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Pilibhit News: लापरवाही और असंतुलित खानपान से हो रही खून की कमी
Fri, 31 Oct 2025 12:27 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 31 Oct 2025 12:27 AM IST
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पीलीभीत। खानपान, जागरूकता और सेहत के प्रति लापरवाही से जिले की महिलाओं में रक्त की कमी हो रही है। यह आंकड़ा करीब 50 प्रतिशत है। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच कराने वाली गंभीर हालत वाली एनेमिक महिलाओं का आंकड़ा दो से तीन प्रतिशत है। बात करें रक्तदान की तो स्वैच्छिक रक्तदान करने वाली महिलाओं को छोड़कर प्रत्येक 10 में सिर्फ दो महिलाएं ही 12.5 रक्त के आंकड़े में फिट बैठती हैं।
जिले में महिलाओं में खून की कमी का आंकड़ा चौकाने वाला है। यह आंकड़ा विभाग की ओर से किए जाने वाले जागरुकता कार्यक्रमों की पोल भी खोल रहा है। जिला व महिला अस्पताल में सितंबर में 2766 और अक्तूबर में आज तक 2139 महिलाओं की खून की जांच की गई। इसमें सितंबर में 11 से कम रक्त वाली महिलाओं की संख्या 1300 से अधिक और अक्तूबर में 1597 रही। इन महिलाओं में खून की कमी है। सितंबर और अक्तूबर में सात प्रतिशत से कम रक्त वाली महिलाओं का आंकड़ा 100 रहा। यह गंभीर एनेमिक श्रेणी में आती हैं। मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विभूति गोयल ने बताया कि 11 से कम होने पर ही रक्त की कमी मान ली जाती है। वहींं सात से कम वाली महिलाएं गंंभीर एनेमिक श्रेणी में आती हैं। 11 से कम रक्त वाली महिलाओं का आंकड़ा 50 प्रतिशत तक रहता है। महिलाओं को अपने खानपान पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। खुद की सेहत के प्रति सजग रहकर ही इस कमी को पूूरा किया जा सकता है।
करना था रक्तदान, जांंच में कम मिला रक्त
जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में पिछले तीन माह में सिर्फ पांच से सात महिलाओं ने भर्ती मरीजों के लिए रक्तदान किया। इनमें कई महिलाएं ऐसी पहुंची, जिन्होंने मरीज को रक्त देने की इच्छा जतााई। जांच में उनके शरीर में रक्त की मात्रा ही कम मिली। रक्तदान के लिए महिलाओें में 12.5 एमएल रक्त होना जरूरी है। इससे कम पर रक्त नहीं लिया जाता। वहीं तीन महीने में 21 महिलाओं ने स्वैच्छिक रक्तदान किया।
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100 में सिर्फ 19 महिलाएं ही कर सकी थीं रक्तदान
अगस्त में शहर में एक संस्था की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 100 महिलाएं पहुंची। पंजीकरण के बाद ब्लड बैंक की टीम ने जांच की तो सिर्फ 19 महिलाएं ही रक्तदान की श्रेणी में मिलीं। बाकी में निर्धारित मात्रा से कम रक्त था।
जांच में जिन महिलाओं में खून की कमी मिलती है। उन्हें आयरन की गोली वितरित की जाती है। जरुरत होने पर आयरन का इंजेक्शन भी लगवाया जाता है। महिलाओं को खानपान और जानकारी देकर जागरूक किया जाता है।- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ
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जिले में महिलाओं में खून की कमी का आंकड़ा चौकाने वाला है। यह आंकड़ा विभाग की ओर से किए जाने वाले जागरुकता कार्यक्रमों की पोल भी खोल रहा है। जिला व महिला अस्पताल में सितंबर में 2766 और अक्तूबर में आज तक 2139 महिलाओं की खून की जांच की गई। इसमें सितंबर में 11 से कम रक्त वाली महिलाओं की संख्या 1300 से अधिक और अक्तूबर में 1597 रही। इन महिलाओं में खून की कमी है। सितंबर और अक्तूबर में सात प्रतिशत से कम रक्त वाली महिलाओं का आंकड़ा 100 रहा। यह गंभीर एनेमिक श्रेणी में आती हैं। मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विभूति गोयल ने बताया कि 11 से कम होने पर ही रक्त की कमी मान ली जाती है। वहींं सात से कम वाली महिलाएं गंंभीर एनेमिक श्रेणी में आती हैं। 11 से कम रक्त वाली महिलाओं का आंकड़ा 50 प्रतिशत तक रहता है। महिलाओं को अपने खानपान पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। खुद की सेहत के प्रति सजग रहकर ही इस कमी को पूूरा किया जा सकता है।
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करना था रक्तदान, जांंच में कम मिला रक्त
जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में पिछले तीन माह में सिर्फ पांच से सात महिलाओं ने भर्ती मरीजों के लिए रक्तदान किया। इनमें कई महिलाएं ऐसी पहुंची, जिन्होंने मरीज को रक्त देने की इच्छा जतााई। जांच में उनके शरीर में रक्त की मात्रा ही कम मिली। रक्तदान के लिए महिलाओें में 12.5 एमएल रक्त होना जरूरी है। इससे कम पर रक्त नहीं लिया जाता। वहीं तीन महीने में 21 महिलाओं ने स्वैच्छिक रक्तदान किया।
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100 में सिर्फ 19 महिलाएं ही कर सकी थीं रक्तदान
अगस्त में शहर में एक संस्था की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 100 महिलाएं पहुंची। पंजीकरण के बाद ब्लड बैंक की टीम ने जांच की तो सिर्फ 19 महिलाएं ही रक्तदान की श्रेणी में मिलीं। बाकी में निर्धारित मात्रा से कम रक्त था।
जांच में जिन महिलाओं में खून की कमी मिलती है। उन्हें आयरन की गोली वितरित की जाती है। जरुरत होने पर आयरन का इंजेक्शन भी लगवाया जाता है। महिलाओं को खानपान और जानकारी देकर जागरूक किया जाता है।- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ