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केरल और हरिद्वार मत जाइए, पीलीभीत में ही पंचकर्म कराइए

Fri, 15 Oct 2021 01:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 15 Oct 2021 01:21 AM IST
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Health
आयुर्वेदिक कॉलेज स्थित पंचकर्म विभाग - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। पंचकर्म के दौरान फाइव स्टार जैसी सुविधाएं नहीं चाहिए तो फिर केरल, हरिद्वार और दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं है। बल्कि पीलीभीत के ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक कालेज एवं चिकित्सालय में पंचकर्म की सेवाएं बेहद मामूली खर्चे पर उपलब्ध हैं।
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जी हां सिर्फ 35 रुपये खर्च करके 15 दिन तक पंचकर्म करा सकते हैं। जबकि किसी निजी चिकित्सालय में पंचकर्म के लिए परामर्श की सेवाएं भी 35 रुपये में नहीं मिल सकती हैं। कोई भी चिकित्सा पद्धति हो, आज के दौर में बेहद महंगी लेकिन ऐसे दौर में राजकीय मेडिकल कॉलेज में दवाओं के साथ अगर 35 रुपये में पंचकर्म चिकित्सा का लाभ मिल रहा तो आप चूकिए नहीं।
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अपनी पुरानी से पुरानी बीमारी के विषय में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में ओपीडी के समय में परामर्श कीजिए। चिकित्सक की संस्तुति पर आपको पंचकर्म से संबंधित सुविधाएं मिलेंगी। इसके माध्यम से रोग मुक्त हो सकते हैं। स्थानीय पंचकर्म चिकित्सा विभाग में इन दिनों 35-40 मरीजों का औसत है। उत्तराखंड के खटीमा से लेकर शाहजहांपुर, हरदोई बरेली, बदायूं समेत कई जनपदों के मरीज यहां पर आते हैं।
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यह होता है पंचकर्म
पंचकर्म में शोधन और शमन चिकित्सा से शरीर को निरोगी बनाया जाता है। जिन रोगों का इलाज औषधियों से नहीं हो पाता है उन रोगों के दोषों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को पंचकर्म कहते हैं। पंचकर्म चिकित्सा में वमन, विरेचन, आस्थापन बस्ति, अनुवासन बस्ति और शिरो विरेचन का इस्तेमाल होता है। इससे वात, पित्त, कफ को संतुलित करके सेहत ठीक की जाती है।
स्थानिक स्वेद, नाड़ी स्वेद, सर्वांग वाष्प स्वेद, कटि बस्ति, पत्र पिंड स्वेद, शिरोधारा, नस्य कर्म, विरेचन, षष्टिक/ शाली पिंड स्वेद, बस्ति आदि की सेवाएं दी जाती हैं। पंचकर्म की इन सेवाओं को चिकित्सक की संस्तुति पर दिया जाता है। अगर किसी मरीज को 15 दिन सेवाएं दी जाएंगी तो उसके लिए सिर्फ 35 रुपये का पर्चा बनेगा। भविष्य में रक्त मोक्षक और अग्निकर्म की सेवाएं भी दी जाएंगी।

- डॉ. विजेंद्र प्रताप सिंह, पंचकर्म चिकित्सा के प्रभारी
अगर आप दवाएं खाते-खाते ऊब गए हैं। लाभ की बजाए नुकसान हो रहा है तो पंचकर्म अपनाएं और स्वस्थ हो जाएं। मानसिक तनाव, सिर दर्द, शरीर के विभिन्न हिस्सों के दर्द, खाँसी, अस्थमा, जुकाम, कफ, बुखार, भूख न लगने, चर्म रोग, मूत्र रोग, अतिनिद्रा, मिर्गी समेत कई रोगों में पंचकर्म से कुछ ही दिनों में फायदा नजर आने लगता है।
डॉ. हरीशंकर मिश्र, वरिष्ठ चिकित्सक व प्रोफेसर आयुर्वेदिक कॉलेज
पर्चा बनने का समय- सुबह 8.30 से दोपहर 2.30 बजे तक (रविवार अवकाश)
पंचकर्म और चिकित्सा परामर्श का समय- सुबह 9.00 बजे से दोपहर 3.00 बजे तक
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