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शारदा डैम की तलहटी में बसे बंगाली परिवारों को पुनर्वास के लिए जगी उम्मीद
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शारदा की तलहटी में बसे बंगाली समुदाय के लोग। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ में बांग्लादेश से आए विस्थापित हिंदू परिवारों को पुनर्वास प्रमाण पत्र सौंपा। यह ऐसे परिवार हैं, जो बांग्लादेश से आए थे। इस तरह के परिवार जिले में शारदा डैम की तलहटी पर भी बसे हैं।
इन परिवारों को 1965-1971 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पहल पर बसाया गया था लेकिन जो जमीनें इन्हें पट्टे पर मिली थीं, उसे बाद में वन भूमि में दर्ज कर दिया गया। जिस जमीन पर ये लोग काबिज हैं, अब उसी जमीन के मालिकाना हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। लखनऊ में मुख्यमंत्री की पहल पर जो पुनर्वास प्रमाण पत्र दिए गए, उससे इनकी उम्मीदों को बल मिला है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र में शारदा सागर डैम की तलहटी में वर्ष 1965 से 1971 तक पूर्वी पाकिस्तान से आए परिवारों में 27 परिवार नौजल्हा नंबर एक में रहते हैं। करीब 80 परिवार नौजल्हा नंबर दो में रहते हैं। 170 परिवार गभिया सहराई में और 175 परिवार रमनगरा व ढकिया तालुके महाराजपुर में रहते हैं। बाद में मध्य प्रदेश उड़ीसा व महाराष्ट्र से भी करीब ढाई सौ विस्थापित परिवार भी यहां आकर बस गए थे। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पहल पर तत्कालीन राज्य सरकार ने सभी विस्थापित परिवारों के लिए 5-5 एकड़ के आवासीय पट्टे आवंटित किए थे। वर्ष 1999 में वन विभाग ने पट्टे पर मिली इस जमीन को वन भूमि के रूप में दर्ज कर लिया। इसके चलते बंगाली परिवार तभी से अपनी ही जमीन पर अपने लिए हक मांग रहे हैं। तमाम परिवार ऐसे हैं, जिनके माता-पिता के नाम मतदाता सूची में शामिल हैं लेकिन युवा हुए बेटे-बेटियों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जा रहे हैं। यह मुद्दा लंबे समय से उठ रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह मुद्दा उठा था। चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पूरनपुर आए थे। चुनावी जनसभा में उन्होंने बंगाली समाज की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था। इसलिए यह परिवार उम्मीद लगाए हैं।
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शरणार्थी बनकर आए परिवारों के विषय में शासन की ओर से जो निर्देश आएंगे। उसके आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
पुलकित खरे, जिलाधिकारी
प्रदेश के तमाम जिलों में बसे बंगाली विस्थापित परिवारों की तरह ही जनपद में भी सैकड़ों परिवार हैं। उन्हें उस जमीन का मालिकाना हक चाहिए, जिस पर वे काबिज हैं। भाजपा सरकार से उम्मीदें हैं।
-शंकर चंद्र राय, ग्राम प्रधान/जिला अध्यक्ष बंगाली एकता मंच मठिया लालपुर
लंबे समय से बंगाली विस्थापित परिवार मालिकाना हक के लिए परेशान हैं। प्रदेश सरकार ने विस्थापित परिवारों को पुनर्वास योजना के तहत लाभ दिया। इससे उम्मीद जगी है। हम लोगों को भी मालिकाना हक मिलेगा। -विवेकानंद प्रधान नगरिया खुर्द कला
कब किसने दिया आश्वासन
19 फरवरी को भाजपा विधायक बाबूराम पासवान के समर्थन में रैली करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंगाली समुदाय के लोगों को नागरिकता और मालिकाना हक देने के लिए प्रयास करने की बात कही थी। इसके लिए समिति का गठन करने का भी मंच से घोषणा की थी। विधानसभा चुनाव के दौरान फरवरी में ही सांसद शांतनु ठाकुर व केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल आए थे। पुरैना, गड़रिया सहराई गांव का दौरा कर बंगाली समुदाय के लोगों से भाजपा का समर्थन मांगा था। उनकी समस्याओं को जल्द ही दूर कराने का भी आश्वासन दिया था।
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इन परिवारों को 1965-1971 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पहल पर बसाया गया था लेकिन जो जमीनें इन्हें पट्टे पर मिली थीं, उसे बाद में वन भूमि में दर्ज कर दिया गया। जिस जमीन पर ये लोग काबिज हैं, अब उसी जमीन के मालिकाना हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। लखनऊ में मुख्यमंत्री की पहल पर जो पुनर्वास प्रमाण पत्र दिए गए, उससे इनकी उम्मीदों को बल मिला है।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र में शारदा सागर डैम की तलहटी में वर्ष 1965 से 1971 तक पूर्वी पाकिस्तान से आए परिवारों में 27 परिवार नौजल्हा नंबर एक में रहते हैं। करीब 80 परिवार नौजल्हा नंबर दो में रहते हैं। 170 परिवार गभिया सहराई में और 175 परिवार रमनगरा व ढकिया तालुके महाराजपुर में रहते हैं। बाद में मध्य प्रदेश उड़ीसा व महाराष्ट्र से भी करीब ढाई सौ विस्थापित परिवार भी यहां आकर बस गए थे। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पहल पर तत्कालीन राज्य सरकार ने सभी विस्थापित परिवारों के लिए 5-5 एकड़ के आवासीय पट्टे आवंटित किए थे। वर्ष 1999 में वन विभाग ने पट्टे पर मिली इस जमीन को वन भूमि के रूप में दर्ज कर लिया। इसके चलते बंगाली परिवार तभी से अपनी ही जमीन पर अपने लिए हक मांग रहे हैं। तमाम परिवार ऐसे हैं, जिनके माता-पिता के नाम मतदाता सूची में शामिल हैं लेकिन युवा हुए बेटे-बेटियों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जा रहे हैं। यह मुद्दा लंबे समय से उठ रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह मुद्दा उठा था। चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पूरनपुर आए थे। चुनावी जनसभा में उन्होंने बंगाली समाज की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था। इसलिए यह परिवार उम्मीद लगाए हैं।
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शरणार्थी बनकर आए परिवारों के विषय में शासन की ओर से जो निर्देश आएंगे। उसके आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
पुलकित खरे, जिलाधिकारी
प्रदेश के तमाम जिलों में बसे बंगाली विस्थापित परिवारों की तरह ही जनपद में भी सैकड़ों परिवार हैं। उन्हें उस जमीन का मालिकाना हक चाहिए, जिस पर वे काबिज हैं। भाजपा सरकार से उम्मीदें हैं।
-शंकर चंद्र राय, ग्राम प्रधान/जिला अध्यक्ष बंगाली एकता मंच मठिया लालपुर
लंबे समय से बंगाली विस्थापित परिवार मालिकाना हक के लिए परेशान हैं। प्रदेश सरकार ने विस्थापित परिवारों को पुनर्वास योजना के तहत लाभ दिया। इससे उम्मीद जगी है। हम लोगों को भी मालिकाना हक मिलेगा। -विवेकानंद प्रधान नगरिया खुर्द कला
कब किसने दिया आश्वासन
19 फरवरी को भाजपा विधायक बाबूराम पासवान के समर्थन में रैली करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंगाली समुदाय के लोगों को नागरिकता और मालिकाना हक देने के लिए प्रयास करने की बात कही थी। इसके लिए समिति का गठन करने का भी मंच से घोषणा की थी। विधानसभा चुनाव के दौरान फरवरी में ही सांसद शांतनु ठाकुर व केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल आए थे। पुरैना, गड़रिया सहराई गांव का दौरा कर बंगाली समुदाय के लोगों से भाजपा का समर्थन मांगा था। उनकी समस्याओं को जल्द ही दूर कराने का भी आश्वासन दिया था।