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Pilibhit News: संरक्षण पर हो अमल तो आसानी से बढ़ेगा कछुओं का कुनबा

Thu, 23 May 2024 03:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2024 03:40 AM IST
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If conservation is implemented, the population of turtles will increase easily.
गोमती उद्गम स्थल की झील में मौजूद कछुए। स्रोत - गोमती ट्रस्ट
कलीनगर। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के अलावा कई प्रकार के जलचर भी मौजूद हैं। इनमें कछुए भी शामिल हैं। संरक्षण को लेकर सार्थक प्रयास हों तो कछुओं का कुनबा बढ़ सकता है।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व और उससे सटे कई ऐसे इलाके हैं जहां नदी, नहरों के जाल के साथ तमाम जलाशय हैं। यहां नदियों और तालाबों में काफी संख्या में कछुए पाए जाते हैं। कछुओं का कुनबा बढ़ाने की दिशा में कई बार प्रयास हुए, लेकिन मूर्त रूप नहीं ले सके।
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इधर संरक्षण पर काम न होने से शिकारी हावी रहे। पीटीआर में कछुओं की तस्करी की कई घटनाएं भी सामने आती रहीं। इधर सप्ताह भर पूर्व कछुआ संरक्षण संस्थान की टीम ने पीटीआर के डीएफओ मनीष सिंह के साथ जनपद के कई इलाकों का भ्रमण कर कछुआ संरक्षण केंद्र को लेकर मंथन किया था। अब माला नदी के क्षेत्र को मुफीद मानकर केंद्र को विकसित करने पर जोर दिया गया है।
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पीटीआर में नौ तो गोमती की झीलों में पाई जाती हैं 12 प्रजातियां
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में कछुओं की नौ प्रजाति पाई जाती हैं। जबकि गोमती उद्गम स्थल की झीलों में 12 प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। इसमें इंडियन टेंट, साफ्टशेल, इंडियन ब्लैक, आइड, हिल, पांड, फ्लेपशेल, एलांगे टर्टल शामिल हैं।
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यहां है कछुओं का मनपसंद वास
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का वन क्षेत्र कछुओं को हर तरह का आवास प्रदान करता है। इसमें उथले पानी वाली, गहरी, दलदली झीलें और निरंतर बहने वाली नदियां शामिल हैं। इसके अलावा गोमती उद्गम स्थल पर भी काफी संख्या में कछुओं का कुनबा प्रवास करता है।
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धरपकड़ के दौरान बरामद हुए थे 70 कछुए
पूर्व के वर्षों में पीटीआर की महोफ रेंज में गश्त के दौरान वनकर्मियों ने दो कटटों से करीब 70 कछुए बरामद किए थे। तस्कर बाइक छोड़कर मौके से फरार हो गए थे। इसके बाद कछुए के संरक्षण को लेकर सवाल खड़े हुए थे।

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संरक्षण के लिए यह है जरूरी
- कछुआ की मौजूदगी वाले स्थानों पर उनके साथ छेड़छाड़ और उनको कुछ खिलाने पर प्रतिबंध लगे
- क्षेत्र में प्लास्टिक मैटीरियल जैसे पॉलिथीन, बोतल आदि फेंकने पर भी प्रतिबंध रहे।
- झील अथवा नदी में कूड़ा-कचरा फेंकने पर भी पूरी तरह प्रतिबंध रहे।
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कछुआ संरक्षण केंद्र को लेकर प्रयास जारी हैं। पूर्व में माला नदी को मुफीद मानते हुए संरक्षण केंद्र विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसको लेकर पत्राचार भी किए गए हैं।
- मनीष सिंह डीएफओ पीटीआर
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