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Pilibhit News: सुरक्षा का दावा झूठा, पैनिक बटन बेकार
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डिपो पर खड़ी बस में बंद पड़े पैनिक बटन। संवाद
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नियमित जांच और रखरखाव के अभाव में दौड़ रहीं बसें, जिम्मेदार अंजान, लापरवाही पड़ सकती है भारी
पीलीभीत। रोडवेज बसों में सुरक्षित व सुविधाजनक सफर के दावे झूठे निकल रहे हैं। नियमित जांच और रखरखाव के अभाव में ये बसें दौड़ाए जा रहे हैं। आपात स्थिति में यात्रियों के लिए लगाए गए पैनिक बटन बेकार पड़े हैं तो कही फस्ट एड बॉक्स शो पीस बनकर रह गए हैं। शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में ये खामियां सामने आईं।
महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रोडवेज बसों में पैनिक बटन लगाने की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य था कि सफर के दौरान छेड़खानी, अभद्रता, मारपीट या किसी अन्य आपात स्थिति में महिला यात्री पैनिक बटन दबाकर तत्काल मदद की सूचना जिम्मेदारों तक पहुंचा सके। व्यवस्था लागू होने के समय इसे महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच के तौर पर प्रचारित किया गया था।
समय बीतने के साथ पैनिक बटन की नियमित जांच और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह है कि बसों में लगे सुरक्षा उपकरण अपनी उपयोगिता खोते जा रहे हैं। यहां तक, कई बसों में लगे फर्स्ट एड बॉक्स भी धूल फांक रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि यदि किसी आपात स्थिति में बटन ही काम न करे तो महिला यात्री आखिर किसके भरोसे मदद मांगेंगी।
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बता दें कि पीलीभीत से 109 बसें संचालित हो रही हैं। बताया जाता है कि इनमें से 35-40 बसों की स्थिति खराब है। किसी में कीले निकली है तो किसी में कुर्सी की हैंडिल टूटी पड़ी है। इस तरह फस्ट एड बॉक्स में भी तरह-तरह की कमी है। संवाद
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सीन एक-
पैनिक बटन ही दिखे गायब, कर्मियों को भी नहीं जानकारी
शहर के नौगवां चौराहे से रोडवेज बसों का संचालन किया जाता है। ऐसे में दोपहर करीब 12:30 बजे नौगवां चौराहे पर दिल्ली जाने के लिए रोडवेज बस चौराहे पर खड़ी दिखी। बस में कुछ यात्री बैठे हुए दिखाई दिए। चालक के बराबर वाली साइड में गेट तक एक भी पैनिक बटन नहीं लगा था। पूरे बस में महज पांच पैनिक बटन लगे दिखे, जबकि यह सभी सीटों पर होना चाहिए था।
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सीन दो-
पैनिक बटन लगे, लेकिन कवर में दिखे कैद
नौगवां चौराहे पर ही एक बस और खड़ी दिखी। इस बस में पैनिक बटन तो लगे दिखे, लेकिन पैनिक बटन लगवाने के बाद कवर में ही पैक दिखे। बटन को प्लास्टिक के ढक्कन से कवर किया गया था, जिसके ऊपर नीचे पेच कसे दिखे। लगवाने के बाद शायद इन्हें खोला ही नहीं गया था।
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सीन तीन-
धूल फांकता दिखा फर्स्ट एड बॉक्स, कर्मचारी को भी नहीं पता
रोडवेज डिपो से दिल्ली जाने के लिए एक बस करीब एक बजे रवाना हो रही थी। बस के अंदर जाने पर पता चला कि लंबी दूरी पर जाने वाली बसों में सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पैनिक बटन कवर दिखे, तो वहीं फर्स्ट एड बॉक्स धूल फांक रहा था। मौजूद कर्मचारी ने बताया कि लंबे समय से दवाएं इसमें नहीं रखी गई हैं। कुछ समय पूर्व पुरानी दवाएं निकाली जरूर गईं।
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नियमित परीक्षण हो तो सामने आएगी असली स्थिति
रोडवेज बसों में लगे पैनिक बटन की नियमित जांच कराई जाए तो यह पता चल सकता है कि कितने बटन वास्तव में काम कर रहे हैं और कितने खराब पड़े हैं। खराब उपकरणों को तत्काल दुरुस्त कराने के साथ ही समय-समय पर इनका परीक्षण कराया जाना जरूरी है।
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इसलिए जरूरी है पैनिक बटन
बसों में पैनिक बटन लगाने का उद्देश्य यात्रियों को आपात स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध कराना है। दुर्घटना, महिला सुरक्षा से जुड़ी घटना चालक-परिचालक की लापरवाही या अन्य गंभीर परिस्थितियों में यात्री इसका इस्तेमाल कर सकते है।
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क्या बोली महिला यात्री
बसों में पैनिक बटन महिलाओं की सुविधा के लिए लगाया गया है, तो इसकी जानकारी भी दी जानी चाहिए। चालक-परिचालक भी इसकी जानकारी नहीं देते है। कई बार बस में सफर किया।
- ममता।
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महिला सुरक्षा को लेकर बसों में कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। महिला यात्री कोई समस्या होने अपने आपको असहज महसूस करती है। यह बटन उनकी सुविधा के लिए काफी अच्छा है, लेकिन देखरेख के अभाव में लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- भावना।
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रोडवेज बसों में सभी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। यदि किसी बस में पैनिक बटन व फर्स्ट एड किट सही नहीं है तो इसे दिखवाया जाएगा। समय समय पर बसों की जांच होती है और उनमें जो भी मिलती है तो उनको दूर कराया जाता है।
- प्रांशू पाठक, एआरएम
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पीलीभीत। रोडवेज बसों में सुरक्षित व सुविधाजनक सफर के दावे झूठे निकल रहे हैं। नियमित जांच और रखरखाव के अभाव में ये बसें दौड़ाए जा रहे हैं। आपात स्थिति में यात्रियों के लिए लगाए गए पैनिक बटन बेकार पड़े हैं तो कही फस्ट एड बॉक्स शो पीस बनकर रह गए हैं। शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में ये खामियां सामने आईं।
महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रोडवेज बसों में पैनिक बटन लगाने की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य था कि सफर के दौरान छेड़खानी, अभद्रता, मारपीट या किसी अन्य आपात स्थिति में महिला यात्री पैनिक बटन दबाकर तत्काल मदद की सूचना जिम्मेदारों तक पहुंचा सके। व्यवस्था लागू होने के समय इसे महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच के तौर पर प्रचारित किया गया था।
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समय बीतने के साथ पैनिक बटन की नियमित जांच और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह है कि बसों में लगे सुरक्षा उपकरण अपनी उपयोगिता खोते जा रहे हैं। यहां तक, कई बसों में लगे फर्स्ट एड बॉक्स भी धूल फांक रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि यदि किसी आपात स्थिति में बटन ही काम न करे तो महिला यात्री आखिर किसके भरोसे मदद मांगेंगी।
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बता दें कि पीलीभीत से 109 बसें संचालित हो रही हैं। बताया जाता है कि इनमें से 35-40 बसों की स्थिति खराब है। किसी में कीले निकली है तो किसी में कुर्सी की हैंडिल टूटी पड़ी है। इस तरह फस्ट एड बॉक्स में भी तरह-तरह की कमी है। संवाद
सीन एक-
पैनिक बटन ही दिखे गायब, कर्मियों को भी नहीं जानकारी
शहर के नौगवां चौराहे से रोडवेज बसों का संचालन किया जाता है। ऐसे में दोपहर करीब 12:30 बजे नौगवां चौराहे पर दिल्ली जाने के लिए रोडवेज बस चौराहे पर खड़ी दिखी। बस में कुछ यात्री बैठे हुए दिखाई दिए। चालक के बराबर वाली साइड में गेट तक एक भी पैनिक बटन नहीं लगा था। पूरे बस में महज पांच पैनिक बटन लगे दिखे, जबकि यह सभी सीटों पर होना चाहिए था।
सीन दो-
पैनिक बटन लगे, लेकिन कवर में दिखे कैद
नौगवां चौराहे पर ही एक बस और खड़ी दिखी। इस बस में पैनिक बटन तो लगे दिखे, लेकिन पैनिक बटन लगवाने के बाद कवर में ही पैक दिखे। बटन को प्लास्टिक के ढक्कन से कवर किया गया था, जिसके ऊपर नीचे पेच कसे दिखे। लगवाने के बाद शायद इन्हें खोला ही नहीं गया था।
सीन तीन-
धूल फांकता दिखा फर्स्ट एड बॉक्स, कर्मचारी को भी नहीं पता
रोडवेज डिपो से दिल्ली जाने के लिए एक बस करीब एक बजे रवाना हो रही थी। बस के अंदर जाने पर पता चला कि लंबी दूरी पर जाने वाली बसों में सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पैनिक बटन कवर दिखे, तो वहीं फर्स्ट एड बॉक्स धूल फांक रहा था। मौजूद कर्मचारी ने बताया कि लंबे समय से दवाएं इसमें नहीं रखी गई हैं। कुछ समय पूर्व पुरानी दवाएं निकाली जरूर गईं।
नियमित परीक्षण हो तो सामने आएगी असली स्थिति
रोडवेज बसों में लगे पैनिक बटन की नियमित जांच कराई जाए तो यह पता चल सकता है कि कितने बटन वास्तव में काम कर रहे हैं और कितने खराब पड़े हैं। खराब उपकरणों को तत्काल दुरुस्त कराने के साथ ही समय-समय पर इनका परीक्षण कराया जाना जरूरी है।
इसलिए जरूरी है पैनिक बटन
बसों में पैनिक बटन लगाने का उद्देश्य यात्रियों को आपात स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध कराना है। दुर्घटना, महिला सुरक्षा से जुड़ी घटना चालक-परिचालक की लापरवाही या अन्य गंभीर परिस्थितियों में यात्री इसका इस्तेमाल कर सकते है।
क्या बोली महिला यात्री
बसों में पैनिक बटन महिलाओं की सुविधा के लिए लगाया गया है, तो इसकी जानकारी भी दी जानी चाहिए। चालक-परिचालक भी इसकी जानकारी नहीं देते है। कई बार बस में सफर किया।
- ममता।
महिला सुरक्षा को लेकर बसों में कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। महिला यात्री कोई समस्या होने अपने आपको असहज महसूस करती है। यह बटन उनकी सुविधा के लिए काफी अच्छा है, लेकिन देखरेख के अभाव में लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- भावना।
रोडवेज बसों में सभी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। यदि किसी बस में पैनिक बटन व फर्स्ट एड किट सही नहीं है तो इसे दिखवाया जाएगा। समय समय पर बसों की जांच होती है और उनमें जो भी मिलती है तो उनको दूर कराया जाता है।
- प्रांशू पाठक, एआरएम

डिपो पर खड़ी बस में बंद पड़े पैनिक बटन। संवाद

डिपो पर खड़ी बस में बंद पड़े पैनिक बटन। संवाद

डिपो पर खड़ी बस में बंद पड़े पैनिक बटन। संवाद

डिपो पर खड़ी बस में बंद पड़े पैनिक बटन। संवाद