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प्रदूषण ने फिर बढ़ाई सांस रोगियों की धड़कनें, कई ने कराई कोरोना जांच
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पीलीभीत। लॉकडाउन खुलने के बाद वाहनों का प्रयोग और सड़क पर चहलकदमी बढ़ी तो प्रदूषण भी पहले की तरह रफ्तार पकड़ने लगा। ऐसे में सांस के रोगियों की संख्या में भी इजाफा भी हो रहा है। कई ने तो कोविड जांच भी करा डाली।
जनपद में अस्थमा के करीब 15 हजार मरीज हैं। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 50 के आसपास पहुंच गया था। प्रदूषण कम होने से पर्यावरण को लाभ पहुंचा ही था, साथ ही ऐसे मरीजों को भी परेशानी कम हो गई थी। अब अनलॉक-1 में वाहनों की आवाजाही बढ़ गई। प्रदूषण फिर से पीएम 2.5 के कणों का स्तर 100 से 150 प्रति मीटर क्यूब हो चुका है। अब राहत पा रहे श्वास रोगियों को फिर से दिक्कत आने लगी है। इसके अलावा नए मरीज भी निकलकर सामने आ रहे हैं। मरीज सरकारी चिकित्सालयों में टेलीमेडिसिन सुविधा के तहत डॉक्टर को फोन कर दवा पता कर रहे हैं। मरीजों की सांस फूलने पर उन्हें कोरोना संक्रमण का भी डर सताने लगता है। इसे लेकर वह काफी भयभीत हैं। बीते 15 दिनों में 10 से अधिक लोगों ने तो कोविड जांच भी करा ली। उन्हें कोविड-19 का संक्रमण तो नहीं निकला मगर एहतियात बरतने की सलाह डॉक्टरों ने दी है।
कोरोना और सांस की बीमारी के लक्षणों में ये हैं अंतर
श्वास रोगी की सांस तो फूलती है, मगर बुखार नहीं होता, जबकि कोरोना में बुखार हो सकता है।
दोनों ही बीमारियों में खांसी आती है लेकिन कोरोना संक्रमित की खांसी सूखी होती है।
कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज को कमजोरी आती है, जबकि, सांस रोगी को ऐसा नहीं होता।
सांस फूले तो यह करें
तुरंत पीठ के बल लेट जाएं।
45 डिग्री पर तकिया लगाकर लेटें।
इन्हेलर का उपयोग भी बढ़ा सकते हैं।
ऑक्सीजन के लिए खुले में आ जाएं।
डॉक्टर से भी चिकित्सीय परामर्श लें।
यह सच है कि अब दोबारा प्रदूषण बढ़ने पर श्वास रोगियों को दिक्कत आ रही है। टेलीमेडिसिन सुविधा के तहत कई रोगी फोन कर परामर्श ले रहे हैं। कोरोना और श्वास रोग के लक्षण अलग होते हैं। घबराएं नहीं, सावधानी बरतें। - डॉ. प्रमोद अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन
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जनपद में अस्थमा के करीब 15 हजार मरीज हैं। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 50 के आसपास पहुंच गया था। प्रदूषण कम होने से पर्यावरण को लाभ पहुंचा ही था, साथ ही ऐसे मरीजों को भी परेशानी कम हो गई थी। अब अनलॉक-1 में वाहनों की आवाजाही बढ़ गई। प्रदूषण फिर से पीएम 2.5 के कणों का स्तर 100 से 150 प्रति मीटर क्यूब हो चुका है। अब राहत पा रहे श्वास रोगियों को फिर से दिक्कत आने लगी है। इसके अलावा नए मरीज भी निकलकर सामने आ रहे हैं। मरीज सरकारी चिकित्सालयों में टेलीमेडिसिन सुविधा के तहत डॉक्टर को फोन कर दवा पता कर रहे हैं। मरीजों की सांस फूलने पर उन्हें कोरोना संक्रमण का भी डर सताने लगता है। इसे लेकर वह काफी भयभीत हैं। बीते 15 दिनों में 10 से अधिक लोगों ने तो कोविड जांच भी करा ली। उन्हें कोविड-19 का संक्रमण तो नहीं निकला मगर एहतियात बरतने की सलाह डॉक्टरों ने दी है।
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कोरोना और सांस की बीमारी के लक्षणों में ये हैं अंतर
श्वास रोगी की सांस तो फूलती है, मगर बुखार नहीं होता, जबकि कोरोना में बुखार हो सकता है।
दोनों ही बीमारियों में खांसी आती है लेकिन कोरोना संक्रमित की खांसी सूखी होती है।
कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज को कमजोरी आती है, जबकि, सांस रोगी को ऐसा नहीं होता।
सांस फूले तो यह करें
तुरंत पीठ के बल लेट जाएं।
45 डिग्री पर तकिया लगाकर लेटें।
इन्हेलर का उपयोग भी बढ़ा सकते हैं।
ऑक्सीजन के लिए खुले में आ जाएं।
डॉक्टर से भी चिकित्सीय परामर्श लें।
यह सच है कि अब दोबारा प्रदूषण बढ़ने पर श्वास रोगियों को दिक्कत आ रही है। टेलीमेडिसिन सुविधा के तहत कई रोगी फोन कर परामर्श ले रहे हैं। कोरोना और श्वास रोग के लक्षण अलग होते हैं। घबराएं नहीं, सावधानी बरतें। - डॉ. प्रमोद अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन
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