{"_id":"5960db2f4f1c1b02288b45e5","slug":"how-to-prevent-soil-clogging-ramanagara-buziya-cut","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिट्टी की ठोकरें कैसे रोकेंगी रमनगरा बुझिया का कटान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिट्टी की ठोकरें कैसे रोकेंगी रमनगरा बुझिया का कटान
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Sat, 08 Jul 2017 07:20 PM IST
विज्ञापन
श्ाारदा नदी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्षों पुराने मिट्टी से बने स्परों से रमनगरा बुझिया का कटान कैसे रुक सकेगा? अब स्थिति यह आ चुकी है कि शारदा नदी की धार का पानी गांव की हद से टकराने लगा है। हालांकि बिजौरी खुर्दकला का जंगल कुछ हद तक कटान रोकने में कामयाब हो सकता हैं। वहीं नोमेंस लैंड पर भी कटान की स्थिति पैदा होने की संभावना बनती जा रही है।
शारदा नदी इस बार फिर से रमनगरा बुझिया की ओर अपना निशाना साध रही है। ग्रामीण यहां पर पिछले वर्षों में बने मिट्टी के बने जर्जर स्पर बाढ़ से पहले ही नदी के गर्भ में समाने की संभावना जता रहे हैं। नदी ने यहां पर धीमी गति कटान भी शुरू कर दिया है। रमनगरा बुझिया के डाउनस्ट्रीम में दांए किनारे पर ही बिजौरी खुर्दकला का जंगल है जिसका नदी पिछले तीन वर्षों से सफाया करती आ रही है। फिर भी यह जंगल इस इलाके के लिये रामबाण साबित हो रहा है। इसी कारण नदी यहां लूप बनाकर जंगल के अपस्ट्रीम में कटान करती हुई कृषि फसलों की ओर बढ़ रही है। यहां किसानों ने यह सोच कर धान के अलावा गन्ना आदि की फसलें लगा दी कि सिंचाई विभाग ठोकरें बना देगा।
नेपाल की वमनी नदी जिसकी पानी की धार काफी तेज होती हैं उसकी टेल भी इसी इलाके में शारदा में गिरती है। ऐसे में अब दांए किनारे पर कटान होना तय माना जा रहा है। हालांकि अभी भी बाढ़ खंड इस इलाके में बांस-बल्ली व कटर बनाकर अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्य करवा सकता है।
विज्ञापन
वहीं इस बार नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने पर शारदा व जगबूड़ा नदी के कटान की गति भी बाढ़ के समय कुछ गुल खिला सकती है। क्योंकि सीमा से सटे इलाके में मात्र सीसी बैग व जियो बैग का बांध बनाया गया है और उसके आगे एक फर्लांग दूरी पर जियो ट्यूब का बांध बनाया गया है। जियो ट्यूब का बांध तो काफी मजबूत है, लेकिन नोमैंस लैंड से सटे इलाके में जो कार्य कराया गया है वह अधिक मजबूत न होने के चलते दोनों नदियों की बाढ़ ठोकरें कितनी झेल पाएगी, यह समय के गर्भ में है। पूर्व प्रधान रामदरस व बिल्लू राजभर बताते हैं कि उम्मीद थी कि पिछले वर्ष के कटान के बाद सिंचाई विभाग कुछ काम कराएगा, लेकिन यहां कोई काम नहीं कराया गया। पिछली साल की तरह इस बार नदी कृषि फसलों को बर्बाद कर देगी।
विज्ञापन
शारदा नदी इस बार फिर से रमनगरा बुझिया की ओर अपना निशाना साध रही है। ग्रामीण यहां पर पिछले वर्षों में बने मिट्टी के बने जर्जर स्पर बाढ़ से पहले ही नदी के गर्भ में समाने की संभावना जता रहे हैं। नदी ने यहां पर धीमी गति कटान भी शुरू कर दिया है। रमनगरा बुझिया के डाउनस्ट्रीम में दांए किनारे पर ही बिजौरी खुर्दकला का जंगल है जिसका नदी पिछले तीन वर्षों से सफाया करती आ रही है। फिर भी यह जंगल इस इलाके के लिये रामबाण साबित हो रहा है। इसी कारण नदी यहां लूप बनाकर जंगल के अपस्ट्रीम में कटान करती हुई कृषि फसलों की ओर बढ़ रही है। यहां किसानों ने यह सोच कर धान के अलावा गन्ना आदि की फसलें लगा दी कि सिंचाई विभाग ठोकरें बना देगा।
विज्ञापन
नेपाल की वमनी नदी जिसकी पानी की धार काफी तेज होती हैं उसकी टेल भी इसी इलाके में शारदा में गिरती है। ऐसे में अब दांए किनारे पर कटान होना तय माना जा रहा है। हालांकि अभी भी बाढ़ खंड इस इलाके में बांस-बल्ली व कटर बनाकर अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्य करवा सकता है।
विज्ञापन
वहीं इस बार नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने पर शारदा व जगबूड़ा नदी के कटान की गति भी बाढ़ के समय कुछ गुल खिला सकती है। क्योंकि सीमा से सटे इलाके में मात्र सीसी बैग व जियो बैग का बांध बनाया गया है और उसके आगे एक फर्लांग दूरी पर जियो ट्यूब का बांध बनाया गया है। जियो ट्यूब का बांध तो काफी मजबूत है, लेकिन नोमैंस लैंड से सटे इलाके में जो कार्य कराया गया है वह अधिक मजबूत न होने के चलते दोनों नदियों की बाढ़ ठोकरें कितनी झेल पाएगी, यह समय के गर्भ में है। पूर्व प्रधान रामदरस व बिल्लू राजभर बताते हैं कि उम्मीद थी कि पिछले वर्ष के कटान के बाद सिंचाई विभाग कुछ काम कराएगा, लेकिन यहां कोई काम नहीं कराया गया। पिछली साल की तरह इस बार नदी कृषि फसलों को बर्बाद कर देगी।