{"_id":"5d6abab38ebc3e014757832d","slug":"health-pilibhit-news-bly374358076","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन डॉक्टरों का पैनल करेगा जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन डॉक्टरों का पैनल करेगा जांच
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ जीवित शिशु को मृत दर्शाने और फिर महिला की जान को खतरा बताकर गर्भपात के लिए दबाव बनाने के मामले में कई दिनों की टालमटोल के बाद आखिरकार डॉक्टर पर शिकंजा कसने को कार्रवाई आगे बड़ी है। शनिवार को अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर डीएम ने सख्ती दिखाई जिसके बाद पूरे प्रकरण की जांच को लेकर प्रभारी सीएमओ ने तीन डॉक्टरों की टीम गठित कर दो दिन में आख्या देने की बात कही है।
मामला एक डायग्नोस्टिक सेंटर का है। न्यूरिया निवासी नदीम ने गांधी स्टेडियम रोड स्थित एक नर्सिंग होम की सलह पर 24 जुलाई को उक्त डायग्नोस्टिक सेंटर पर पत्नी नेहा का अल्ट्रासाउंड कराया था। यहां गर्भस्थ जीवित शिशु की रिपोर्ट निगेटिव दे दी गई थी। इसके बाद अन्य दो अस्पतालों की रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु की रिपोर्ट पॉजीटिव मिलने के बाद महिला की जान को खतरा बताकर गर्भपात के लिए दबाव बनाया जाने लगा। मामला संज्ञान में आने पर डीएम के निर्देश पर करीब पांच दिन पूर्व प्रभारी सीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता ने टीबी अस्पताल के डॉ. राजेश भट्ट को प्रकरण की जांच सौंप दी थी। लेकिन डॉक्टर के रसूख और सत्ताधारी नेताओं के बाद कार्रवाई आग नहीं बढ़ सकी। शनिवार को इसको लेकर अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की तो डीएम वैभव श्रीवास्तव ने सख्ती दिखाई तो आनन-फानन में प्रभारी सीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता ने तीन डाक्टरों का पैनल गठित कर दिया है। महिला अस्पताल की डॉ. कमलेश मिश्रा, रेडियोलोजिस्ट डॉ. जगदीश और जांच से इंकार करने वाले डॉ. राजेश भट्ट को शामिल किया है।
विज्ञापन
मामला एक डायग्नोस्टिक सेंटर का है। न्यूरिया निवासी नदीम ने गांधी स्टेडियम रोड स्थित एक नर्सिंग होम की सलह पर 24 जुलाई को उक्त डायग्नोस्टिक सेंटर पर पत्नी नेहा का अल्ट्रासाउंड कराया था। यहां गर्भस्थ जीवित शिशु की रिपोर्ट निगेटिव दे दी गई थी। इसके बाद अन्य दो अस्पतालों की रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु की रिपोर्ट पॉजीटिव मिलने के बाद महिला की जान को खतरा बताकर गर्भपात के लिए दबाव बनाया जाने लगा। मामला संज्ञान में आने पर डीएम के निर्देश पर करीब पांच दिन पूर्व प्रभारी सीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता ने टीबी अस्पताल के डॉ. राजेश भट्ट को प्रकरण की जांच सौंप दी थी। लेकिन डॉक्टर के रसूख और सत्ताधारी नेताओं के बाद कार्रवाई आग नहीं बढ़ सकी। शनिवार को इसको लेकर अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की तो डीएम वैभव श्रीवास्तव ने सख्ती दिखाई तो आनन-फानन में प्रभारी सीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता ने तीन डाक्टरों का पैनल गठित कर दिया है। महिला अस्पताल की डॉ. कमलेश मिश्रा, रेडियोलोजिस्ट डॉ. जगदीश और जांच से इंकार करने वाले डॉ. राजेश भट्ट को शामिल किया है।
विज्ञापन