी। मैंने पापा को दिए वचन के अनुसार मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ी। पीसीएस के लिए कई बार परीक्षा दी। कभी फेल हुई तो कभी साक्षात्कार में रह गई। इस दौरान मेरी मां ने मेरा हौसला बढ़ाया। अगर मेरी मां हिम्मत हार जातीं तो मैं यहां नहीं होती क्योंकि पापा के निधन के बाद हमारा परिवार हल्द्वानी शिफ्ट हो गया था। मैंने परिवार को चलाने के लिए ट्यूशन पढ़ाने के साथ निजी स्कूल में टीचिंग शुरू की।
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हल्द्वानी में उन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी किताबें नहीं मिला करती थीं। मेरी मां लता चौहान जो ग्रहणी हैं। मैं और मेरी मां दोनों किताबें लेने ट्रेन से प्रयागराज जाते थे। संघर्ष के दिनों के वे पल मुझे आज भी याद हैं जब मैं और मेरी मां बरेली से शाम में मुगलसराय एक्सप्रेस ट्रेन पकड़कर सुबह-सुबह प्रयागराज पहुंच जाते थे फिर विश्वविद्यालय मार्ग में चाय की दुकान के बाहर बैठकर किताबों की दुकानें खुलने का इंतजार करते थे। जब दुकानें खुलती तब किताबें खरीद कर वापस शाम की ट्रेन पकड़ते थे।

शादी के लिए पड़ा दबाव पर मां ने किया मेरा साथ
साधना चौहान ने बताया कि कई मौके ऐसे आए जब मैं परीक्षा में फेल हुई और रिश्तेदार, समाज के लोगों ने मां पर शादी के लिए दबाव बनाया। कुछ रिश्तेदार कहते थे कि बेटी है शादी करो जब बार-बार टेस्ट देने पर नहीं सफल हो रही है तो कब तक इंतजार करोगे लेकिन मां ने हमेशा यही कहा- मुझे अपनी बेटी पर भरोसा है। वह एक न एक दिन सफल अवश्य होगी।
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