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Pilibhit News: आयुष्मान कार्ड योजना का दिल के मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ
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पीलीभीत। आयुष्मान योजना के तहत गरीबों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने का दावा जनपद में पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। योजना के तहत जिले के 12 निजी अस्पताल अधिकृत हैं। इनमें से किसी में भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में ह्दय की बीमारी से पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए या तो बरेली जाना पड़ता है या फिर लखनऊ, दिल्ली की दौड़ लगानी होती है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत किसी भी बीमारी का पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज तय अस्पतालों में कराया जा सकता है। योजना के तहत जिले के 12 निजी अस्पताल अधिकृत किए गए हैं। इन अस्पतालों में कोई भी आयुष्मान का लाभार्थी गंभीर से गंभीर बीमारियों का मुफ्त में इलाज करा सकता है, लेकिन ह्दय रोगियों का इलाज संभव नहीं हो पा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनपद में अब तक 57 हजार 833 मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज हो चुका है, लेकिन इनमें एक भी मरीज ह्दय रोग का शामिल नहीं है। वजह यह है कि अधिकृत अस्पतालों में हार्ट के डॉक्टर नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज में दो दशकों से एक भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में ह्दय के गंभीर मरीजों को आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि जल्द ही उन अस्पतालों को भी जोड़ा जाएगा जहां ह्दय रोग विशेषज्ञ हैं।
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यह हैंं अधिकृत अस्पताल
भारत नर्सिंग होम, सचान नर्सिंग होम, कौशल्या देवी, सोडी आई हॉस्पिटल, नीदान हॉस्पिटल, शारदा हॉस्पिटल, सिद्धी आई हॉस्पिटल, मैकूलाल हॉस्पिटल, लाइन लाइफ बीसलपुर, मेडीकेयर हॉस्पिटल पूरनपुर आयुष्मान योजना के तहत अधिकृत हैं। इसमें किसी भी अस्पताल में भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं।
सर्दियों में बढ़ जाते हैं मामले
सर्दियों में सबसे ज्यादा हार्टअटैक के मामले सामने आते हैं। सामान्य बीमारियों का इलाज तो लोग करा लेते हैं, लेकिन ह्दय की बीमारी का इलाज काफी महंगा होता है। मेडिकल कॉलेज में आने वाले हार्ट के मरीजों को फिजिशियन देखते हैं। ईसीजी कराने के बाद उन्हें आगे इलाज की सलाह दे दी जाती है।
एसएस हॉस्पिटल को आयुष्मान कार्ड योजना से जोड़ा जा रहा है। ताकि हार्ट के मरीजों का जनपद में इलाज संभव हो सके। जनपद में अब तक 57 हजार 833 मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत कराया जा चुका है। - डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ
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प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत किसी भी बीमारी का पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज तय अस्पतालों में कराया जा सकता है। योजना के तहत जिले के 12 निजी अस्पताल अधिकृत किए गए हैं। इन अस्पतालों में कोई भी आयुष्मान का लाभार्थी गंभीर से गंभीर बीमारियों का मुफ्त में इलाज करा सकता है, लेकिन ह्दय रोगियों का इलाज संभव नहीं हो पा रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनपद में अब तक 57 हजार 833 मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज हो चुका है, लेकिन इनमें एक भी मरीज ह्दय रोग का शामिल नहीं है। वजह यह है कि अधिकृत अस्पतालों में हार्ट के डॉक्टर नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज में दो दशकों से एक भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में ह्दय के गंभीर मरीजों को आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि जल्द ही उन अस्पतालों को भी जोड़ा जाएगा जहां ह्दय रोग विशेषज्ञ हैं।
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यह हैंं अधिकृत अस्पताल
भारत नर्सिंग होम, सचान नर्सिंग होम, कौशल्या देवी, सोडी आई हॉस्पिटल, नीदान हॉस्पिटल, शारदा हॉस्पिटल, सिद्धी आई हॉस्पिटल, मैकूलाल हॉस्पिटल, लाइन लाइफ बीसलपुर, मेडीकेयर हॉस्पिटल पूरनपुर आयुष्मान योजना के तहत अधिकृत हैं। इसमें किसी भी अस्पताल में भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं।
सर्दियों में बढ़ जाते हैं मामले
सर्दियों में सबसे ज्यादा हार्टअटैक के मामले सामने आते हैं। सामान्य बीमारियों का इलाज तो लोग करा लेते हैं, लेकिन ह्दय की बीमारी का इलाज काफी महंगा होता है। मेडिकल कॉलेज में आने वाले हार्ट के मरीजों को फिजिशियन देखते हैं। ईसीजी कराने के बाद उन्हें आगे इलाज की सलाह दे दी जाती है।
एसएस हॉस्पिटल को आयुष्मान कार्ड योजना से जोड़ा जा रहा है। ताकि हार्ट के मरीजों का जनपद में इलाज संभव हो सके। जनपद में अब तक 57 हजार 833 मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत कराया जा चुका है। - डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ